12 अक्टूबर 2026
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तेलंगाना में सूखे जैसे हालात: किसानों से यासंगी फसल न बोने की अपील, एल नीनो का गंभीर असर

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तेलंगाना में सूखे जैसे हालात: किसानों से यासंगी फसल न बोने की अपील, एल नीनो का गंभीर असर

सारांश

तेलंगाना में एल नीनो की मार और गिरते जलाशय स्तरों के बीच सरकार ने किसानों से यासंगी फसल न बोने की अपील की है। सिंगूर परियोजना में दिसंबर 2026 तक ही पानी बचा है, बिजली उत्पादन प्रभावित है और राज्य सौर ऊर्जा पर टिका है — यह संकट कृषि और पेयजल दोनों मोर्चों पर गहरा होता दिख रहा है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के कृषि सलाहकार एवं विधायक पी.
सुदर्शन रेड्डी ने 11 अक्टूबर 2026 को किसानों से यासंगी (रबी) फसल न बोने की अपील की।
राज्य के प्रमुख जलाशयों, झीलों और तालाबों में जलस्तर के साथ-साथ भूजल स्तर में भी गंभीर गिरावट दर्ज की गई है।
सिंगूर परियोजना में दिसंबर 2026 तक ही पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद; पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।
निजामसागर और श्रीराम सागर परियोजनाओं में बिजली उत्पादन प्रभावित; राज्य सौर ऊर्जा पर निर्भर।
हर गाँव में ग्राम पंचायतों के माध्यम से जल-बिजली बचाने के लिए विशेष जागरूकता समितियाँ गठित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और वरिष्ठ अधिकारी सिंचाई व बिजली आपूर्ति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।

तेलंगाना सरकार के कृषि सलाहकार एवं विधायक पी. सुदर्शन रेड्डी ने 11 अक्टूबर 2026 को किसानों से यासंगी (रबी) फसल की बुवाई न करने की अपील की, क्योंकि राज्य में एल नीनो के गंभीर प्रभाव और सूखे जैसी परिस्थितियाँ बन गई हैं। हैदराबाद से जारी इस अपील में उन्होंने चेताया कि पानी की कमी के बीच दूसरी फसल की खेती से संकट और गहरा हो सकता है।

जलाशयों और भूजल स्तर में गंभीर गिरावट

सुदर्शन रेड्डी के अनुसार, राज्य के प्रमुख जलाशयों, झीलों और तालाबों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इसके साथ ही भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। निजामाबाद जिले में सिंगूर परियोजना क्षेत्र का उपलब्ध पानी मुख्य रूप से पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।

निजामसागर और श्रीराम सागर परियोजनाओं में पानी की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इस कारण राज्य फिलहाल बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा पर निर्भर है। सिंगूर परियोजना में दिसंबर 2026 तक ही पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद जताई गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया और समीक्षा

सुदर्शन रेड्डी ने बताया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सिंचाई के पानी और बिजली आपूर्ति जैसे अहम मुद्दों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। राज्यभर की परिस्थितियों पर विशेष नज़र रखी जा रही है।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पीने के पानी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे और पानी की बर्बादी पर सख्ती से रोक लगाई जाए। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में खरीफ सीजन की फसल कटाई के बाद किसान यासंगी की तैयारियों में जुटते हैं।

ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता समितियाँ

कृषि सलाहकार ने सिंचाई, कृषि और बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ एमपीडीओ और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर गाँव में ग्राम पंचायतों के माध्यम से विशेष समितियाँ गठित करें। ये समितियाँ किसानों और स्थानीय जनता को पानी तथा बिजली बचाने के प्रति जागरूक करेंगी।

गौरतलब है कि तेलंगाना पहले भी एल नीनो के प्रभावों से जूझता रहा है, लेकिन इस बार जलाशयों में जलस्तर और भूजल स्तर दोनों में एक साथ गिरावट ने कृषि क्षेत्र के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।

आम जनता पर असर

पीने के पानी की कमी और बिजली की सीमित उपलब्धता के कारण शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के निवासी प्रभावित हो रहे हैं। किसानों और आम जनता से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में पानी बर्बाद न करें और उपलब्ध संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग सुनिश्चित करें।

सुदर्शन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि यदि पर्याप्त पानी उपलब्ध हुए बिना किसान दूसरी फसल की खेती शुरू करते हैं, तो एल नीनो की मौजूदा स्थिति से उपजा संकट और अधिक गंभीर हो सकता है, जिससे किसानों को ही सबसे ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।

आगे की राह

अधिकारियों को दिसंबर 2026 के बाद की जल-जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाते हुए बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रही है। आने वाले महीनों में जल संरक्षण और वैकल्पिक जल स्रोतों की खोज राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं — असली सवाल यह है कि जिन किसानों की आजीविका यासंगी फसल पर टिकी है, उन्हें क्या वैकल्पिक राहत मिलेगी। एल नीनो की चेतावनियाँ महीनों पहले से मौजूद थीं, फिर भी जलाशय प्रबंधन और वैकल्पिक सिंचाई की तैयारी में देरी के सवाल उठते हैं। सिंगूर परियोजना में दिसंबर 2026 तक पानी की सीमा यह बताती है कि संकट अभी और गहराएगा। बिना मुआवजे और वैकल्पिक रोज़गार के ढाँचे के, यह अपील किसानों पर एकतरफा बोझ डालने जैसी लग सकती है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना सरकार ने किसानों से यासंगी फसल न बोने की अपील क्यों की?
एल नीनो के गंभीर प्रभाव और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण राज्य के जलाशयों और भूजल स्तर में तेज़ गिरावट आई है, जिससे पेयजल और बिजली आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है। पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने की स्थिति में यासंगी (रबी) फसल की खेती से किसानों को नुकसान और संकट और गहरा होने की आशंका है।
यासंगी फसल क्या होती है?
यासंगी तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में रबी सीजन की फसल को कहा जाता है, जो आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है और फरवरी-मार्च में काटी जाती है। इसमें धान, मक्का, दालें और सब्जियाँ प्रमुख रूप से शामिल होती हैं।
तेलंगाना में जल संकट की मौजूदा स्थिति कितनी गंभीर है?
सिंगूर परियोजना में दिसंबर 2026 तक ही पानी उपलब्ध रहने की उम्मीद है। निजामसागर और श्रीराम सागर परियोजनाओं में पानी की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है और राज्य बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा पर निर्भर हो गया है।
जल संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और वरिष्ठ अधिकारी सिंचाई व बिजली आपूर्ति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। हर गाँव में ग्राम पंचायतों के माध्यम से विशेष जागरूकता समितियाँ गठित की जाएंगी, और पीने के पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों और आम नागरिकों से क्या अपेक्षाएँ हैं?
कृषि सलाहकार पी. सुदर्शन रेड्डी ने किसानों और आम जनता से पानी और बिजली का सावधानीपूर्वक उपयोग करने तथा सरकार के साथ सहयोग करने की अपील की है। किसी भी परिस्थिति में पानी बर्बाद न करने और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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