तेलंगाना में अल नीनो संकट: CM रेवंत रेड्डी की चेतावनी, जलाशयों में 72% कम पानी
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 15 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि अल नीनो की अभूतपूर्व स्थिति के कारण राज्य गंभीर जल और ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रहा है — जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कहीं कम है और बिजली की माँग रिकॉर्ड ऊँचाई पर है। मंत्रियों के साथ आपात समीक्षा बैठक के बाद हैदराबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अगले 9-10 महीने राज्य के लिए बेहद कठिन साबित होंगे।
जलाशयों की स्थिति: अभूतपूर्व गिरावट
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बताया कि सामान्य वर्षों में इस समय तक राज्य के जलाशयों में कुल 462 टीएमसी जल संग्रहण होता है, लेकिन इस वर्ष केवल 200 टीएमसी पानी उपलब्ध है। कृष्णा बेसिन के जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में 72 प्रतिशत कम पानी है, जबकि गोदावरी बेसिन में भी 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में मानसून के दौरान सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई, जो इस संकट की जड़ है।
पेयजल और किसानों पर असर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी जलाशय में पेयजल और सिंचाई दोनों आवश्यकताएँ एकसाथ पूरी करने लायक पानी नहीं बचा है। उन्होंने राज्य के 24,000 गाँवों को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए किसानों से आग्रह किया कि वे रबी (यासांगी) फसल की बुवाई फिलहाल स्थगित करें। उन्होंने चेताया कि इसके बावजूद वनकलाम (खरीफ) सीजन के दौरान 10 लाख एकड़ में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका है।
बिजली संकट: माँग 20,003 मेगावाट पर
जल संकट के साथ-साथ ऊर्जा का दबाव भी राज्य सरकार के सामने गंभीर चुनौती बन गया है। अक्टूबर माह में बिजली की सामान्य माँग लगभग 15,000 मेगावाट रहती है, लेकिन इस बार माँग बढ़कर 20,003 मेगावाट तक पहुँच गई है — यानी 5,000 मेगावाट की अतिरिक्त माँग। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके पीछे मुख्य कारण राज्य भर में कार्यरत लगभग 30 लाख कृषि पंप सेट हैं, जो बेमौसम सूखे के चलते अधिक घंटे चल रहे हैं। इसके अलावा, अक्टूबर में मार्च जैसा तापमान दर्ज होने से घरेलू बिजली खपत भी असामान्य रूप से बढ़ी है।
पशुधन और बिजली खरीद
रेवंत रेड्डी ने पशुओं के लिए पेयजल और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया और चेताया कि यदि समय रहते कदम न उठाए गए तो बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो सकती है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि सरकार मानसून की कटाई से पहले खड़ी फसलों को बचाने के लिए बाज़ार दरों पर बिजली खरीद रही है। अनुमान है कि लगभग 20 दिनों में फसल कटाई का मौसम शुरू हो जाएगा।
जल संरक्षण की अपील
यह ऐसे समय में आया है जब समूचे दक्षिण भारत में अल नीनो के प्रभाव से जल स्तर में गिरावट की खबरें आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों, किसानों और उद्योगों से जल एवं बिजली का न्यूनतम उपयोग करने की अपील की। गौरतलब है कि तेलंगाना पहले भी 2018 में जल संकट से गुजर चुका है, लेकिन मौजूदा स्तर उससे भी अधिक गंभीर बताया जा रहा है। आने वाले हफ्तों में राज्य सरकार द्वारा जल वितरण की प्राथमिकताएँ तय करने और राहत उपायों की घोषणा की उम्मीद है।