30 सितंबर 2026
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नागपट्टिनम में 11,424 एकड़ सांबा धान संकट में, कावेरी जल न मिलने से किसान बेहाल

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नागपट्टिनम में 11,424 एकड़ सांबा धान संकट में, कावेरी जल न मिलने से किसान बेहाल

सारांश

तमिलनाडु के नागपट्टिनम में 11,424 एकड़ सांबा धान संकट में है — मेट्टूर बांध 81 दिन देरी से खुला, हरिचंद्र नदी सूखी, और किसान पहले ही कुरुवई फसल गँवा चुके हैं। अब साहूकारों का कर्ज और बैंक ऋण की अड़चन मिलकर एक पूरे कृषि समुदाय को दोहरी मार दे रही है।

मुख्य बातें

नागपट्टिनम के थलैनायर क्षेत्र में 11,424 एकड़ सांबा धान की फसल पानी के अभाव में संकट में है।
मेट्टूर बांध इस वर्ष 1 सितंबर को खोला गया — सामान्य तारीख 12 जून से 81 दिन बाद।
करीब 20 दिन पहले बोए गए बीजों को पानी न मिलने से केवल 50-60% बीजों के अंकुरित होने की संभावना।
समेत अनेक किसान निजी साहूकारों से कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, कुरुवई फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है।
जल संसाधन विभाग ने 700 क्यूसेक पानी छोड़ने की बात कही, लेकिन यह केवल डेढ़ दिन के लिए उपलब्ध रहेगा।
VAO द्वारा फसल उगने के बाद ही अडंगल प्रमाणपत्र जारी करने की शर्त से किसानों को बैंक ऋण मिलना मुश्किल।

तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के थलैनायर क्षेत्र में कावेरी नदी का पर्याप्त जल न पहुँचने के कारण करीब 11,424 एकड़ में लगी सांबा धान की फसल गंभीर संकट में है। मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने के लगभग एक महीने बाद भी सिंचाई नहरें सूखी पड़ी हैं और हाल ही में बोए गए धान के बीज तेज गर्मी में सूखते जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब किसान पहले ही कुरुवई धान की फसल गँवा चुके हैं और अब सांबा पर भी वही खतरा मँडरा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

इन खेतों की सिंचाई मुख्यतः हरिचंद्र नदी पर निर्भर है। किसानों के अनुसार करीब 20 दिन पहले बोए गए बीजों को अब तक पर्याप्त पानी नहीं मिला है। स्थिति यह है कि अगर अभी पानी पहुँच भी जाए तो केवल 50 से 60 प्रतिशत बीजों के ही अंकुरित होने की संभावना बताई जा रही है।

घोषित जल-आपूर्ति अवधि में अब केवल करीब 15 दिन शेष हैं। किसान रामनाथन एम., जिन्होंने 16 एकड़ में मध्यम अवधि वाली धान की किस्में बोई हैं, का कहना है कि खेत अब बंजर ज़मीन जैसे दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि थलैनायर और वेदारण्यम की ओर जाने वाली नदियों में बहुत कम पानी पहुँचा है और कई शाखा नहरें अभी भी सूखी हैं।

मेट्टूर बांध और देरी की पृष्ठभूमि

मेट्टूर बांध को इस वर्ष 1 सितंबर को खोला गया, जो सामान्य निर्धारित तारीख 12 जून से 81 दिन बाद है। सरकार ने 45 दिनों तक पानी छोड़ने की घोषणा की थी, जिसके बाद किसानों ने मध्यम अवधि की सांबा किस्मों की सीधी बुआई शुरू की। हालाँकि, किसानों का तर्क है कि फसल तैयार होने के लिए 45 दिन की जल-आपूर्ति अवधि पर्याप्त नहीं है।

गौरतलब है कि कम वर्षा ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। जिले के अंतिम छोर वाले सिंचाई क्षेत्रों तक केवल कुछ सौ क्यूसेक पानी ही पहुँच सका है, जो थलैनायर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के लिए नाकाफी है।

किसानों पर आर्थिक असर

पानी की कमी ने किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमज़ोर कर दिया है। कुरुवई फसल के नुकसान के बाद सांबा की खेती शुरू करने के लिए अनेक किसानों ने निजी साहूकारों से कर्ज लिया था। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंकों और सहकारी समितियों से कृषि ऋण मिलना मुश्किल हो गया है, क्योंकि ग्राम प्रशासनिक अधिकारियों (VAO) की ओर से कहा गया है कि खेत में फसल उगने के बाद ही अडंगल प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है — जो एक ऐसी शर्त है जो संकट के इस दौर में किसानों को और असहाय बना देती है।

सरकार की प्रतिक्रिया

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तिरुवरूर के थट्टनकोविल से करीब 700 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और इसके हरिचंद्र नदी में पहुँचने की उम्मीद जताई गई। हालाँकि, किसानों के अनुसार अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह पानी केवल करीब डेढ़ दिन तक ही उपलब्ध रहेगा, क्योंकि अन्य नहरों को भी आपूर्ति करनी है।

आगे क्या होगा

किसानों की आशंका है कि इतनी कम अवधि के लिए पानी छोड़े जाने से मुश्किल से आधे क्षेत्र की ही सिंचाई हो पाएगी। यदि निर्धारित जल-आपूर्ति अवधि समाप्त होने से पहले पर्याप्त पानी नहीं पहुँचा, तो हजारों एकड़ में खड़ी सांबा फसल बर्बाद हो सकती है। यह स्थिति नागपट्टिनम के कृषि समुदाय के लिए एक साल में दूसरी बड़ी फसल-विफलता का संकट बन सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागपट्टिनम में सांबा धान की फसल पर संकट क्यों आया है?
नागपट्टिनम के थलैनायर क्षेत्र में कावेरी नदी का पर्याप्त जल न पहुँचने से 11,424 एकड़ सांबा धान की फसल सूख रही है। मेट्टूर बांध 81 दिन की देरी से खुला और हरिचंद्र नदी व शाखा नहरें अभी भी सूखी हैं, जिससे हाल ही में बोए गए बीजों को पानी नहीं मिल पा रहा।
मेट्टूर बांध इस साल कब खोला गया और सामान्य तारीख क्या है?
मेट्टूर बांध इस वर्ष 1 सितंबर को खोला गया, जबकि सामान्य निर्धारित तारीख 12 जून है — यानी 81 दिन की देरी। सरकार ने 45 दिनों तक पानी छोड़ने की घोषणा की, लेकिन किसानों का कहना है कि यह अवधि फसल तैयार होने के लिए पर्याप्त नहीं है।
किसानों की आर्थिक स्थिति पर इस संकट का क्या असर पड़ा है?
कुरुवई फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है और सांबा की खेती के लिए किसानों ने निजी साहूकारों से कर्ज लिया है। बैंकों व सहकारी समितियों से ऋण मिलना भी मुश्किल है क्योंकि VAO फसल उगने के बाद ही अडंगल प्रमाणपत्र जारी करते हैं।
जल संसाधन विभाग ने इस संकट पर क्या कदम उठाए हैं?
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने तिरुवरूर के थट्टनकोविल से करीब 700 क्यूसेक पानी छोड़ने की जानकारी दी है। हालाँकि यह पानी केवल डेढ़ दिन के लिए उपलब्ध रहेगा, जिससे अनुमानतः आधे क्षेत्र की ही सिंचाई हो पाएगी।
अगर समय पर पानी न मिला तो फसल का क्या होगा?
किसानों के अनुसार अब तक पानी न मिलने से केवल 50 से 60 प्रतिशत बीजों के अंकुरित होने की संभावना है। यदि निर्धारित जल-आपूर्ति अवधि समाप्त होने से पहले पर्याप्त पानी नहीं पहुँचा, तो हजारों एकड़ में खड़ी सांबा फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है और किसानों को एक साल में दूसरी बड़ी फसल-विफलता झेलनी पड़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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