तेलंगाना में सूखे जैसे हालात: किसानों से यासंगी फसल न बोने की अपील, एल नीनो का गंभीर असर
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार के कृषि सलाहकार एवं विधायक पी. सुदर्शन रेड्डी ने 11 अक्टूबर 2026 को किसानों से यासंगी (रबी) फसल की बुवाई न करने की अपील की, क्योंकि राज्य में एल नीनो के गंभीर प्रभाव और सूखे जैसी परिस्थितियाँ बन गई हैं। हैदराबाद से जारी इस अपील में उन्होंने चेताया कि पानी की कमी के बीच दूसरी फसल की खेती से संकट और गहरा हो सकता है।
जलाशयों और भूजल स्तर में गंभीर गिरावट
सुदर्शन रेड्डी के अनुसार, राज्य के प्रमुख जलाशयों, झीलों और तालाबों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इसके साथ ही भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। निजामाबाद जिले में सिंगूर परियोजना क्षेत्र का उपलब्ध पानी मुख्य रूप से पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।
निजामसागर और श्रीराम सागर परियोजनाओं में पानी की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इस कारण राज्य फिलहाल बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा पर निर्भर है। सिंगूर परियोजना में दिसंबर 2026 तक ही पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद जताई गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और समीक्षा
सुदर्शन रेड्डी ने बताया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सिंचाई के पानी और बिजली आपूर्ति जैसे अहम मुद्दों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। राज्यभर की परिस्थितियों पर विशेष नज़र रखी जा रही है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पीने के पानी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे और पानी की बर्बादी पर सख्ती से रोक लगाई जाए। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में खरीफ सीजन की फसल कटाई के बाद किसान यासंगी की तैयारियों में जुटते हैं।
ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता समितियाँ
कृषि सलाहकार ने सिंचाई, कृषि और बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ एमपीडीओ और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर गाँव में ग्राम पंचायतों के माध्यम से विशेष समितियाँ गठित करें। ये समितियाँ किसानों और स्थानीय जनता को पानी तथा बिजली बचाने के प्रति जागरूक करेंगी।
गौरतलब है कि तेलंगाना पहले भी एल नीनो के प्रभावों से जूझता रहा है, लेकिन इस बार जलाशयों में जलस्तर और भूजल स्तर दोनों में एक साथ गिरावट ने कृषि क्षेत्र के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।
आम जनता पर असर
पीने के पानी की कमी और बिजली की सीमित उपलब्धता के कारण शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के निवासी प्रभावित हो रहे हैं। किसानों और आम जनता से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में पानी बर्बाद न करें और उपलब्ध संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग सुनिश्चित करें।
सुदर्शन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि यदि पर्याप्त पानी उपलब्ध हुए बिना किसान दूसरी फसल की खेती शुरू करते हैं, तो एल नीनो की मौजूदा स्थिति से उपजा संकट और अधिक गंभीर हो सकता है, जिससे किसानों को ही सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।
आगे की राह
अधिकारियों को दिसंबर 2026 के बाद की जल-जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाते हुए बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रही है। आने वाले महीनों में जल संरक्षण और वैकल्पिक जल स्रोतों की खोज राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगी।