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नीतू घंघास: रोज़ 40 किमी स्कूटर यात्रा, पिता का ₹6 लाख का कर्ज़ और कॉमनवेल्थ-विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड

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नीतू घंघास: रोज़ 40 किमी स्कूटर यात्रा, पिता का ₹6 लाख का कर्ज़ और कॉमनवेल्थ-विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड

सारांश

रोज़ 40 किमी स्कूटर, पिता का ₹6 लाख का कर्ज़ और तीन साल की अवैतनिक छुट्टी — नीतू घंघास की कहानी सिर्फ गोल्ड मेडल की नहीं, एक परिवार की अदम्य जिजीविषा की है। भिवानी की इस बेटी ने 22 साल में विश्व चैंपियन का ताज पहना और 2024 में अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ी गईं।

मुख्य बातें

नीतू घंघास का जन्म 19 अक्टूबर 2000 को हरियाणा के भिवानी में हुआ; उन्होंने 12 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की।
पिता जय भगवान ने बेटी के लिए 3 वर्ष की अवैतनिक छुट्टी ली और ₹6 लाख का कर्ज़ उठाया।
नीतू रोज़ 40 किलोमीटर स्कूटर से पिता के साथ भिवानी बॉक्सिंग क्लब जाती थीं, कोच जगदीश सिंह की देखरेख में ट्रेनिंग हुई।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में स्वर्ण पदक; कॉमनवेल्थ ट्रायल में आदर्श मैरी कॉम को भी हराया।
महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2023 में अजेय रहते हुए 22 साल की उम्र में विश्व चैंपियन बनीं।
भारत सरकार ने 2024 में नीतू को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

भारतीय महिला मुक्केबाज़ नीतू घंघास ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 और महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2023 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। हरियाणा के भिवानी जिले से आने वाली इस खिलाड़ी का सफर चुनौतियों और कुर्बानियों से भरा रहा — जिसमें उनके पिता जय भगवान की भूमिका सबसे अहम रही। 19 अक्टूबर 2000 को जन्मी नीतू ने महज़ 22 साल की उम्र में विश्व चैंपियन का खिताब हासिल किया।

भिवानी से बॉक्सिंग रिंग तक का सफर

भिवानी को भारतीय बॉक्सिंग का गढ़ माना जाता है — यहीं से विजेंदर सिंह जैसे ओलंपिक पदक विजेता निकले हैं। इसी माहौल में पली-बढ़ी नीतू का मुक्केबाज़ी से लगाव बचपन से ही था। उनके पिता जय भगवान ने उन्हें पहली बार इस खेल से परिचित कराया और नीतू ने 12 साल की उम्र में ही प्रशिक्षण शुरू कर दिया। शुरुआत में कई चुनौतियों ने उन्हें इस कदर तोड़ा कि उन्होंने खेल छोड़ने का मन भी बना लिया था।

पिता की अटूट लगन: नौकरी छोड़ी, ₹6 लाख का कर्ज़ उठाया

नीतू को डगमगाते देख उनके पिता जय भगवान ने एक साहसी फैसला किया। उन्होंने बेटी को बॉक्सर बनाने की खातिर अपनी नौकरी से तीन वर्ष की अवैतनिक छुट्टी ली और ₹6 लाख का कर्ज़ उठाया। पिता ने न केवल आर्थिक बोझ उठाया, बल्कि नीतू के खान-पान और ट्रेनिंग शेड्यूल की व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी भी संभाली। यह समर्पण नीतू के करियर की नींव बना।

गौरतलब है कि नीतू रोज़ाना 40 किलोमीटर का सफर पिता के साथ स्कूटर से तय करके भिवानी के बॉक्सिंग क्लब पहुँचती थीं, जहाँ मशहूर कोच जगदीश सिंह की निगरानी में उनकी ट्रेनिंग होती थी। यह दिनचर्या वर्षों तक जारी रही।

युवा स्तर पर उपलब्धियाँ और कोविड की चुनौती

नीतू ने 2017 में यूथ इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2018 में वह एशियाई और यूथ चैंपियन भी बनीं। कोविड-19 महामारी के चलते आए ठहराव ने उनके करियर की रफ़्तार पर कुछ असर डाला, लेकिन नीतू ने शानदार वापसी करते हुए 2021 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।

मैरी कॉम को हराया, फिर लिखी इतिहास की नई इबारत

2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल में नीतू का सामना उनकी आदर्श मैरी कॉम से हुआ। घुटने की चोट से जूझ रहीं मैरी कॉम को इस मुकाबले में नीतू ने मात दी। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में नीतू ने दमदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता।

2023 की महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में नीतू पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहीं और खिताब अपने नाम किया — महज़ 22 साल की उम्र में विश्व चैंपियन बनने वाली वह एक दुर्लभ भारतीय खिलाड़ी बन गईं। उनके इन योगदानों को देखते हुए 2024 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

आगे की राह

नीतू घंघास का सफर यह साबित करता है कि भिवानी जैसे छोटे शहर से निकलकर, सीमित संसाधनों और परिवार के अटूट साथ से विश्व के शीर्ष पर पहुँचा जा सकता है। अर्जुन पुरस्कार के बाद उनकी नज़रें आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं, जहाँ भारतीय बॉक्सिंग को उनसे नए मेडल की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसी सरकारी खेल अकादमी को करना चाहिए था। भिवानी में बॉक्सिंग की परंपरा मज़बूत है, लेकिन ज़मीनी ढाँचे की कमी आज भी खिलाड़ियों को रोज़ 40 किमी स्कूटर पर ढोने को मजबूर करती है। यह सफलता की कहानी उतनी ही व्यवस्था की विफलता की कहानी है — और जब तक इस असंतुलन को नहीं पाटा जाता, ऐसी प्रतिभाएँ संयोग से उभरती रहेंगी, नीति से नहीं।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीतू घंघास कौन हैं और उन्होंने कौन-कौन से बड़े खिताब जीते हैं?
नीतू घंघास हरियाणा के भिवानी की भारतीय महिला मुक्केबाज़ हैं, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 और महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2023 में स्वर्ण पदक जीते। 2024 में उन्हें भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
नीतू घंघास के पिता ने उनके करियर में क्या भूमिका निभाई?
नीतू के पिता जय भगवान ने बेटी को बॉक्सर बनाने के लिए तीन वर्ष की अवैतनिक छुट्टी ली और ₹6 लाख का कर्ज़ उठाया। वे नीतू के साथ रोज़ स्कूटर पर 40 किलोमीटर का सफर करके उन्हें ट्रेनिंग के लिए ले जाते थे और उनके खान-पान का भी पूरा ख्याल रखते थे।
नीतू घंघास ने मैरी कॉम को कब और कैसे हराया?
2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल के दौरान नीतू का सामना उनकी आदर्श मैरी कॉम से हुआ। घुटने की चोट से जूझ रहीं मैरी कॉम इस मुकाबले में कठिनाई में रहीं और नीतू ने जीत दर्ज की, जिसके बाद वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में गोल्ड जीतने में सफल रहीं।
नीतू घंघास की ट्रेनिंग किसने की और वह कहाँ प्रशिक्षण लेती थीं?
नीतू को मशहूर कोच जगदीश सिंह ने भिवानी के बॉक्सिंग क्लब में प्रशिक्षित किया। कोच जगदीश सिंह की नज़र उन पर पड़ने के बाद उनके करियर में अहम मोड़ आया और उनका प्रदर्शन तेज़ी से निखरा।
नीतू घंघास को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
भारत सरकार ने 2024 में नीतू घंघास को खेल में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार कॉमनवेल्थ और विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनकी उपलब्धियों की सरकारी स्वीकृति थी।
राष्ट्र प्रेस
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