तेलंगाना जल संकट: BJP नेता मनमीत सिंह का रेवंत रेड्डी पर हमला, किसान सूखे से बेहाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता मनमीत सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य में गहराते जल संकट और किसानों की बदहाली के बावजूद कांग्रेस सरकार दिल्ली की राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि नलगोंडा सहित कई ज़िलों में पानी की भारी किल्लत है और किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।
मनमीत सिंह के मुख्य आरोप
मनमीत सिंह ने कहा, 'रेवंत रेड्डी, आप 0.6 मीट्रिक टन पानी स्थानांतरित कर रहे हैं। सरकार को पिछले आठ महीने से पता है कि तेलंगाना में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और यहाँ पानी की कमी है। किसान सूखे का सामना कर रहे हैं और उनकी फसलें पूरी तरह सूख चुकी हैं।' उन्होंने नलगोंडा समेत राज्य के कई अन्य ज़िलों में जल संकट का विशेष उल्लेख किया।
दिल्ली की राजनीति बनाम तेलंगाना की समस्याएँ
BJP नेता ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि रेवंत रेड्डी और कांग्रेस के अन्य नेता दिल्ली में रैलियों और विरोध प्रदर्शनों में व्यस्त रहते हैं, जबकि तेलंगाना की जनता पानी और सूखे की मार झेल रही है। मनमीत सिंह का सवाल था कि यदि नेतृत्व राजनीतिक गतिविधियों में ही व्यस्त रहेगा, तो राज्य की बुनियादी समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोप
मनमीत सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि 2023 में सरकार बनने के बाद से राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी कामकाज में 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशनखोरी की बातें सामने आती हैं। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (BRS) मिलकर राज्य में घोटालों को बढ़ावा दे रही हैं।
सर्वदलीय बैठक का फैसला
गौरतलब है कि तेलंगाना सरकार ने राज्य में कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव से उत्पन्न सूखे के खतरे पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह बैठक 28 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे IST, हैदराबाद स्थित तेलंगाना राज्य सचिवालय की छठी मंजिल पर आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क करेंगे।
आम जनता से अपील
BJP नेता ने तेलंगाना की जनता से आह्वान किया कि वह जागरूक होकर राजनीतिक दलों के कामकाज का निष्पक्ष मूल्यांकन करे। उन्होंने कहा कि जनता को यह तय करना होगा कि कौन-सी पार्टी वास्तव में उसके हितों के लिए काम कर रही है और कौन केवल राजनीतिक लाभ उठाने में जुटी है। 28 अक्टूबर की सर्वदलीय बैठक यह तय करेगी कि संकट से निपटने की राज्य सरकार की रणनीति कितनी ठोस है।