शीतल देवी ने नागोया में जीता गोल्ड, एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत को दिलाया 17वाँ स्वर्ण पदक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पैरा-आर्चर शीतल देवी ने 22 अक्टूबर 2026 को नागोया (जापान) में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 के महिला कंपाउंड व्यक्तिगत फाइनल में सिंगापुर की नूर स्याहिदा अलीम को 142-139 से पराजित कर भारत की झोली में 17वाँ गोल्ड मेडल डाला। 18 वर्षीय शीतल ने चार अंकों की बढ़त से पिछड़ने के बावजूद असाधारण मानसिक दृढ़ता का परिचय देते हुए खिताब अपने नाम किया।
रोमांचक फाइनल का घटनाक्रम
फाइनल मुकाबले में शीतल की राह आसान नहीं रही। पहले राउंड में वह 55-59 से पीछे चल रही थीं और दूसरे राउंड में महज 26 अंक ही जुटा सकीं, जिससे उनका स्वर्ण पदक जीतने का सपना संकट में पड़ गया। हालाँकि, यहीं से शीतल के असली जौहर सामने आए। उन्होंने लगातार दो बार परफेक्ट स्कोर (30 अंक) अर्जित कर मुकाबले की बागडोर अपने हाथ में ली और अंततः 142-139 के अंतर से जीत दर्ज की।
रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन की पूरी दास्तान
नागोया में शीतल का सफर रिकॉर्ड बनाते हुए शुरू हुआ था। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने 720 में से 704 अंक बनाकर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की — जो उन्होंने खुद मार्च में बैंकॉक में स्थापित किए गए 698 अंकों के अपने ही एशियाई रिकॉर्ड से भी आगे था। गौरतलब है कि यह पदक शीतल के लिए महज एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने पिछले एशियन पैरा गेम्स खिताब के सफल बचाव की भी पुष्टि है।
टीम इवेंट में भी चमकीं शीतल
व्यक्तिगत गोल्ड के अलावा, शीतल ने मिक्स्ड टीम कंपाउंड इवेंट में तोमन कुमार के साथ जोड़ी बनाकर इंडोनेशिया को 151-148 से हराया और एक और स्वर्ण पदक जीता। इस जोड़ी ने मिक्स्ड टीम क्वालिफिकेशन में 1,402 अंक के साथ नया विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया, जो पिछले 1,400 अंकों के रिकॉर्ड से बेहतर था।
तीसरा पदक — सिल्वर भी झोली में
इन दो स्वर्ण पदकों के अतिरिक्त, शीतल ने पायल नाग के साथ महिला कंपाउंड डबल्स में सिल्वर मेडल भी जीता। इस जोड़ी ने क्वालिफिकेशन राउंड में 1,379 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल करते हुए नए एशियाई और एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड बनाए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पैरा-खेलों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मज़बूत कर रहा है। नागोया में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल के साथ शीतल ने एशियन पैरा गेम्स 2023 की तरह ही इस बार भी तीन पदक अपने नाम किए।
आगे क्या
शीतल देवी का यह प्रदर्शन उन्हें आने वाले अंतरराष्ट्रीय पैरा-आर्चरी टूर्नामेंटों में भारत की सबसे प्रबल दावेदार के रूप में स्थापित करता है। उनके एकाधिक विश्व रिकॉर्ड प्रयासों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय पैरा-आर्चरी अब केवल भागीदारी नहीं, बल्कि वर्चस्व की दिशा में अग्रसर है।