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तुम्मिडीहट्टी बैराज: रेवंत रेड्डी सोमवार को मुंबई में फडणवीस से करेंगे मुलाकात, 152 मीटर FRL की माँग

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तुम्मिडीहट्टी बैराज: रेवंत रेड्डी सोमवार को मुंबई में फडणवीस से करेंगे मुलाकात, 152 मीटर FRL की माँग

सारांश

दशकों से अटकी तुम्मिडीहट्टी बैराज परियोजना एक निर्णायक मोड़ पर है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सोमवार को मुंबई में फडणवीस से मिलेंगे और 152 मीटर FRL की अनुमति माँगेंगे — जो आदिलाबाद के 2 लाख एकड़ खेतों और लाखों आदिवासी परिवारों की उम्मीदों से जुड़ी है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सोमवार, 27 अक्टूबर को सह्याद्री स्टेट गेस्ट हाउस, मुंबई में सुबह 11 बजे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे।
तेलंगाना प्राणहिता नदी पर 152 मीटर FRL पर तुम्मिडीहट्टी बैराज बनाने की अनुमति चाहता है; महाराष्ट्र पहले 148 मीटर पर सहमत था।
152 मीटर FRL पर महाराष्ट्र में लगभग 2,300 एकड़ भूमि जलमग्न हो सकती है; किसी गांव के डूबने की आशंका नहीं।
परियोजना का लक्ष्य आदिलाबाद जिले में 2 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई और उत्तरी तेलंगाना में पेयजल आपूर्ति।
प्रतिनिधिमंडल में सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल; केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा माँगे गए आंकड़े भी साझा किए जाएँगे।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सोमवार, 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे। इस बैठक का केंद्र होगा तुम्मिडीहट्टी बैराज परियोजना, जिस पर तेलंगाना 152 मीटर पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) पर निर्माण की अनुमति चाहता है। यह बैठक सह्याद्री स्टेट गेस्ट हाउस में सुबह 11 बजे IST निर्धारित है।

बैठक की तैयारी और प्रतिनिधिमंडल

तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार शाम महाराष्ट्र के लिए रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल में सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। 23 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में अधिकारियों के साथ हुई तैयारी बैठक में रेवंत रेड्डी ने निर्देश दिया था कि महाराष्ट्र को तकनीकी तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर राजी करने की रणनीति तैयार की जाए।

परियोजना की मुख्य माँग — 152 मीटर FRL

तेलंगाना सरकार प्राणहिता नदी — जो गोदावरी की सहायक नदी है — पर 152 मीटर की ऊँचाई पर तुम्मिडीहट्टी बैराज बनाने की अनुमति चाहती है। महाराष्ट्र पहले 148 मीटर FRL पर सहमत हुआ था, जबकि तेलंगाना का तर्क है कि इतनी कम ऊँचाई पर पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो सकती। सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री को बताया कि 152 मीटर FRL पर येल्लमपल्ली परियोजना तक अधिक मात्रा में पानी पहुँचाया जा सकेगा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्वयं इस मुद्दे पर बातचीत की इच्छा जताई थी, जिससे यह उम्मीद बनती है कि दोनों राज्यों के बीच व्यावहारिक सहमति की गुंजाइश है।

जलमग्न भूमि और महाराष्ट्र की चिंताएँ

अधिकारियों के अनुसार, 152 मीटर FRL पर बैराज निर्माण से महाराष्ट्र में लगभग 2,300 एकड़ भूमि जलमग्न हो सकती है। वहीं, यदि 150 मीटर FRL तय हो, तो जलमग्न क्षेत्र 1,000 एकड़ से कम रहने का अनुमान है। विशेष रूप से, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गांव के डूबने की आशंका नहीं है। तेलंगाना सरकार ने मुख्यमंत्री को निर्देश दिया है कि वे जलमग्न क्षेत्र का सटीक आकलन प्रस्तुत करें, ताकि महाराष्ट्र को अधिकतम संभव जल उपयोग की अनुमति देने के लिए मनाया जा सके।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

यह बैराज उत्तरी तेलंगाना और अविभाजित आदिलाबाद जिले के लिए दशकों पुरानी सिंचाई और पेयजल की समस्या का समाधान माना जा रहा है। रेवंत रेड्डी के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य आदिलाबाद जिले में 2 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करना है — यह जिला राज्य के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है, जहाँ बड़ी आबादी वन एवं आदिवासी क्षेत्रों में निवास करती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'जल, जंगल, जमीन' के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को भी इस परियोजना से लाभ मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय जल आयोग की भूमिका और आगे की राह

पिछले महीने नई दिल्ली में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने कुछ तकनीकी जानकारियाँ माँगी थीं। रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि CWC द्वारा माँगी गई सभी जानकारियाँ साझा की जाएँ। यह बैठक अंतर-राज्यीय जल विवादों के उस दीर्घकालिक ढाँचे में एक अहम पड़ाव है, जिसमें केंद्रीय हस्तक्षेप की भूमिका अक्सर निर्णायक रही है। सोमवार की बैठक के नतीजे तय करेंगे कि यह परियोजना आगे किस दिशा में बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब तक केंद्रीय तंत्र और दोनों राज्यों के बीच कानूनी रूप से बाध्यकारी सहमति नहीं बनती, ज़मीनी काम शुरू होने में और देरी संभव है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुम्मिडीहट्टी बैराज परियोजना क्या है?
तुम्मिडीहट्टी बैराज तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा पर गोदावरी की सहायक नदी प्राणहिता पर प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तरी तेलंगाना और अविभाजित आदिलाबाद जिले में 2 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
तेलंगाना 152 मीटर FRL क्यों चाहता है?
तेलंगाना सरकार का तर्क है कि 152 मीटर पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) पर ही प्राणहिता नदी से पर्याप्त जल भंडारण संभव होगा, जो येल्लमपल्ली परियोजना तक पानी पहुँचाने के लिए आवश्यक है। महाराष्ट्र द्वारा पहले सहमत 148 मीटर FRL पर तेलंगाना को अपेक्षित मात्रा में जल उपलब्ध नहीं हो पाएगा।
इस परियोजना से महाराष्ट्र को क्या आपत्ति है?
152 मीटर FRL पर बैराज निर्माण से महाराष्ट्र में लगभग 2,300 एकड़ भूमि जलमग्न होने का अनुमान है, जबकि 150 मीटर FRL पर यह क्षेत्र 1,000 एकड़ से कम रहेगा। हालाँकि, अधिकारियों के अनुसार किसी गांव के डूबने की आशंका नहीं है।
इस बैठक में केंद्रीय जल आयोग की क्या भूमिका है?
पिछले महीने नई दिल्ली में दोनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक के बाद केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने कुछ तकनीकी जानकारियाँ माँगी थीं। तेलंगाना सरकार सोमवार की बैठक में महाराष्ट्र को राजी करने के साथ-साथ CWC की माँगों के अनुरूप सभी आवश्यक आंकड़े भी साझा करेगी।
इस परियोजना से किन्हें सबसे अधिक फायदा होगा?
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ उत्तरी तेलंगाना और अविभाजित आदिलाबाद जिले के किसानों और आदिवासी समुदायों को मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा है कि 'जल, जंगल, जमीन' के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को भी इस बैराज से लाभ मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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