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यूपी मतदाता सूची गड़बड़ी: अफसरों की जवाबदेही तय होगी, कंप्यूटर सहायकों की फार्म फीडिंग पर रोक

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यूपी मतदाता सूची गड़बड़ी: अफसरों की जवाबदेही तय होगी, कंप्यूटर सहायकों की फार्म फीडिंग पर रोक

सारांश

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण में पीलीभीत जैसी गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निर्वाचन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है — कंप्यूटर सहायकों की फार्म फीडिंग बंद, अफसरों पर धारा 32 की तलवार, और बुलंदशहर-गाजियाबाद समेत चार जिलों को सीधी फटकार।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश निर्वाचन विभाग ने 24 अक्टूबर 2026 को वर्चुअल बैठक में मतदाता सूची अनियमितताओं पर सख्त निर्देश जारी किए।
कंप्यूटर सहायकों द्वारा फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 की फीडिंग पर रोक; अब केवल बीएलओ ऐप के माध्यम से डिजिटाइज़ेशन होगा।
गड़बड़ी पाए जाने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत ईआरओ, एईआरओ और कंप्यूटर सहायकों पर कार्रवाई होगी।
बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारियों को दोहरी प्रविष्टि शिकायतों पर समय से रिपोर्ट न देने पर फटकार।
'बुक ए कॉल विद बीएलओ' कॉल रिक्वेस्ट अब 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रह सकती।
10 अप्रैल 2026 के बाद से फीड किए गए सभी फार्मों की अनिवार्य जाँच का आदेश।

उत्तर प्रदेश के निर्वाचन विभाग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में बरती जा रही लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, लखनऊ की ओर से 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित वर्चुअल बैठक में स्पष्ट किया गया कि त्रुटियों की पुनरावृत्ति पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, कंप्यूटर सहायकों द्वारा मतदाता सूची संबंधी फार्मों की फीडिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश

मंडलायुक्तों को रोल प्रेक्षक के रूप में अपने-अपने मंडलों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की तैयारियों का सघन पर्यवेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। यदि किसी भी स्तर पर पर्यवेक्षण में शिथिलता पाई गई, तो जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाएगी। बैठक में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और कंप्यूटर सहायकों को भी शामिल किया गया था।

पीलीभीत जैसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने की चेतावनी

बैठक में विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि 10 अप्रैल 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समाप्ति के बाद से अब तक कंप्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 की अनिवार्य रूप से जाँच कराई जाए। अधिकारियों को पीलीभीत जैसे मामलों का संदर्भ देते हुए आगाह किया गया कि इस प्रकार की गड़बड़ियाँ भविष्य में स्वीकार्य नहीं होंगी। अब सभी भौतिक रूप से प्राप्त आवेदन फार्म केवल बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) द्वारा बीएलओ ऐप के माध्यम से ही डिजिटाइज़ किए जाएंगे।

दोहरी प्रविष्टियों पर चार जिलों को फटकार

बैठक के दौरान बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारियों पर सोशल मीडिया से प्राप्त दोहरी मतदाता प्रविष्टियों की शिकायतों पर समय से रिपोर्ट न भेजने को लेकर अप्रसन्नता जताई गई। इन अधिकारियों को तत्काल आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया से मिलने वाली मतदाता सूची संबंधी शिकायतों की जाँच में सामने आई त्रुटियों की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर डाली गई है।

ऑनलाइन सेवाएँ और बीएलओ की जवाबदेही

ईसीआईनेट ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध 'बुक ए कॉल विद बीएलओ' सुविधा के तहत कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए। बीएलओ द्वारा मतदाताओं से संपर्क किए बिना उन्हें 'अनअवेलेबल' दर्ज करने या समय पर कॉल का जवाब न देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, विशेष अभियान दिवसों में बीएलओ की अनुपस्थिति की शिकायतों की भी समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट माँगी गई है।

साइबर सुरक्षा और तकनीकी निर्देश

अधिकारियों को अपना ईआरओनेट लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की कड़ी हिदायत दी गई है। बीएसएनएल नेटवर्क बाधित होने की स्थिति में काम प्रभावित न हो, इसके लिए पोर्टल पर सीयूजी नंबर के स्थान पर निजी मोबाइल नंबर अपडेट करने और पासवर्ड नीति के तहत तत्काल पासवर्ड बदलने के भी निर्देश दिए गए। ईआरओ को फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 के सभी लंबित मामलों की प्रतिदिन समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया है। आगामी एसएसआर के दौरान प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियाँ न रहें, इसके लिए पहले से सभी जरूरी कदम उठाए जाने की अपेक्षा की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विकेंद्रित फीडिंग और अपर्याप्त निगरानी के चलते वर्षों से पनप रही है। कंप्यूटर सहायकों पर रोक और बीएलओ ऐप के माध्यम से डिजिटाइज़ेशन का निर्देश तकनीकी रूप से सही कदम है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि बीएलओ की अनुपस्थिति और 48 घंटे की कॉल रिक्वेस्ट लंबितता जैसी शिकायतें बताती हैं कि ज़मीनी तंत्र अभी भी कमज़ोर है। धारा 32 का हवाला देकर जवाबदेही तय करने की भाषा कड़ी है, लेकिन चुनाव से पहले की यह सख्ती तब तक अर्थपूर्ण नहीं होगी जब तक कम से कम एक-दो अधिकारियों पर वास्तविक कार्रवाई न हो।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण में क्या गड़बड़ियाँ सामने आई हैं?
पीलीभीत सहित कई जिलों में कंप्यूटर सहायकों द्वारा गलत तरीके से फार्म फीडिंग और दोहरी मतदाता प्रविष्टियाँ दर्ज होने की शिकायतें मिली हैं। बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर आई शिकायतों की रिपोर्ट भी समय से नहीं दी।
कंप्यूटर सहायकों की फार्म फीडिंग पर रोक क्यों लगाई गई?
निर्वाचन विभाग ने पाया कि कंप्यूटर सहायकों द्वारा की गई फीडिंग में अनियमितताएँ बढ़ रही हैं। अब फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 की डिजिटाइज़ेशन केवल बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) बीएलओ ऐप के माध्यम से करेंगे, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
गड़बड़ी पाए जाने पर किन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) और संबंधित कंप्यूटर सहायक को जिम्मेदार माना जाएगा। पर्यवेक्षण में शिथिलता पर जिला निर्वाचन अधिकारी भी जवाबदेह होंगे।
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) में नागरिकों को किन सेवाओं का लाभ मिलेगा?
नागरिक ईसीआईनेट ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर 'बुक ए कॉल विद बीएलओ' सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। इस सुविधा के तहत कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए, ऐसा न होने पर बीएलओ के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
10 अप्रैल 2026 के बाद फीड किए गए फार्मों की जाँच क्यों ज़रूरी है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समाप्ति 10 अप्रैल 2026 को हुई थी। उसके बाद से कंप्यूटर सहायकों द्वारा फीड किए गए सभी फार्मों में संभावित अनियमितताएँ जाँचने के लिए अनिवार्य ऑडिट का आदेश दिया गया है, ताकि पीलीभीत जैसे मामले दोबारा न हों।
राष्ट्र प्रेस
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