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कावेरी जल संकट: त्रिची किसानों की 17 नहरों में पानी छोड़ने की माँग, सांबा धान की नर्सरियाँ सूखने की कगार पर

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कावेरी जल संकट: त्रिची किसानों की 17 नहरों में पानी छोड़ने की माँग, सांबा धान की नर्सरियाँ सूखने की कगार पर

सारांश

त्रिची के किसान कावेरी जल की राह देख रहे हैं — मेट्टूर से 12,000 क्यूसेक छोड़े जाने के बावजूद खेत प्यासे हैं। 54,929 हेक्टेयर में सांबा धान की खेती दाँव पर है और किसानों का कहना है कि मौजूदा प्रवाह महज 25 दिन चलेगा। यह सिर्फ पानी की लड़ाई नहीं — पूरे मौसम की फसल का सवाल है।

मुख्य बातें

त्रिची जिले के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से 17 सिंचाई नहरों में कावेरी का पानी तत्काल छोड़ने की माँग की है।
मेट्टूर जलाशय में मंगलवार शाम जलस्तर 84.16 फीट ; आवक 3,867 क्यूसेक के मुकाबले निकासी 12,000 क्यूसेक ।
किसानों का अनुमान है कि मौजूदा जल प्रवाह केवल 25 दिनों तक चल सकता है।
पिछले वर्ष त्रिची में 54,929 हेक्टेयर में सांबा धान की खेती हुई थी; इस सीजन का लक्ष्य अभी अघोषित।
थिरुप्पराईथुरई में पानी छोड़े जाने के तीन सप्ताह बाद भी पुथु अय्यन नहर तक जल नहीं पहुँचा।
किसान संगठन ने सरकार से कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के जरिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करने की अपील की।

तमिलनाडु के त्रिची जिले में सांबा धान की खेती गहरे संकट में है — किसानों ने राज्य सरकार से माँग की है कि सभी 17 सिंचाई नहरों में कावेरी नदी का पानी तत्काल छोड़ा जाए। किसानों की चेतावनी है कि यदि जल्द आपूर्ति नहीं हुई, तो मेट्टूर से कराइकल तक पानी पहुँचने के बाद भी सांबा धान की नर्सरियाँ सूख सकती हैं और पूरे मौसम की फसल बर्बाद हो सकती है।

मुख्य घटनाक्रम

1 सितंबर को मेट्टूर जलाशय से पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई और रविवार को यह पानी कराइकल तक पहुँचा। इसके बाद 7 सितंबर को कल्लनाई से पानी छोड़े जाने के एक दिन बाद डेल्टा क्षेत्र की नहरों में जल प्रवाह शुरू किया गया। बावजूद इसके, थिरुप्पराईथुरई के किसानों ने बताया कि पानी छोड़े जाने के तीन सप्ताह बाद भी पुथु अय्यन नहर तक जल नहीं पहुँचा है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उय्याकोंडन समेत कुछ नहरों में पानी छोड़ा गया है और उम्मीद जताई कि यह बुधवार तक खेतों तक पहुँच जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि पानी के चरणबद्ध वितरण के कारण खेतों तक पहुँचने में एक-दो दिन और लग सकते हैं।

जलाशय की स्थिति और चिंताजनक आँकड़े

मंगलवार शाम तक मेट्टूर जलाशय का जलस्तर 84.16 फीट था और इसमें 46.228 हजार मिलियन घन फीट जल संग्रहित था। जल संसाधन विभाग के आँकड़ों के अनुसार, जलाशय में पानी की आवक 3,867 क्यूसेक थी, जबकि 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।

आवक और निकासी के बीच यह बड़ा अंतर किसानों की उस आशंका को बल देता है कि मौजूदा जल प्रवाह केवल 25 दिनों तक ही चल सकता है। किसानों ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि नहरों में पानी कम होने की स्थिति में फसलों को बचाने के लिए क्या वैकल्पिक योजना है।

किसानों की समस्याएँ और माँगें

त्रिची के किसानों ने बताया कि उन्होंने नहरों के जरिए निरंतर जल आपूर्ति की उम्मीद में नर्सरियाँ तैयार की थीं, लेकिन अनेक खेतों तक अब तक पानी नहीं पहुँचा है। इससे इस मौसम में रोपाई की योजना अधर में लटकी है।

कुछ किसानों ने यह भी बताया कि बिजली कटौती के कारण वे नर्सरी की सिंचाई के लिए इलेक्ट्रिक पंप नहीं चला पा रहे। उन्होंने सरकार से डीजल पंप सेट चलाने के लिए ईंधन सब्सिडी देने की माँग की है ताकि नर्सरियाँ बचाई जा सकें।

इसके अलावा, किसानों ने यह भी शिकायत की कि कृषि विभाग ने अभी तक मौजूदा सीजन के लिए खेती का लक्ष्य स्पष्ट नहीं किया है, जिससे रोपाई की योजना बनाना कठिन हो रहा है। पिछले वर्ष त्रिची जिले में 54,929 हेक्टेयर भूमि पर सांबा धान की खेती हुई थी।

किसान संगठन की माँग

तमिलनाडु अखिल किसान संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष पी.आर. पांडियन ने सरकार से अपील की है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अंतर्गत कावेरी जल में तमिलनाडु का उचित हिस्सा दिलाने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करे। उनका कहना है कि राज्य को अपने अधिकार के लिए कानूनी और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय होना होगा।

आगे क्या होगा

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि नहरों में पानी का प्रवाह जारी रहेगा और शीघ्र ही सभी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचेगा। हालाँकि, किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सांबा धान की नर्सरियाँ नष्ट हो जाएँगी और इस सीजन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। त्रिची की हजारों एकड़ कृषि भूमि का भविष्य अब सरकार के अगले कदम पर टिका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर सीजन में यही दृश्य दोहराया जाता है — किसान इंतजार करते हैं, नर्सरियाँ सूखती हैं, और सरकारें आश्वासन देती हैं। मेट्टूर से 12,000 क्यूसेक छोड़ने और महज 3,867 क्यूसेक आवक के बीच का अंतर बताता है कि जलाशय पर दबाव कितना गहरा है — और यह 25 दिन की समय-सीमा कोई अनुमान नहीं, बल्कि चेतावनी है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य के पास कोई ठोस आकस्मिक योजना है, या हर साल की तरह इस बार भी किसान बिजली कटौती और डीजल की महँगाई के बीच अपनी फसल बचाने को अकेले छोड़ दिए जाएँगे।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिची के किसान कावेरी नहरों में पानी की माँग क्यों कर रहे हैं?
त्रिची जिले के किसानों ने सांबा धान की नर्सरियाँ लगाई हैं, लेकिन कई खेतों तक अब तक पानी नहीं पहुँचा है। मेट्टूर से पानी छोड़े जाने के बावजूद 17 में से कई नहरों में जल प्रवाह अपर्याप्त है, जिससे नर्सरियाँ सूखने और पूरे सीजन की फसल बर्बाद होने का खतरा है।
मेट्टूर जलाशय की मौजूदा स्थिति क्या है?
मंगलवार शाम तक मेट्टूर जलाशय का जलस्तर 84.16 फीट था और 46.228 हजार मिलियन घन फीट जल संग्रहित था। जल संसाधन विभाग के आँकड़ों के अनुसार आवक 3,867 क्यूसेक थी, जबकि 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था — यह अंतर किसानों की चिंता का मुख्य कारण है।
सांबा धान की खेती त्रिची में कितने क्षेत्र में होती है?
पिछले वर्ष त्रिची जिले में 54,929 हेक्टेयर भूमि पर सांबा धान की खेती हुई थी। इस सीजन के लिए कृषि विभाग ने अभी तक खेती का लक्ष्य घोषित नहीं किया है, जिससे किसानों को रोपाई की योजना बनाने में कठिनाई हो रही है।
किसान संगठन ने सरकार से क्या अपील की है?
तमिलनाडु अखिल किसान संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष पी.आर. पांडियन ने सरकार से अपील की है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत कावेरी जल में तमिलनाडु का हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करे।
बिजली कटौती से किसानों को क्या परेशानी हो रही है?
बिजली कटौती के कारण किसान नर्सरी की सिंचाई के लिए इलेक्ट्रिक पंप नहीं चला पा रहे। उन्होंने सरकार से डीजल पंप सेट चलाने के लिए ईंधन सब्सिडी देने की माँग की है ताकि नर्सरियाँ सूखने से बचाई जा सकें।
राष्ट्र प्रेस
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