25 अक्टूबर 2026
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मनोज तिवारी का फारूक अब्दुल्ला पर पलटवार: 'भारत की एकता से कोई समझौता नहीं'

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मनोज तिवारी का फारूक अब्दुल्ला पर पलटवार: 'भारत की एकता से कोई समझौता नहीं'

सारांश

बारामूला में फारूक अब्दुल्ला के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कश्मीरियों की सुरक्षा का श्रेय पाकिस्तान को दिया, BJP सांसद मनोज तिवारी ने तीखा पलटवार किया है। यह विवाद जम्मू-कश्मीर में नई सरकार और केंद्र के बीच चल रहे प्रशासनिक तनाव की पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक रंग ले रहा है।

मुख्य बातें

BJP सांसद मनोज तिवारी ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में फारूक अब्दुल्ला के बयान पर कड़ा पलटवार किया।
अब्दुल्ला ने बारामूला में कथित तौर पर कहा था कि पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़ उठाने से 'कश्मीरी बचे हुए हैं।' तिवारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस , SP और TMC ने इस बयान के खिलाफ कोई 'स्पष्ट प्रतिक्रिया' नहीं दी।
तिवारी ने कहा कि किसी भी कार्रवाई की प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी ढाँचे के भीतर होगी।
कांग्रेस नेताओं ने भी अब्दुल्ला के बयान को गलत बताया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मनोज तिवारी ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। तिवारी ने कहा कि अब्दुल्ला 'समय-समय पर पाकिस्तान के प्रति नरम रुख दिखाते रहे हैं' और उनके विवादित बयान देश की जनता को भलीभाँति समझ आते हैं।

मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया

तिवारी ने आरोप लगाया कि देश में कुछ राजनीतिक दल और नेता 'प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।' उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करने वालों के विरुद्ध कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।

BJP सांसद ने दृढ़ता से कहा कि 'भारत की एकता एवं अखंडता के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जो भी कार्रवाई होगी, वह पूर्णतः 'संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत' की जाएगी।

फारूक अब्दुल्ला का मूल बयान

यह विवाद तब भड़का जब फारूक अब्दुल्ला ने बारामूला में एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कथित तौर पर कहा कि 'पाकिस्तान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों का मुद्दा उठाता है और इसी वजह से जम्मू-कश्मीर के लोग बचे हुए हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि 'कश्मीरियों के प्रति भारत के इरादे सही नहीं हैं।'

गौरतलब है कि अब्दुल्ला ने उसी संबोधन में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय से लंबित हैं तथा संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हुई है। उन्होंने जनता से अपील की थी कि 'दिल्ली से न्याय की ज़्यादा उम्मीद' न रखें और अपने हक के लिए खुद संघर्ष करें।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

उल्लेखनीय है कि अब्दुल्ला के इस बयान को कांग्रेस के नेताओं ने भी गलत बताया है — यह एक दुर्लभ स्थिति है जब BJP और कांग्रेस एक ही बिंदु पर सहमत दिखे। भाजपा ने हालाँकि कांग्रेस की 'मौन सहमति' पर भी निशाना साधा और कहा कि पार्टी ने समय पर और मज़बूत खंडन नहीं किया।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर टिप्पणी

इस अवसर पर मनोज तिवारी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को 'प्रभावहीन' बताते हुए दावा किया कि विपक्षी दल 'आपसी मतभेदों से ही जूझ रहे हैं।' तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में BJP का अभियान निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नई निर्वाचित सरकार और केंद्र के बीच प्रशासनिक अधिकारों को लेकर बहस पहले से चल रही है। फारूक अब्दुल्ला का यह ताज़ा बयान नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर और अधिक बहस की संभावना बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या केंद्र प्रशासनिक शिकायतों — जैसे लंबित फाइलें और संस्थागत स्वायत्तता — पर संवाद से जवाब देगा या केवल राजनीतिक जवाबी हमले से। कांग्रेस का अब्दुल्ला के बयान को गलत बताना दर्शाता है कि राष्ट्रवाद के इस मुद्दे पर विपक्ष भी आंतरिक दबाव में है। मुख्यधारा की कवरेज बयानबाज़ी पर अटकी है; असली खबर यह है कि निर्वाचित राज्य सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच प्रशासनिक टकराव की कहानी अभी सामने नहीं आई है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फारूक अब्दुल्ला ने बारामूला में क्या विवादित बयान दिया था?
फारूक अब्दुल्ला ने बारामूला में एक कार्यकर्ता सम्मेलन में कथित तौर पर कहा कि पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़ उठाने की वजह से जम्मू-कश्मीर के लोग 'बचे हुए हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कश्मीरियों के प्रति भारत के इरादे सही नहीं हैं और जनता को अपने हक के लिए खुद लड़ना होगा।
मनोज तिवारी ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर क्या कहा?
BJP सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि अब्दुल्ला 'समय-समय पर पाकिस्तान के प्रति नरम रुख' दिखाते रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की एकता एवं अखंडता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा और कार्रवाई संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगी।
क्या कांग्रेस ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान की आलोचना की?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस नेताओं ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान को गलत बताया है। यह उन दुर्लभ मौकों में से एक है जब BJP और कांग्रेस किसी मुद्दे पर एकजुट नज़र आए, हालाँकि BJP ने कांग्रेस पर भी समय पर मज़बूत खंडन न करने का आरोप लगाया।
इस विवाद का जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में नई निर्वाचित सरकार और केंद्र के बीच प्रशासनिक अधिकारों को लेकर पहले से तनाव है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और BJP के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ने की आशंका है तथा यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद में भी गूँज सकता है।
तिवारी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या टिप्पणी की?
मनोज तिवारी ने SP-कांग्रेस गठबंधन को 'प्रभावहीन' बताया और कहा कि विपक्षी दल आपसी मतभेदों से जूझ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में BJP का अभियान निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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