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तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मांगी सिंचाई परियोजनाओं की मंजूरी

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तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मांगी सिंचाई परियोजनाओं की मंजूरी

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी दिल्ली पहुँचे और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मिलकर राज्य की कई बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए मंजूरी माँगी — तुम्मिदिहेट्टी बैराज से लेकर PRLIS और सम्मक्का सागर तक। देरी के चलते निर्माण लागत बढ़ रही है और राज्य ₹4.15 करोड़ जमा कर चुका है।

मुख्य बातें

CM रेवंत रेड्डी ने मंगलवार शाम नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात की।
तुम्मिदिहेट्टी बैराज के निर्माण के लिए प्लस 152 मीटर FRL पर महाराष्ट्र से समझौते में तेजी लाने का अनुरोध किया गया।
PRLIS, DLIS, SSMP और गौरवल्ली जलाशय की पर्यावरण मंजूरी अटकी हुई है।
सम्मक्का सागर परियोजना की DPR CWC को सौंपी जा चुकी है; छत्तीसगढ़ से NOC के लिए बातचीत जारी है।
राज्य सरकार ने KRMB टेलीमेट्री सिस्टम के पहले चरण के लिए ₹4.15 करोड़ पहले ही जमा किए।
मंजूरी में देरी से परियोजनाओं की निर्माण लागत में लगातार वृद्धि हो रही है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार शाम नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर राज्य की कई अटकी हुई सिंचाई परियोजनाओं के लिए मंजूरी दिलाने का आग्रह किया। इस बैठक में राज्य के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी भी उनके साथ मौजूद थे।

तुम्मिदिहेट्टी बैराज: महाराष्ट्र से समझौते में तेजी की माँग

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने जल शक्ति मंत्री से अनुरोध किया कि वे महाराष्ट्र सरकार के साथ बातचीत कर तुम्मिदिहेट्टी बैराज के निर्माण प्रस्ताव से जुड़े मामले को सुलझाएं। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव पहले ही महाराष्ट्र सरकार को सौंपा जा चुका है और अब मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।

सीएम ने स्पष्ट किया कि प्लस 152 मीटर के फुल रिजर्वॉयर लेवल (FRL) पर बैराज के निर्माण से येल्लमपल्ली परियोजना तक ग्रेविटी के जरिए पानी पहुँचाना संभव होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे बिजली की खपत और पानी की सप्लाई, दोनों की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

पर्यावरण मंजूरी की समीक्षा: चार परियोजनाएं लंबित

बैठक में कृष्णा और गोदावरी बेसिन में तेलंगाना की परियोजनाओं के लिए अटकी हुई पर्यावरण मंजूरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से निम्नलिखित परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी देने की अपील की:

पलमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (PRLIS), डिंडी लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (DLIS), सीताराम सागर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SSMP) और गौरवल्ली जलाशय — इन सभी के लिए मंजूरी की प्रतीक्षा है।

रेवंत रेड्डी ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद पर्यावरण मंजूरी हेतु जारी नई गाइडलाइंस की ओर दिलाया। उन्होंने चेताया कि मंजूरी में हो रही देरी से निर्माण लागत लगातार बढ़ रही है।

सम्मक्का सागर परियोजना: CWC की मंजूरी का इंतजार

मुख्यमंत्री ने सम्मक्का सागर परियोजना के लिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) के पास लंबित मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही CWC को सौंपी जा चुकी है और सिंचाई योजना व अंतर-राज्यीय पहलुओं पर मंजूरी माँगी गई है।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) प्राप्त करने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार के साथ बातचीत जारी है।

टेलीमेट्री सिस्टम और KRMB का मुद्दा

बैठक में कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) द्वारा किए जाने वाले टेलीमेट्री सिस्टम के रुके हुए काम पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने सिस्टम स्थापना के पहले चरण के लिए आवश्यक ₹4.15 करोड़ पहले ही जमा करा दिए हैं।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री से पहले, दूसरे और तीसरे तीनों चरणों में टेलीमेट्री सिस्टम लगाने का काम तेज गति से पूरा कराने का आग्रह किया।

बैठक में कौन-कौन था मौजूद

इस अहम बैठक में राज्य मंत्री जी. विवेक वेंकटस्वामी, सांसद गड्डम वामसी कृष्णा, विधायक गड्डम विनोद, राज्य सरकार के सिंचाई सलाहकार आदित्यनाथ दास और मुख्यमंत्री के सचिव माणिकराज भी उपस्थित थे।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब तेलंगाना की कई सिंचाई परियोजनाएं अंतर-राज्यीय जल विवाद और केंद्रीय मंजूरियों की प्रतीक्षा में वर्षों से लटकी हैं। आगे की कार्यवाही इस पर निर्भर करेगी कि केंद्र इन अनुरोधों पर कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस बीच निर्माण लागत बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा राजनीतिक दबाव की एक कड़ी है, लेकिन असली सवाल यह है कि केंद्र इन अनुरोधों को कितनी प्राथमिकता देता है, खासकर तब जब महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की सहमति भी जरूरी है। कृष्णा और गोदावरी बेसिन में जल बँटवारे की राजनीति लंबे समय से दक्षिण भारत की अंतर-राज्यीय राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा रही है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुम्मिदिहेट्टी बैराज का मामला क्या है?
तुम्मिदिहेट्टी बैराज तेलंगाना की एक प्रमुख जल परियोजना है, जिसके निर्माण के लिए महाराष्ट्र की सहमति और केंद्र की मंजूरी दरकार है। 152 मीटर FRL पर बैराज बनने से येल्लमपल्ली परियोजना तक ग्रेविटी से पानी पहुँचाया जा सकेगा, जिससे बिजली और सप्लाई लागत कम होगी।
CM रेवंत रेड्डी ने किन-किन परियोजनाओं की पर्यावरण मंजूरी माँगी?
मुख्यमंत्री ने पलमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (PRLIS), डिंडी लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (DLIS), सीताराम सागर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SSMP) और गौरवल्ली जलाशय के लिए पर्यावरण मंजूरी देने की अपील की। ये सभी परियोजनाएं कृष्णा और गोदावरी बेसिन से जुड़ी हैं।
सम्मक्का सागर परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
सम्मक्का सागर परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) केंद्रीय जल आयोग (CWC) को सौंपी जा चुकी है और मंजूरी का इंतजार है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार से NOC प्राप्त करने के लिए बातचीत जारी है।
KRMB टेलीमेट्री सिस्टम के लिए तेलंगाना ने क्या कदम उठाए हैं?
तेलंगाना सरकार ने कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) के टेलीमेट्री सिस्टम के पहले चरण के लिए ₹4.15 करोड़ पहले ही जमा करा दिए हैं। CM ने केंद्र से तीनों चरणों में काम तेज गति से पूरा कराने का आग्रह किया।
मंजूरी में देरी से क्या नुकसान हो रहा है?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के अनुसार, पर्यावरण और केंद्रीय मंजूरियों में हो रही देरी के कारण इन सिंचाई परियोजनाओं की निर्माण लागत लगातार बढ़ रही है। इससे न केवल सार्वजनिक धन पर बोझ बढ़ता है, बल्कि राज्य के कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधाएं मिलने में भी विलंब होता है।
राष्ट्र प्रेस
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