अरुंधति चौधरी: हाथ की सर्जरी और बुखार के बावजूद CWG 2026 में गोल्ड, राजस्थान की पहली महिला बॉक्सर चैंपियन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान की बेटी अरुंधति चौधरी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला 70 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 1 अगस्त को इंग्लैंड की चैंटेल रीड को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराकर वह कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली राजस्थान की पहली महिला बॉक्सर बन गईं। 5 अगस्त को जब वह अपने गृह जिले टोंक पहुँचीं, तो उनका भव्य स्वागत हुआ।
संघर्ष की कहानी: सर्जरी से स्वर्ण तक
अरुंधति का यह सफर असाधारण रूप से कठिन रहा। उन्होंने बताया कि पिछले साल हाथ का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद उन्हें लगा कि शायद वह दोबारा बॉक्सिंग नहीं कर सकेंगी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उस सर्जरी के बाद यह उनका छठा गोल्ड मेडल है। यह ऐसे समय में आया जब वह काफी समय से चोट से जूझ रही थीं।
गौरतलब है कि फाइनल मैच के दिन भी अरुंधति को बुखार था। उन्होंने कहा, 'फाइनल के दिन मुझे बुखार था, लेकिन मुझे पता था कि अगर उस दिन नहीं जीत सकी, तो मुझे 4 साल इंतजार करना पड़ेगा। मैंने हिम्मत दिखाई और वो बाउट जीती। वहाँ काफी भारतीय दर्शक थे — अगर मेरी हिम्मत टूटती, तो वे चिल्लाते: बजरंग बली की जय।'
ओलंपिक है अगला लक्ष्य
टोंक में पत्रकारों से बात करते हुए अरुंधति ने कहा, 'मुझे मेडल जीतकर काफी खुशी महसूस हो रही है, लेकिन मुझे यहीं नहीं रुकना है। देश के लिए इससे भी ज़्यादा करना है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ओलंपिक उनका अगला लक्ष्य है — एक सपना जो उन्होंने 16 साल की उम्र से देखा है। मिल रहे समर्थन को वह और बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा बताती हैं।
माता-पिता: प्रेरणा और ढाल
अरुंधति अपने माता-पिता को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानती हैं। उन्होंने बताया कि समाज के कुछ लोग कहते थे कि बॉक्सिंग में नाक-मुँह पर चोट आएगी तो शादी कौन करेगा। इस पर उनके माता-पिता का जवाब था, 'हमने बेटी शादी के लिए पैदा नहीं की — हम चाहते हैं कि बेटी आगे चलकर नाम कमाए।' अरुंधति कहती हैं कि उनके माता-पिता ने जीवन में कठिन परिस्थितियों से लड़ा, इसीलिए वे उनकी प्रेरणा हैं।
देश की बेटियों को संदेश
अरुंधति ने देश की युवा लड़कियों को सीधा संदेश दिया: 'पहले आप लड़ना सीखिए। अगर आप अपने लिए आवाज़ नहीं उठा सकते, तो जिंदगी में किसी के लिए आवाज़ नहीं उठा सकते।' उन्होंने कहा कि अन्य बच्चियों को भी अपने सपनों के लिए परिवार से जिद्द करनी चाहिए।
सरकारी सहयोग की माँग
अरुंधति ने यह भी कहा कि उन्होंने राजस्थान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं और वह चाहती हैं कि सरकार की ओर से यहाँ के खिलाड़ियों को बेहतर समर्थन मिले। आने वाले समय में उनकी निगाहें ओलंपिक क्वालीफिकेशन पर टिकी हैं।