16 अक्टूबर 2026
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तेलंगाना में अल नीनो संकट: CM रेवंत रेड्डी की चेतावनी, जलाशयों में 72% कम पानी

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तेलंगाना में अल नीनो संकट: CM रेवंत रेड्डी की चेतावनी, जलाशयों में 72% कम पानी

सारांश

तेलंगाना में अल नीनो की मार: जलाशयों में सामान्य से 262 टीएमसी कम पानी, बिजली की माँग 5,000 मेगावाट अतिरिक्त, और 10 लाख एकड़ फसल खतरे में। CM रेवंत रेड्डी ने इसे 'अभूतपूर्व संकट' करार दिया और किसानों से रबी बुवाई टालने की अपील की।

मुख्य बातें

CM रेवंत रेड्डी ने 15 अक्टूबर 2026 को चेताया कि अल नीनो के कारण तेलंगाना गंभीर जल-ऊर्जा संकट की ओर है।
जलाशयों में सामान्य 462 टीएमसी के मुकाबले केवल 200 टीएमसी पानी; कृष्णा बेसिन में 72% कमी।
बिजली माँग सामान्य 15,000 मेगावाट से बढ़कर 20,003 मेगावाट ; 30 लाख कृषि पंप सेट जिम्मेदार।
वनकलाम (खरीफ) सीजन में 10 लाख एकड़ फसल को नुकसान की आशंका; किसानों से रबी बुवाई स्थगित करने की अपील।
24,000 गाँवों को पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता; पशुधन हानि की भी चेतावनी।
सरकार बाज़ार दर पर बिजली खरीद रही है; लगभग 20 दिनों में फसल कटाई का मौसम अपेक्षित।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 15 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि अल नीनो की अभूतपूर्व स्थिति के कारण राज्य गंभीर जल और ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रहा है — जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कहीं कम है और बिजली की माँग रिकॉर्ड ऊँचाई पर है। मंत्रियों के साथ आपात समीक्षा बैठक के बाद हैदराबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अगले 9-10 महीने राज्य के लिए बेहद कठिन साबित होंगे।

जलाशयों की स्थिति: अभूतपूर्व गिरावट

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बताया कि सामान्य वर्षों में इस समय तक राज्य के जलाशयों में कुल 462 टीएमसी जल संग्रहण होता है, लेकिन इस वर्ष केवल 200 टीएमसी पानी उपलब्ध है। कृष्णा बेसिन के जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में 72 प्रतिशत कम पानी है, जबकि गोदावरी बेसिन में भी 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में मानसून के दौरान सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई, जो इस संकट की जड़ है।

पेयजल और किसानों पर असर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी जलाशय में पेयजल और सिंचाई दोनों आवश्यकताएँ एकसाथ पूरी करने लायक पानी नहीं बचा है। उन्होंने राज्य के 24,000 गाँवों को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए किसानों से आग्रह किया कि वे रबी (यासांगी) फसल की बुवाई फिलहाल स्थगित करें। उन्होंने चेताया कि इसके बावजूद वनकलाम (खरीफ) सीजन के दौरान 10 लाख एकड़ में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका है।

बिजली संकट: माँग 20,003 मेगावाट पर

जल संकट के साथ-साथ ऊर्जा का दबाव भी राज्य सरकार के सामने गंभीर चुनौती बन गया है। अक्टूबर माह में बिजली की सामान्य माँग लगभग 15,000 मेगावाट रहती है, लेकिन इस बार माँग बढ़कर 20,003 मेगावाट तक पहुँच गई है — यानी 5,000 मेगावाट की अतिरिक्त माँग। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके पीछे मुख्य कारण राज्य भर में कार्यरत लगभग 30 लाख कृषि पंप सेट हैं, जो बेमौसम सूखे के चलते अधिक घंटे चल रहे हैं। इसके अलावा, अक्टूबर में मार्च जैसा तापमान दर्ज होने से घरेलू बिजली खपत भी असामान्य रूप से बढ़ी है।

पशुधन और बिजली खरीद

रेवंत रेड्डी ने पशुओं के लिए पेयजल और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया और चेताया कि यदि समय रहते कदम न उठाए गए तो बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो सकती है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि सरकार मानसून की कटाई से पहले खड़ी फसलों को बचाने के लिए बाज़ार दरों पर बिजली खरीद रही है। अनुमान है कि लगभग 20 दिनों में फसल कटाई का मौसम शुरू हो जाएगा।

जल संरक्षण की अपील

यह ऐसे समय में आया है जब समूचे दक्षिण भारत में अल नीनो के प्रभाव से जल स्तर में गिरावट की खबरें आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों, किसानों और उद्योगों से जल एवं बिजली का न्यूनतम उपयोग करने की अपील की। गौरतलब है कि तेलंगाना पहले भी 2018 में जल संकट से गुजर चुका है, लेकिन मौजूदा स्तर उससे भी अधिक गंभीर बताया जा रहा है। आने वाले हफ्तों में राज्य सरकार द्वारा जल वितरण की प्राथमिकताएँ तय करने और राहत उपायों की घोषणा की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ जलाशय प्रबंधन और फसल विविधीकरण नीतियाँ अभी भी औसत वर्षा पर निर्भर हैं। जब 462 टीएमसी की जगह केवल 200 टीएमसी उपलब्ध हो, तो यह सवाल उठता है कि क्या राज्य की दीर्घकालिक जल नीति में अल नीनो जैसे चरम मौसम परिदृश्यों को पहले ही शामिल किया जाना चाहिए था। 30 लाख कृषि पंप सेटों की बेलगाम बिजली खपत और रबी बुवाई पर निर्भर किसानों की आजीविका के बीच फँसी सरकार के पास अभी ठोस दीर्घकालिक समाधान नहीं दिख रहा — केवल आपात प्रबंधन है। असली परीक्षा अगले 9-10 महीनों में होगी।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में अल नीनो के कारण क्या संकट आया है?
अल नीनो की स्थिति के कारण तेलंगाना के जलाशयों में सामान्य स्तर से काफी कम पानी बचा है और बिजली की माँग रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गई है। CM रेवंत रेड्डी के अनुसार राज्य में 23% कम मानसून वर्षा हुई और जलाशयों में केवल 200 टीएमसी पानी है, जबकि सामान्यतः इस समय 462 टीएमसी होता है।
तेलंगाना में किसानों को रबी बुवाई क्यों रोकने को कहा गया है?
CM रेवंत रेड्डी ने किसानों से रबी (यासांगी) फसल की बुवाई स्थगित करने का आग्रह इसलिए किया है क्योंकि राज्य के 24,000 गाँवों को पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। जलाशयों में पानी की भारी कमी के चलते सिंचाई और पेयजल दोनों एकसाथ पूरा करना संभव नहीं है।
तेलंगाना में बिजली की माँग इतनी क्यों बढ़ गई है?
अक्टूबर में सामान्यतः 15,000 मेगावाट की बिजली माँग होती है, जो इस बार बढ़कर 20,003 मेगावाट हो गई है। इसकी मुख्य वजह राज्य भर में कार्यरत लगभग 30 लाख कृषि पंप सेट और अक्टूबर में मार्च जैसे असामान्य तापमान के कारण घरेलू खपत में वृद्धि है।
तेलंगाना के कृष्णा बेसिन में पानी की स्थिति कितनी खराब है?
कृष्णा बेसिन के जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में 72 प्रतिशत कम पानी है, जबकि गोदावरी बेसिन में भी 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह स्थिति CM रेवंत रेड्डी के अनुसार राज्य के लिए 'अभूतपूर्व संकट' है।
तेलंगाना सरकार संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार खड़ी फसलों को बचाने के लिए बाज़ार दरों पर बिजली खरीद रही है और माँग की जा रही है कि जल का उपयोग पेयजल के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में हो। इसके साथ ही पशुधन के लिए पेयजल और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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