29 अगस्त 2026
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सांबा धान के लिए मेट्टूर बांध से 150 दिन पानी दे सरकार: सीपीआई(एम) तमिलनाडु

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सांबा धान के लिए मेट्टूर बांध से 150 दिन पानी दे सरकार: सीपीआई(एम) तमिलनाडु

सारांश

सीपीआई(एम) तमिलनाडु ने मेट्टूर बांध से 150 दिन पानी छोड़ने की माँग की है — जबकि सरकार ने केवल 45 दिन का संकेत दिया है। कावेरी डेल्टा के किसानों की सांबा फसल दाँव पर है, और कर्नाटक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप भी जुड़ा है।

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) तमिलनाडु राज्य सचिव पी.
शनमुगम ने 29 अगस्त 2026 को राज्य सरकार से मेट्टूर बांध से 120-150 दिन पानी छोड़ने की माँग की।
जल संसाधन मंत्री के 45 दिन के बयान से कावेरी डेल्टा के किसानों में भ्रम और चिंता फैली।
मेट्टूर बांध का जलस्तर 90 फीट तक पहुँचने की संभावना; सरकार से पूरे सांबा मौसम के लिए उचित प्रबंध की अपेक्षा।
कर्नाटक पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार कावेरी जल हिस्सा न देने का आरोप; तमिलनाडु से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की माँग।
तमिलनाडु में 5 लाख एकड़ से अधिक बंजर भूमि उपलब्ध; उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के तमिलनाडु राज्य सचिव पी. शनमुगम ने 29 अगस्त 2026 को राज्य सरकार से माँग की कि कावेरी डेल्टा के किसानों को सांबा धान की फसल पूरी करने के लिए मेट्टूर बांध से कम से कम 120 से 150 दिनों तक निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जल संसाधन मंत्री के 45 दिन के जल-अवधि वाले बयान ने किसानों में भ्रम और गहरी चिंता पैदा कर दी है।

मुख्य माँग और किसानों की चिंता

शनमुगम ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा मेट्टूर जलाशय से पानी छोड़े जाने की घोषणा से किसानों को प्रारंभिक राहत तो मिली, लेकिन जल संसाधन मंत्री के बयान ने स्थिति को उलझा दिया। उन्होंने कहा कि केवल 45 दिनों की जल उपलब्धता में धान की फसल सफलतापूर्वक नहीं उगाई जा सकती, क्योंकि सांबा धान को पकने में 120 से 150 दिन लगते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि मेट्टूर बांध का जलस्तर 90 फीट तक पहुँचने की संभावना है, इसलिए सरकार के पास पूरे सांबा मौसम को पूरा करने के लिए उचित प्रबंध करने का अवसर है।

कर्नाटक पर आरोप और सर्वोच्च न्यायालय का संदर्भ

सीपीआई(एम) नेता ने कर्नाटक सरकार पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार हर माह तमिलनाडु को कावेरी नदी के पानी का उसका उचित हिस्सा जारी न करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, कर्नाटक सरकार अतिरिक्त पानी केवल तभी छोड़ती है जब उसके अपने जलाशय भर जाते हैं।

शनमुगम ने माँग की कि तमिलनाडु सरकार सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर केंद्र सरकार पर दबाव बनाए, ताकि राज्य को कावेरी जल में उसका न्यायोचित हिस्सा मिल सके।

कृषि भूमि अधिग्रहण पर विरोध

परंदूर हवाई अड्डा परियोजना और होसुर में प्रस्तावित हवाई अड्डे के संदर्भ में शनमुगम ने कहा कि तीन फसलें देने में सक्षम उपजाऊ कृषि भूमि को किसी भी अवसंरचना परियोजना के लिए अधिग्रहित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में 5 लाख एकड़ से अधिक बंजर या अनुपयोगी भूमि उपलब्ध है, और सरकार को विकास परियोजनाओं के लिए ऐसी भूमि को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने मंत्री के.ए. सेंगोत्तैयान के कृषि भूमि अधिग्रहण संबंधी बयान की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह टिप्पणी अनुचित है तथा इससे किसानों में गंभीर असंतोष उत्पन्न हुआ है।

छात्र-युवा संगठनों की निगरानी पर आपत्ति

शनमुगम ने कॉलेज परिसरों में वामपंथी संबद्ध छात्र और युवा संगठनों के विरोध प्रदर्शनों की निगरानी करने के निर्देश वाले सरकारी आदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस आदेश के लिए मुख्य सचिव को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री विजय को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की माँग की है। पार्टी सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगी।

आगे की राह

यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब कावेरी जल विवाद दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तनाव का कारण रहा है। गौरतलब है कि सांबा धान का मौसम डेल्टा क्षेत्र के लाखों किसानों की आजीविका से सीधे जुड़ा है। सीपीआई(एम) की माँगों पर राज्य सरकार का रुख आने वाले दिनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अनिश्चितता, किसानों की चिंता। इस बार भी मुख्यमंत्री की घोषणा और मंत्री के बयान के बीच की खाई ने वही पुरानी कहानी दोहराई है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार कर्नाटक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराने के लिए केंद्र पर पर्याप्त दबाव बनाती है, या हर मौसम में डेल्टा के किसान अनिश्चितता में ही बुआई करते रहेंगे। 5 लाख एकड़ बंजर भूमि का उल्लेख यह भी रेखांकित करता है कि विकास और कृषि के बीच टकराव अनावश्यक है — यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई(एम) ने मेट्टूर बांध से कितने दिन पानी छोड़ने की माँग की है?
सीपीआई(एम) तमिलनाडु ने राज्य सरकार से माँग की है कि मेट्टूर बांध से कम से कम 120 से 150 दिनों तक पानी छोड़ा जाए। पार्टी का कहना है कि सांबा धान की फसल पकने के लिए इतने दिनों की निरंतर जल आपूर्ति अनिवार्य है।
जल संसाधन मंत्री के बयान से किसानों में क्यों चिंता फैली?
जल संसाधन मंत्री ने कहा कि पानी केवल 45 दिनों तक ही छोड़ा जाएगा, जबकि सांबा धान की खेती के लिए 120-150 दिन की जल आपूर्ति जरूरी है। इस अंतर के कारण कावेरी डेल्टा के किसानों में भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा हुई।
कर्नाटक पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
सीपीआई(एम) नेता पी. शनमुगम ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद हर माह तमिलनाडु को कावेरी नदी का उसका उचित जल हिस्सा नहीं देती। उनके अनुसार, कर्नाटक केवल तभी अतिरिक्त पानी छोड़ता है जब उसके अपने जलाशय भर जाते हैं।
परंदूर हवाई अड्डे पर सीपीआई(एम) का रुख क्या है?
सीपीआई(एम) ने उपजाऊ कृषि भूमि को किसी भी अवसंरचना परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि तमिलनाडु में 5 लाख एकड़ से अधिक बंजर भूमि उपलब्ध है, जिसे विकास परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
छात्र संगठनों की निगरानी वाले आदेश पर सीपीआई(एम) ने क्या कहा?
सीपीआई(एम) ने कॉलेज परिसरों में वामपंथी छात्र-युवा संगठनों की निगरानी के सरकारी आदेश की आलोचना की और मुख्य सचिव को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने मुख्यमंत्री विजय को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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