तेलंगाना सीआईडी ने 14 राइस मिलर गिरफ्तार किए, एफसीआई को घटिया चावल आपूर्ति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को निर्धारित किस्म का चावल आपूर्ति करने में कथित अनियमितताओं के मामले में 14 राइस मिलरों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 25 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में की गई, जब सीआईडी ने 24 अक्टूबर को नागरिक आपूर्ति निगम के महाप्रबंधक (खरीद) की शिकायत पर जांच शुरू की। आरोप है कि खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के दौरान इन मिलरों ने उच्च किस्म के धान की जगह सस्ता और घटिया चावल एफसीआई को थमाया।
मुख्य घटनाक्रम
तेलंगाना सरकार ने खरीफ 2025-26 के दौरान 71.86 लाख टन धान की खरीद की थी। इसके तहत एफसीआई को 59.60 लाख टन चावल आपूर्ति करने का लक्ष्य तय किया गया था। प्रारंभिक जांच के अनुसार, कुछ राइस मिलरों ने कथित तौर पर उन्हें आवंटित 'सन्ना रकम' यानी महीन किस्म के धान को खुले बाजार में बेच दिया और उसके बदले सस्ता 'डोड्डू रकम' यानी मोटे किस्म का चावल एफसीआई को आपूर्ति किया। आरोपों के अनुसार इस आपूर्ति में राज्य के बाहर से मंगाया गया चावल भी शामिल था।
निजामाबाद, करीमनगर और मुलुगु जिलों की 16 राइस मिलों ने कथित तौर पर 'सन्ना रकम' के आवंटन के बदले 3,385.820 टन 'डोड्डू रकम' की आपूर्ति की। इससे संबंधित बोनस से अनुमानित नुकसान करीब ₹1.69 करोड़ आंका गया है।
वित्तीय नुकसान का आकलन
सीआईडी के अनुसार, 45,414.833 टन धान को मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था। इससे संबंधित बोनस पर संभावित वित्तीय प्रभाव करीब ₹242 करोड़ आंका गया है। हालांकि, नागरिक आपूर्ति अधिकारियों के समय पर हस्तक्षेप और रोक संबंधी आदेश जारी किए जाने से संभावित अतिरिक्त नुकसान को फिलहाल टाल दिया गया।
प्रवर्तन एवं टास्क फोर्स (ईटीएफ) की टीमों के निरीक्षण और प्रयोगशाला जांच में कथित तौर पर पाया गया कि जांचे गए मामलों में आपूर्ति किए गए चावल के नमूने आवंटन में निर्धारित 'सन्ना रकम' किस्म के अनुरूप नहीं थे।
कानूनी कार्रवाई
सीआईडी के अनुसार, प्रथम दृष्टया इस कथित बदलाव से कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) समझौते का उल्लंघन, आपराधिक विश्वासघात, अनुचित लाभ हासिल करने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की साजिश जैसे गंभीर आरोप सामने आते हैं। इस मामले में तीन आपराधिक केस दर्ज किए गए हैं और 14 राइस मिलरों को हिरासत में लिया गया है।
जांच का दायरा
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धान को कथित तौर पर खुले बाजार में किस प्रकार मोड़ा गया और चावल की किस्म में बदलाव किस तरह किया गया। आवंटन और मिलिंग संबंधी अनुरोधों को संसाधित करने की प्रक्रिया, संबंधित मिलरों की भूमिका, दस्तावेजी व तकनीकी साक्ष्य और वास्तविक वित्तीय नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि इस मामले में किसी सरकारी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता थी या नहीं, और क्या इसके पीछे कोई संगठित आपराधिक साजिश थी। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी।