19 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बीआरएस एमएलसी श्रवण दासोजू ने सीएम रेवंत रेड्डी से माँगा श्वेत पत्र, सूखा-अल नीनो प्रबंधन पर उठाए 10 सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बीआरएस एमएलसी श्रवण दासोजू ने सीएम रेवंत रेड्डी से माँगा श्वेत पत्र, सूखा-अल नीनो प्रबंधन पर उठाए 10 सवाल

सारांश

बीआरएस एमएलसी डॉ. श्रवण दासोजू ने तेलंगाना सरकार पर अप्रैल 2026 की आईएमडी चेतावनी को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब तक फसलें सूख गईं और जलाशय खाली हो गए, तब जाकर उप-समिति बनाई गई। उन्होंने 15 दिन में रिपोर्ट और श्वेत पत्र की माँग रखी है।

मुख्य बातें

श्रवण दासोजू ने 19 अक्टूबर 2026 को सीएम रेवंत रेड्डी को खुला पत्र लिखकर सूखा प्रबंधन पर श्वेत पत्र माँगा।
आईएमडी ने अप्रैल 2026 में ही अल नीनो की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने अक्टूबर मध्य तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
राज्य के 40% से अधिक तालाबों में जल भंडारण 25% से भी कम बचा है; कृष्णा-गोदावरी बेसिन में जलस्तर लगातार गिर रहा है।
बीआरएस ने उप-समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश जारी करने और कालेश्वरम परियोजना की जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की।
कैबिनेट उप-समिति के आदेश में समय सीमा, आपातकालीन बजट और नगर प्रशासन विभाग की भागीदारी नहीं होने पर आपत्ति जताई गई।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधान परिषद सदस्य डॉ. श्रवण दासोजू ने 19 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और नवगठित सूखा व अल नीनो कैबिनेट उप-समिति को एक खुला पत्र भेजकर तेलंगाना सरकार की कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सूखा प्रबंधन पर हुए खर्च का विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने समेत 10 सूत्री माँगें सरकार के सामने रखी हैं।

देर से उठाए गए कदम का आरोप

डॉ. दासोजू ने आरोप लगाया कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) और मौसम विशेषज्ञों ने अप्रैल 2026 में ही सामान्य से कम वर्षा और अल नीनो के खतरे के बारे में चेतावनी जारी कर दी थी। उनके अनुसार, इतनी अग्रिम सूचना के बावजूद सरकार ने अक्टूबर के मध्य तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि जब जलाशयों का जलस्तर घट चुका था, खरीफ फसलें सूख चुकी थीं और बिजली की माँग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई, तब जाकर जीओआरटी संख्या 1523 के तहत उप-समिति का गठन किया गया।

कैबिनेट उप-समिति में बताई गईं खामियाँ

बीआरएस नेता ने दावा किया कि सरकारी आदेश में कई गंभीर खामियाँ हैं। उन्होंने बताया कि उप-समिति के लिए रिपोर्ट पेश करने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है और न ही कोई विशेष आपातकालीन बजट आवंटित किया गया है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में संभावित पेयजल संकट के बावजूद नगर प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग को समिति में शामिल नहीं किया गया।

जल संकट और बिजली की स्थिति

डॉ. दासोजू ने दावा किया कि कृष्णा और गोदावरी बेसिन में जलस्तर लगातार गिर रहा है और राज्य के 40 प्रतिशत से अधिक तालाबों में जल भंडारण 25 प्रतिशत से भी कम रह गया है। बिजली की रिकॉर्ड माँग के कारण राज्य को खुले बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कन्नेपल्ली पंप हाउस के अप्रभावी संचालन के कारण गोदावरी का पानी बड़ी मात्रा में बह गया, जबकि उत्तर तेलंगाना के किसान सिंचाई संकट झेलते रहे।

10 सूत्री माँगें

अपने पत्र में बीआरएस एमएलसी ने सरकार के सामने 10 प्रमुख माँगें रखी हैं। इनमें उप-समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने के लिए सरकारी आदेश में संशोधन, सूखा प्रबंधन पर हुए खर्च का विस्तृत श्वेत पत्र, कालेश्वरम परियोजना और बिजली क्षेत्र के संचालन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना, सूखा प्रभावित मंडलों की आधिकारिक घोषणा, और किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज, इनपुट सब्सिडी व पेयजल सुरक्षा उपाय लागू करना शामिल हैं।

आगे की राह

डॉ. दासोजू ने स्पष्ट कहा कि इस संकट को केवल प्राकृतिक आपदा बताकर सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती। उन्होंने राज्य सरकार से पारदर्शिता बरतने और सूखे से प्रभावित नागरिकों व किसानों की मदद के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में मानसून की वापसी के बाद भी जल संकट की स्थिति बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बजट और शहरी जल विभाग की अनुपस्थिति जैसी संरचनात्मक खामियाँ बताती हैं कि यह समिति कार्रवाई से ज़्यादा दिखावे के लिए है। कालेश्वरम और कन्नेपल्ली पर उठाए सवाल सीधे जवाबदेही की माँग करते हैं — लेकिन बीआरएस खुद कालेश्वरम के निर्माण काल में सत्ता में थी, इसलिए यह आरोप-प्रत्यारोप दोनों पक्षों की विरासत की परीक्षा भी है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीआरएस एमएलसी डॉ. श्रवण दासोजू ने तेलंगाना सरकार से क्या माँग की है?
डॉ. दासोजू ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से सूखा प्रबंधन पर हुए खर्च का विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने और कैबिनेट उप-समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने की माँग की है। उन्होंने कालेश्वरम परियोजना की जानकारी सार्वजनिक करने और किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज देने की भी माँग की है।
तेलंगाना में सूखे की स्थिति कितनी गंभीर है?
बीआरएस एमएलसी के दावों के अनुसार, राज्य के 40 प्रतिशत से अधिक तालाबों में जल भंडारण 25 प्रतिशत से भी कम रह गया है और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में जलस्तर लगातार गिर रहा है। बिजली की रिकॉर्ड माँग के कारण राज्य को खुले बाजार से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी।
तेलंगाना की कैबिनेट उप-समिति का गठन कब और क्यों किया गया?
सूखा और अल नीनो परिस्थितियों से निपटने के लिए जीओआरटी संख्या 1523 के तहत कैबिनेट उप-समिति का गठन 19 अक्टूबर 2026 को किया गया। बीआरएस के अनुसार, आईएमडी ने अप्रैल 2026 में ही चेतावनी दे दी थी, फिर भी सरकार ने अक्टूबर के मध्य तक इंतजार किया।
कन्नेपल्ली पंप हाउस विवाद क्या है?
डॉ. दासोजू ने आरोप लगाया कि कन्नेपल्ली पंप हाउस का प्रभावी संचालन नहीं किए जाने के कारण गोदावरी का बड़ी मात्रा में पानी बहकर आगे निकल गया। इससे उत्तर तेलंगाना के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल सका, जिसे उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही बताया।
बीआरएस ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप क्यों लगाया?
बीआरएस एमएलसी ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध और आपराधिक लापरवाही का आरोप लगाया, हालाँकि उन्होंने इसके ठोस साक्ष्य अपने पत्र में विस्तार से नहीं दिए। उनका मुख्य तर्क यह है कि समय पर कदम न उठाकर सरकार ने संकट को और गहरा किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले