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कोकिला कौशिक का एशियन पैरा गेम्स 2026 में रजत पदक, पिता ने संपत्ति बेचकर किया सपना पूरा

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कोकिला कौशिक का एशियन पैरा गेम्स 2026 में रजत पदक, पिता ने संपत्ति बेचकर किया सपना पूरा

सारांश

जींद की दृष्टिबाधित बेटी कोकिला कौशिक ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में रजत पदक जीता — वह भी तब, जब पिता ने ₹40-45 लाख खर्च कर और घर बेचने की तैयारी कर उनका सपना जिंदा रखा। यह सिर्फ एक पदक की नहीं, एक परिवार के असाधारण बलिदान की कहानी है।

मुख्य बातें

कोकिला कौशिक ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की जे2 -52 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता।
पिछले एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली कोकिला इस बार एक पायदान आगे बढ़ीं।
पिता कृष्ण कुमार कौशिक ने बेटी के प्रशिक्षण पर करीब ₹40-45 लाख खर्च किए; संपत्ति बेचने तक की तैयारी की थी।
हरियाणा सरकार के हस्तक्षेप के बाद कोकिला को ₹10.50 लाख का नकद पुरस्कार मिला, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली।
कोकिला ने 2018 में जूडो शुरू किया; कोच मुनव्वर अंजार के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं।
अगला लक्ष्य: 2028 पैरालंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक ।

हरियाणा के जींद की दृष्टिबाधित पैरा-जूडो खिलाड़ी कोकिला कौशिक ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की जे2 -52 किलोग्राम वर्ग स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की अथक मेहनत, कोच का मार्गदर्शन और पिता कृष्ण कुमार कौशिक का वह संघर्ष है जिसमें उन्होंने बेटी के सपने के लिए अपनी संपत्ति तक दाँव पर लगाने की तैयारी कर ली थी।

कांस्य से रजत तक का सफर

कोकिला ने 2018 में जूडो खेलना शुरू किया था और कोच मुनव्वर अंजार के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती रही हैं। पिछले एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता था, जबकि इस बार वह एक पायदान आगे बढ़कर रजत पदक तक पहुँचीं। उन्होंने बताया कि पिछले प्रदर्शन में सुधार करते हुए इस बार कांस्य से रजत तक का सफर तय किया है। हालाँकि, स्वर्ण पदक न जीत पाने के कारण उन्हें अब अपनी खेल शैली और रणनीति में बदलाव करना होगा।

कोकिला को जूडो खेलने की प्रेरणा अपनी बहन से मिली, जिन्होंने इस खेल में पहले कदम रखा था। शुरुआत में उनके पिता को चोट लगने का भय था, इसलिए वे कोकिला को जूडो में नहीं भेजना चाहते थे। बाद में भाई के खेल में आने के बाद उन्हें भी अवसर मिला।

परिवार को नहीं था पैरा खेलों की जानकारी

शुरुआत में परिवार को पैरा खेलों और दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए होने वाली प्रतियोगिताओं की जानकारी नहीं थी। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि कोकिला इस क्षेत्र में पेशेवर करियर बना सकती हैं। कोकिला ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, कोच और देश को देते हुए कहा कि लड़कियाँ भी आगे बढ़ सकती हैं, बशर्ते परिवार उन्हें बराबर का समर्थन दे।

पिता की आर्थिक चुनौती: ₹40-45 लाख का खर्च, संपत्ति बेचने की तैयारी

स्कूल में लेक्चरर कृष्ण कुमार कौशिक ने बताया कि कोकिला के प्रशिक्षण और विभिन्न टूर्नामेंट में भागीदारी पर अब तक करीब ₹40 से 45 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी संपत्ति बेचने तक की तैयारी कर ली थी। कोरोना काल के दौरान प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए यात्रा का खर्च काफी बढ़ गया था, जिसके चलते उन्हें सहकारी बैंक से ₹10 लाख का कर्ज भी लेना पड़ा।

परिवार के लिए बड़ी राहत तब मिली जब हरियाणा में दृष्टिबाधित पैरा-जूडो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के नकद पुरस्कार देने में आ रही परेशानी के मामले में हस्तक्षेप किया गया, जिसके बाद कोकिला को ₹10.50 लाख की राशि मिली। इससे मकान बेचने की नौबत टल गई।

समाज के लिए संदेश

कृष्ण कुमार ने माता-पिता से अपील की कि वे अपनी बेटियों पर भरोसा करें और उन्हें खेलों में आगे बढ़ने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि एक दृष्टिबाधित खिलाड़ी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सकती है, तो अन्य बच्चों को भी अपने सपने पूरे करने के लिए आगे आना चाहिए। कोकिला की कहानी इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और मेहनत के साथ-साथ परिवार का समर्थन एक खिलाड़ी की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाता है।

अब नज़रें 2028 पैरालंपिक पर

कोकिला का अगला लक्ष्य 2028 पैरालंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। रजत से संतुष्ट न होकर वह अपनी खेल रणनीति में आमूल-चूल बदलाव करने की योजना बना रही हैं। उनके पिता का भी सपना है कि उनकी बेटी पैरालंपिक के मंच पर देश का तिरंगा सबसे ऊँचा फहराए।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठता है कि सरकारी खेल-अनुदान व्यवस्था दृष्टिबाधित एथलीटों तक आखिर कब और कैसे पहुँचती है। यह भी उल्लेखनीय है कि ₹10.50 लाख का पुरस्कार तभी मिला जब बाहरी हस्तक्षेप हुआ — स्वतः नहीं। जब तक पैरा-स्पोर्ट्स फंडिंग में पारदर्शिता और समयबद्ध वितरण नहीं होगा, तब तक ऐसे परिवारों की प्रतिभा दाँव पर बनी रहेगी।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोकिला कौशिक कौन हैं और उन्होंने क्या उपलब्धि हासिल की?
कोकिला कौशिक हरियाणा के जींद की दृष्टिबाधित पैरा-जूडो खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की जे2 -52 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। उन्होंने 2018 में जूडो खेलना शुरू किया था और पिछले एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीता था।
कोकिला के पिता ने बेटी के लिए कितना खर्च किया?
कोकिला के पिता कृष्ण कुमार कौशिक ने उनके प्रशिक्षण और टूर्नामेंट पर करीब ₹40 से 45 लाख रुपये खर्च किए। खर्च पूरा करने के लिए उन्होंने सहकारी बैंक से ₹10 लाख का कर्ज लिया और संपत्ति बेचने तक की तैयारी कर ली थी।
कोकिला को हरियाणा सरकार से कितना नकद पुरस्कार मिला?
हरियाणा में दृष्टिबाधित पैरा-जूडो खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार देने में आ रही परेशानी के मामले में हस्तक्षेप के बाद कोकिला को ₹10.50 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। इससे परिवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली और मकान बेचने की नौबत टल गई।
कोकिला कौशिक का अगला लक्ष्य क्या है?
कोकिला का अगला लक्ष्य 2028 पैरालंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। रजत पदक से संतुष्ट न होकर वह अपनी खेल शैली और रणनीति में बदलाव करने की योजना बना रही हैं।
कोकिला कौशिक को जूडो खेलने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
कोकिला को जूडो खेलने की प्रेरणा उनकी बहन से मिली, जिन्होंने पहले इस खेल में कदम रखा था। शुरुआत में उनके पिता को चोट लगने का डर था, लेकिन भाई के खेल में आने के बाद कोकिला को भी अवसर मिला और उन्होंने 2018 में जूडो शुरू किया।
राष्ट्र प्रेस
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