नीतू घंघास: रोज़ 40 किमी स्कूटर यात्रा, पिता का ₹6 लाख का कर्ज़ और कॉमनवेल्थ-विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला मुक्केबाज़ नीतू घंघास ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 और महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2023 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। हरियाणा के भिवानी जिले से आने वाली इस खिलाड़ी का सफर चुनौतियों और कुर्बानियों से भरा रहा — जिसमें उनके पिता जय भगवान की भूमिका सबसे अहम रही। 19 अक्टूबर 2000 को जन्मी नीतू ने महज़ 22 साल की उम्र में विश्व चैंपियन का खिताब हासिल किया।
भिवानी से बॉक्सिंग रिंग तक का सफर
भिवानी को भारतीय बॉक्सिंग का गढ़ माना जाता है — यहीं से विजेंदर सिंह जैसे ओलंपिक पदक विजेता निकले हैं। इसी माहौल में पली-बढ़ी नीतू का मुक्केबाज़ी से लगाव बचपन से ही था। उनके पिता जय भगवान ने उन्हें पहली बार इस खेल से परिचित कराया और नीतू ने 12 साल की उम्र में ही प्रशिक्षण शुरू कर दिया। शुरुआत में कई चुनौतियों ने उन्हें इस कदर तोड़ा कि उन्होंने खेल छोड़ने का मन भी बना लिया था।
पिता की अटूट लगन: नौकरी छोड़ी, ₹6 लाख का कर्ज़ उठाया
नीतू को डगमगाते देख उनके पिता जय भगवान ने एक साहसी फैसला किया। उन्होंने बेटी को बॉक्सर बनाने की खातिर अपनी नौकरी से तीन वर्ष की अवैतनिक छुट्टी ली और ₹6 लाख का कर्ज़ उठाया। पिता ने न केवल आर्थिक बोझ उठाया, बल्कि नीतू के खान-पान और ट्रेनिंग शेड्यूल की व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी भी संभाली। यह समर्पण नीतू के करियर की नींव बना।
गौरतलब है कि नीतू रोज़ाना 40 किलोमीटर का सफर पिता के साथ स्कूटर से तय करके भिवानी के बॉक्सिंग क्लब पहुँचती थीं, जहाँ मशहूर कोच जगदीश सिंह की निगरानी में उनकी ट्रेनिंग होती थी। यह दिनचर्या वर्षों तक जारी रही।
युवा स्तर पर उपलब्धियाँ और कोविड की चुनौती
नीतू ने 2017 में यूथ इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2018 में वह एशियाई और यूथ चैंपियन भी बनीं। कोविड-19 महामारी के चलते आए ठहराव ने उनके करियर की रफ़्तार पर कुछ असर डाला, लेकिन नीतू ने शानदार वापसी करते हुए 2021 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।
मैरी कॉम को हराया, फिर लिखी इतिहास की नई इबारत
2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल में नीतू का सामना उनकी आदर्श मैरी कॉम से हुआ। घुटने की चोट से जूझ रहीं मैरी कॉम को इस मुकाबले में नीतू ने मात दी। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में नीतू ने दमदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता।
2023 की महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में नीतू पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहीं और खिताब अपने नाम किया — महज़ 22 साल की उम्र में विश्व चैंपियन बनने वाली वह एक दुर्लभ भारतीय खिलाड़ी बन गईं। उनके इन योगदानों को देखते हुए 2024 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
आगे की राह
नीतू घंघास का सफर यह साबित करता है कि भिवानी जैसे छोटे शहर से निकलकर, सीमित संसाधनों और परिवार के अटूट साथ से विश्व के शीर्ष पर पहुँचा जा सकता है। अर्जुन पुरस्कार के बाद उनकी नज़रें आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं, जहाँ भारतीय बॉक्सिंग को उनसे नए मेडल की उम्मीद है।