28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

निकहत ज़रीन: मां के विरोध से दो बार विश्व चैंपियन तक, तेलंगाना की बेटी ने रचा इतिहास

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
निकहत ज़रीन: मां के विरोध से दो बार विश्व चैंपियन तक, तेलंगाना की बेटी ने रचा इतिहास

सारांश

निजामाबाद की एक लड़की जिसकी माँ बॉक्सिंग रिंग में उतरने के खिलाफ थीं — वही निकहत ज़रीन आज दो बार की विश्व चैंपियन हैं। कंधे की सर्जरी, परिवार का विरोध, सामाजिक दबाव — हर रुकावट को पार कर उन्होंने मैरी कॉम के बाद वह मुकाम हासिल किया जो किसी और भारतीय महिला बॉक्सर को नसीब नहीं हुआ।

मुख्य बातें

निकहत ज़रीन का जन्म 14 जून 1996 को निजामाबाद, तेलंगाना में हुआ।
माँ और परिवार के विरोध के बावजूद 13 वर्ष की आयु में बॉक्सिंग करियर बनाने का निर्णय लिया।
2011 में महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
दाहिने कंधे की सर्जरी के बाद एक साल रिंग से दूर रहीं, फिर शानदार वापसी की।
2022 में इस्तांबुल और 2023 में लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण पदक जीता।
मैरी कॉम के बाद विश्व चैंपियनशिप में दो स्वर्ण जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर ; 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित।

तेलंगाना के निजामाबाद की बेटी निकहत ज़रीन ने बॉक्सिंग की दुनिया में वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना भी उनके परिवार ने कभी नहीं की थी। परिवार के विरोध और सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए निकहत ने न केवल दो बार विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता, बल्कि मैरी कॉम के बाद यह उपलब्धि पाने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया।

बचपन से बॉक्सिंग का जुनून, परिवार का विरोध

14 जून 1996 को निजामाबाद, तेलंगाना में जन्मी निकहत के चाचा स्वयं एक बॉक्सिंग कोच थे और उनके भाइयों को प्रशिक्षण देते थे। इसी माहौल में पली-बढ़ी निकहत की रुचि बचपन से ही इस खेल की ओर झुकती रही। 13 वर्ष की आयु में उन्होंने बॉक्सिंग में करियर बनाने का दृढ़ निश्चय कर लिया।

यह निर्णय आसान नहीं था। निकहत की माँ नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी बॉक्सिंग रिंग में उतरे। पिता के अलावा परिवार के अधिकांश सदस्यों को भी इस पर आपत्ति थी। बावजूद इसके, निकहत ने अपने चाचा से बॉक्सिंग की बारीकियाँ सीखना शुरू किया और पढ़ाई के साथ-साथ कड़ी ट्रेनिंग जारी रखी।

शुरुआती सफलता और चोट का संघर्ष

2011 में निकहत ने महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा की पहली झलक दिखाई। 2014 में उन्होंने यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया। लेकिन जब वह अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग में पाँव जमाने लगी थीं, तभी दाहिने कंधे की हड्डी टूटने की चोट ने उन्हें रोक दिया। सर्जरी के बाद एक साल तक रिंग से दूर रहना पड़ा।

यह वह दौर था जब कोई भी हार मान सकता था। लेकिन निकहत ने वापसी की — और वापसी भी शानदार। मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने साबित किया कि चोट उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी।

विश्व चैंपियन बनने का सफर

2021 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में निकहत ने कांस्य पदक जीता। इसके बाद 2022 में इस्तांबुल में उन्होंने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की — पहली बार विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतकर वह विश्व चैंपियन बनीं। उसी वर्ष उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता।

2023 में निकहत ने लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। यह उपलब्धि उन्हें मैरी कॉम के बाद विश्व चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनाती है — एक ऐसा इतिहास जो भारतीय महिला खेलों में मील का पत्थर है।

सरकारी सम्मान और राष्ट्रीय पहचान

निकहत की उपलब्धियों को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। निजामाबाद के एक साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय गौरव बनने तक का उनका सफर आज लाखों युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण है जब भारतीय महिला खिलाड़ियों को अभी भी परिवार और समाज की बाधाओं से जूझना पड़ता है। निकहत का संघर्ष और सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने हर बाधा छोटी पड़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब भी राज्य-स्तरीय बुनियादी ढाँचे और कोचिंग की उपलब्धता ने उनकी राह बनाई — यह उन नीतिगत निवेशों की सफलता है जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहते हैं। फिर भी, हर निकहत के पीछे सैकड़ों प्रतिभाशाली लड़कियाँ हैं जो परिवार के 'न' के आगे झुक जाती हैं। असली सवाल यह है कि क्या हम व्यवस्थागत रूप से उन बाधाओं को हटाने के लिए तैयार हैं, या हम हर बार एक अपवाद को उदाहरण बनाकर संतुष्ट हो जाते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निकहत ज़रीन कौन हैं और वह क्यों प्रसिद्ध हैं?
निकहत ज़रीन तेलंगाना के निजामाबाद की भारतीय महिला बॉक्सर हैं जिन्होंने 2022 और 2023 में लगातार दो बार विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता। वह मैरी कॉम के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर हैं।
निकहत ज़रीन ने कितनी बार विश्व चैंपियनशिप जीती है?
निकहत ज़रीन ने दो बार विश्व चैंपियनशिप जीती है — पहली बार 2022 में इस्तांबुल में और दूसरी बार 2023 में। इसके अलावा उन्होंने 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता।
निकहत ज़रीन के बॉक्सिंग करियर में क्या बाधाएँ आईं?
निकहत की माँ और परिवार के अधिकांश सदस्य उनके बॉक्सिंग करियर के खिलाफ थे। इसके अलावा दाहिने कंधे की हड्डी टूटने के कारण सर्जरी हुई और वह एक साल तक रिंग से दूर रहीं। इन सभी बाधाओं को पार कर उन्होंने शानदार वापसी की।
निकहत ज़रीन को कौन-सा सरकारी पुरस्कार मिला है?
भारत सरकार ने निकहत ज़रीन को 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया, जो भारत के सर्वोच्च खेल पुरस्कारों में से एक है।
निकहत ज़रीन की तुलना मैरी कॉम से क्यों की जाती है?
मैरी कॉम भारत की पहली महिला बॉक्सर हैं जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप में एकाधिक स्वर्ण पदक जीते। निकहत ज़रीन ने 2022 और 2023 में लगातार दो विश्व चैंपियनशिप स्वर्ण जीतकर यह उपलब्धि दोहराई, जिससे वह इस विशिष्ट श्रेणी में मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले