4 अक्टूबर 2026
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तेलंगाना सूखा: के. कविता ने PM मोदी से लगाई गुहार, 60 लाख किसानों के लिए मुफ्त बिजली की माँग

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तेलंगाना सूखा: के. कविता ने PM मोदी से लगाई गुहार, 60 लाख किसानों के लिए मुफ्त बिजली की माँग

सारांश

टीआरएस प्रमुख के. कविता ने 'सुपर अल नीनो' से उत्पन्न तेलंगाना के सूखे संकट पर PM मोदी से सीधी गुहार लगाई — 60 लाख किसानों के लिए मुफ्त बिजली की माँग की और राज्य सरकार पर सूखा घोषणा न करके केंद्रीय मदद का रास्ता बंद करने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

कविता ने 4 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर PM नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
'सुपर अल नीनो' के कारण उत्पन्न सूखे से तेलंगाना के करीब 60 लाख किसान प्रभावित बताए गए हैं।
कविता ने केंद्र से 24 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की माँग की, इसे 'जिंदगी और मौत का सवाल' बताया।
तेलंगाना सरकार पर आरोप — महाराष्ट्र और कर्नाटक के विपरीत, राज्य ने अब तक आधिकारिक सूखा घोषणा नहीं की, जिससे केंद्रीय सहायता बाधित है।
मुख्यमंत्री के 'वरुण यज्ञ' पर कटाक्ष करते हुए कविता ने कहा — 'हमारे मुख्यमंत्री ने हार मान ली है।' कविता ने परीक्षा पेपर लीक और चुनाव प्रणाली में व्यापक संरचनात्मक सुधार की भी माँग की।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की प्रमुख के. कविता ने 4 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तेलंगाना में गहराते सूखे संकट पर तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप की माँग की। हैदराबाद स्थित टीआरएस पार्टी मुख्यालय, बंजारा हिल्स में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि 'सुपर अल नीनो' के कारण उत्पन्न हुई असाधारण सूखे की स्थिति से राज्य के करीब 60 लाख किसान प्रभावित हैं और उनके जीवन-यापन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य माँग: मुफ्त बिजली और केंद्रीय राहत

कविता ने प्रधानमंत्री से विशेष रूप से अपील की कि जहाँ भी अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हो, वह तेलंगाना को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा, 'केवल 24 घंटे की मुफ्त बिजली किसानों को बचा सकती है। यह जिंदगी और मौत का सवाल है।' टीआरएस नेता ने चेतावनी दी कि यदि संकट की इस घड़ी में किसानों को सहायता नहीं मिली, तो तेलंगाना के लोग केंद्र सरकार को माफ नहीं करेंगे।

राज्य सरकार पर निशाना

कविता ने तेलंगाना की राज्य सरकार पर सूखे की स्थिति से निपटने में पूर्ण विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे पड़ोसी राज्यों ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों की आधिकारिक घोषणा की है, जिससे केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता का मार्ग प्रशस्त होता है, लेकिन तेलंगाना सरकार ने अब तक यह आवश्यक कदम नहीं उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के गठन के बाद से केंद्र से तेलंगाना को कोई अतिरिक्त सहायता नहीं मिली है।

मुख्यमंत्री द्वारा वर्षा के लिए आयोजित 'वरुण यज्ञ' पर कटाक्ष करते हुए कविता ने कहा, 'हमारे मुख्यमंत्री ने हार मान ली है। वह खुद वरुण यज्ञ कर रहे हैं। उन्हें अपनी पूजा जारी रखने दें। मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करती हूँ कि कृपया हमारी मदद करें।'

दक्षिणी राज्यों की स्थिति

कविता ने प्रधानमंत्री से दक्षिणी राज्यों — विशेष रूप से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र — पर विशेष ध्यान देने की माँग की। उन्होंने कहा, 'कुछ राज्यों में भारी बारिश हो रही है, जबकि कुछ राज्यों में जरूरत से ज्यादा बारिश हुई है। मैं केंद्र सरकार से अनुरोध करती हूँ कि दक्षिणी राज्यों पर ध्यान दें।' उन्होंने जलवायु परिवर्तन को इस असंतुलन की मूल वजह बताते हुए कहा कि इसका असर दुनियाभर में लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है।

परीक्षा पेपर लीक और चुनाव प्रणाली पर भी बोलीं

कविता ने देशभर में युवाओं के प्रदर्शनों और लगातार सामने आ रहे परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि महज किसी एक अधिकारी या मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा — बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव और जवाबदेही तय करना ज़रूरी है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की माँग पर उन्होंने कहा, 'अगर आप सीईसी का इस्तीफा चाहते हैं और वह इस्तीफा दे भी देते हैं, तो इससे क्या फायदा होगा? पूरी व्यवस्था को बदलना होगा।' उन्होंने यह भी सुझाया कि उनके विचार में पेपर बैलेट चुनाव प्रक्रिया के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई राज्य मानसून की अनिश्चितता और 'सुपर अल नीनो' प्रभाव से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि केंद्र से सूखा राहत प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक सूखा घोषणा एक अनिवार्य प्रक्रियागत कदम है। यदि तेलंगाना सरकार यह घोषणा करती है, तो राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से सहायता का रास्ता खुल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इसी घोषणा के बिना NDRF सहायता का रास्ता बंद रहता है। विडंबना यह है कि केंद्रीय सहायता माँगने वाली नेता खुद विपक्ष में हैं और वह निर्णय नहीं ले सकतीं; असली जवाबदेही राज्य की सत्तारूढ़ सरकार की है। सूखे की राजनीति और किसानों की वास्तविक तकलीफ — इन दोनों को अलग-अलग देखना ज़रूरी है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में सूखे की मौजूदा स्थिति क्या है?
'सुपर अल नीनो' के प्रभाव के कारण तेलंगाना में गंभीर सूखे की स्थिति बनी हुई है, जिससे राज्य के करीब 60 लाख किसान प्रभावित बताए जा रहे हैं। यह स्थिति फसलों और किसानों की आजीविका दोनों के लिए संकटकारी बन गई है।
के. कविता ने PM मोदी से क्या माँग की है?
टीआरएस प्रमुख के. कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तेलंगाना के 60 लाख किसानों के लिए तत्काल केंद्रीय हस्तक्षेप और कम से कम 24 घंटे की मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने दक्षिणी राज्यों — विशेषकर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र — पर विशेष ध्यान देने की भी माँग की।
तेलंगाना सरकार ने अभी तक सूखा घोषणा क्यों नहीं की?
कविता के अनुसार, महाराष्ट्र और कर्नाटक ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों की आधिकारिक घोषणा कर दी है जिससे केंद्रीय सहायता का मार्ग खुलता है, लेकिन तेलंगाना सरकार ने अब तक यह कदम नहीं उठाया। राज्य सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
कविता ने परीक्षा पेपर लीक पर क्या कहा?
कविता का कहना है कि किसी एक मंत्री या अधिकारी के इस्तीफे से पेपर लीक की समस्या हल नहीं होगी — पूरी परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव और जवाबदेही तय करना ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परीक्षा कराने वाली एजेंसी और व्यवस्था नहीं बदलती, तो इस्तीफे का कोई ठोस लाभ नहीं है।
तेलंगाना को केंद्रीय सूखा राहत कैसे मिल सकती है?
केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को पहले आधिकारिक सूखा घोषणा करनी होती है। इसके बाद केंद्रीय दल राज्य का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करता है, जिसके आधार पर राहत राशि जारी की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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