तेलंगाना सूखा रिपोर्ट केंद्र को सौंपी, उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने कहा — सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भेजने को तैयार
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में आयोजित सर्वदलीय बैठक में घोषणा की कि राज्य में सूखे की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि केंद्रीय सहायता की ज़रूरत पड़ी, तो सरकार केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के लिए नई दिल्ली में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। यह बैठक अल नीनो के प्रभाव से उत्पन्न वर्षा की कमी और उससे जुड़ी सूखे जैसी स्थिति से निपटने के उपायों पर विचार-विमर्श के लिए राज्य सरकार द्वारा बुलाई गई थी।
सर्वदलीय बैठक का स्वरूप और उपस्थित प्रतिनिधि
बैठक में उप-समिति सदस्य एवं राज्य मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी, तुम्माला नागेश्वर राव, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, दानासारी सीताक्का और वकिति श्रीहरि सहित मुख्य सचिव संजय जाजू और नोडल अधिकारी रामकृष्ण राव उपस्थित रहे। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया और किसानों को राहत देने, पेयजल संकट और सिंचाई समस्याओं के समाधान पर सुझाव रखे।
कांग्रेस की ओर से अंजन कुमार यादव और किसान आयोग के अध्यक्ष कोडंडा रेड्डी, भारत राष्ट्र समिति (BRS) से विनोद कुमार, एल. रमना और सिंगिरेड्डी निरंजन रेड्डी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल के नेता अलेटी महेश्वर रेड्डी और एमएलसी कोमुरैया, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी और विधानसभा फ्लोर लीडर अकबरुद्दीन ओवैसी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राष्ट्रीय सचिव पल्ला वेंकट रेड्डी व राज्य सचिव कुनामनेनी सांबासिवा राव तथा सीपीएम (CPM) के राज्य सचिव जॉन वेस्ली बैठक में शामिल थे।
अल नीनो का असर और वर्षा की कमी
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की चुनौती इसलिए और गंभीर है क्योंकि वर्षा की कमी केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं है — पड़ोसी राज्यों और देश के अन्य हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश हुई है। इसका सीधा असर यह है कि जलाशयों में पड़ोसी राज्यों से जल प्रवाह की संभावना भी घट गई है। ऐसे में कुशल जल संसाधन प्रबंधन की अनिवार्यता और अधिक बढ़ गई है।
गौरतलब है कि तेलंगाना विधानसभा में इससे पहले भी अल नीनो के प्रभाव पर चर्चा हो चुकी है और सरकार ने वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों से परामर्श लेने के साथ-साथ एक विशेष समिति भी गठित की है।
सरकार की तैयारी और कार्य योजना
भट्टी विक्रमार्क के अनुसार, सरकार जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण स्तर को ध्यान में रखकर विभागवार समन्वित कार्य योजना तैयार कर रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पेयजल की कमी न हो, इसके लिए अग्रिम व्यवस्था की जाएगी। पशुओं के लिए पेयजल और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी इस योजना का अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले महीनों में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाकर पहले से तैयारी कर रही है और सभी राजनीतिक दलों के सुझावों को व्यवहार्यता के आधार पर कार्य योजना में शामिल करने का प्रयास करेगी।
राजनीतिक सहयोग की अपील
उपमुख्यमंत्री ने सभी दलों से संकट की इस घड़ी में राजनीतिक आलोचना को परे रखकर व्यापक जनहित में सरकार के साथ सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक भावना का सम्मान करते हुए ही सभी दलों को इस बैठक में आमंत्रित किया गया था और प्रतिनिधियों के सुझाव दर्ज कर लिए गए हैं।
आगे क्या होगा
सरकार वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह पर विचार करते हुए स्थिति के अनुसार निर्णय लेती रहेगी। जन जागरूकता अभियान भी जारी है। यदि केंद्र से अतिरिक्त सहायता की ज़रूरत पड़ी, तो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली भेजने का रास्ता खुला है — यह संकेत देता है कि तेलंगाना इस सूखे को राज्य की सीमाओं के भीतर ही नहीं, बल्कि केंद्र के सहयोग से हल करने की रणनीति पर काम कर रहा है।