19 जुलाई 2026
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एल नीनो से तेलंगाना के किसान संकट में, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने माँगा फसल विविधीकरण और जल प्रबंधन पर ठोस एक्शन

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एल नीनो से तेलंगाना के किसान संकट में, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने माँगा फसल विविधीकरण और जल प्रबंधन पर ठोस एक्शन

सारांश

एल नीनो के असर से तेलंगाना के किसान सिंचाई जल की कमी और फसल चुनाव की दुविधा में फँसे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने राज्य सरकार से समिति-निर्माण से आगे बढ़कर नागार्जुन सागर जैसे जल स्रोतों के बेहतर उपयोग और फसल विविधीकरण पर ठोस कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य बातें

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन.
रामचंद्र राव ने 19 जुलाई को एल नीनो प्रभाव से किसानों की बढ़ती परेशानियों पर राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की माँग की।
सिंचाई जल की कमी के कारण धान और कपास की खेती पर निर्भर किसानों को फसल चुनाव में कठिनाई हो रही है।
राव ने उत्तर तेलंगाना के जलाशयों और दक्षिण तेलंगाना में नागार्जुन सागर बाँध के बेहतर उपयोग का सुझाव दिया।
भाजपा नेता ने फसल विविधीकरण और कम जल-आवश्यकता वाली फसलों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की माँग की।
सरकार से केवल समिति गठन तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया गया।

तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने 19 जुलाई को हैदराबाद में एल नीनो के बढ़ते प्रभाव को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा और माँग की कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए केवल समिति गठन तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जाएँ। उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव और सिंचाई जल की कमी के कारण किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं और यह तय कर पाना उनके लिए मुश्किल हो गया है कि किस फसल की बुआई करें।

एल नीनो का किसानों पर असर

राव के अनुसार, एल नीनो के प्रभाव ने तेलंगाना के किसानों की स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सिंचाई जल की उपलब्धता में कमी आने से किसान चिंतित हैं और खरीफ सीजन में सही फसल चुनाव को लेकर असमंजस में हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट केवल एक मौसम की समस्या नहीं, बल्कि बदलती जलवायु के दीर्घकालिक प्रभाव का संकेत है।

उत्तर और दक्षिण तेलंगाना पर समान ध्यान देने की माँग

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने उत्तर तेलंगाना के उन क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया जहाँ कुछ जलाशय और वैकल्पिक जल स्रोत मौजूद हैं। उनका सुझाव था कि सरकार इन संसाधनों का बेहतर उपयोग कर किसानों को सिंचाई राहत दे सकती है। साथ ही उन्होंने दक्षिण तेलंगाना का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ नागार्जुन सागर बाँध जैसे बड़े जल स्रोत उपलब्ध हैं। उनकी माँग थी कि सरकार उत्तर और दक्षिण दोनों क्षेत्रों के किसानों को समान प्राथमिकता दे, ताकि जल संकट का बोझ किसी एक क्षेत्र पर न पड़े।

फसल विविधीकरण पर जोर

राव ने कहा कि तेलंगाना में धान और कपास दो प्रमुख फसलें हैं और किसान लंबे समय से इन पर अत्यधिक निर्भर रहे हैं। एल नीनो जैसे मौसमी बदलावों के कारण इन फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।

सरकार से ठोस कार्ययोजना की माँग

भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार समिति गठित करती है, तो उसे नए जल स्रोतों की पहचान और कम जल-आवश्यकता वाली फसलों के बारे में किसानों को प्रशिक्षण देने के ठोस सुझाव भी देने चाहिए। उनका कहना था कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने से किसानों को मौसम की मार से बचाने में दीर्घकालिक मदद मिल सकती है। राज्य सरकार की ओर से इस माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या तेलंगाना सरकार के पास एल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं से निपटने की दीर्घकालिक नीतिगत रूपरेखा है। नागार्जुन सागर जैसे बाँधों की जल-वितरण क्षमता पर वर्षों से विवाद रहा है और उत्तर-दक्षिण क्षेत्रीय असमानता कोई नई समस्या नहीं है। फसल विविधीकरण का सुझाव सही दिशा में है, परंतु बिना किसान-अनुकूल बाज़ार व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के, वैकल्पिक फसलों की ओर जाना किसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता है — यह पहलू इस बहस में अभी तक अनुपस्थित है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में एल नीनो का किसानों पर क्या असर पड़ रहा है?
एल नीनो के कारण तेलंगाना में सिंचाई जल की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे धान और कपास की खेती पर निर्भर किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के लिए यह तय करना भी मुश्किल हो रहा है कि बदलते मौसम में कौन-सी फसल उगाएँ।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
रामचंद्र राव ने तेलंगाना सरकार से माँग की है कि वह केवल समिति गठन तक सीमित न रहे, बल्कि उत्तर और दक्षिण तेलंगाना में उपलब्ध जलाशयों व नागार्जुन सागर बाँध जैसे स्रोतों का बेहतर उपयोग करे। साथ ही किसानों को फसल विविधीकरण और कम जल-आवश्यकता वाली फसलों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाए।
फसल विविधीकरण से तेलंगाना के किसानों को कैसे फायदा होगा?
फसल विविधीकरण से किसान धान और कपास जैसी अधिक जल-निर्भर फसलों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं और ऐसी फसलें उगा सकते हैं जो कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं। इससे एल नीनो जैसे मौसमी संकटों में नुकसान का जोखिम घटाया जा सकता है।
उत्तर और दक्षिण तेलंगाना में जल संसाधन की स्थिति क्या है?
उत्तर तेलंगाना में कुछ जलाशय और वैकल्पिक जल स्रोत मौजूद हैं, जबकि दक्षिण तेलंगाना में नागार्जुन सागर बाँध जैसे बड़े जल स्रोत उपलब्ध हैं। भाजपा नेता राव के अनुसार, इन संसाधनों का समुचित और समान वितरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
तेलंगाना सरकार ने इस माँग पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
19 जुलाई तक राज्य सरकार की ओर से रामचंद्र राव की माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा नेता ने सरकार पर दबाव बनाए रखते हुए ज़मीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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