एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला स्कीट टीम का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज, 23 साल का इंतज़ार खत्म
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला स्कीट टीम ने नागोया में 23 सितंबर 2026 को एशियन गेम्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर 23 साल के मेडल के सूखे को समाप्त किया। परिनाज धालीवाल, रायजा ढिल्लों और माहेश्वरी चौहान की तिकड़ी ने क्वालिफिकेशन राउंड में कुल 331 का स्कोर दर्ज करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। परिनाज ने इस उपलब्धि का श्रेय स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की बेहतर ट्रेनिंग और व्यापक सपोर्ट सिस्टम को दिया।
मुख्य घटनाक्रम
क्वालिफिकेशन राउंड में चीन ने 347 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि कजाकिस्तान ने 336 के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया। भारतीय तिकड़ी 331 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर रही। व्यक्तिगत स्कीट इवेंट में दोनों भारतीय निशानेबाज़ों ने क्वालिफिकेशन में 125 में से 111 शॉट लगाकर फाइनल में जगह बनाई — रायजा आठवें और परिनाज नौवें स्थान पर रहीं।
हालाँकि व्यक्तिगत फाइनल में दोनों मेडल जीतने से चूक गईं — रायजा चौथे स्थान पर रहीं, जबकि परिनाज आठवें स्थान पर रहीं।
SAI के सपोर्ट ने बदली तस्वीर
इस ऐतिहासिक जीत के बाद परिनाज धालीवाल ने कहा, 'इस बार इन गेम्स से पहले हमारे दो कैंप हुए थे। SAI ने हमारे लिए रिकार्डो फिलिपेली को विदेशी कोच के तौर पर नियुक्त किया। हमारे पास घरेलू कोच अमरिंदर चीमा हैं। हमारे पास अपने फिजियोथेरेपिस्ट हैं। पिछले गेम्स में हमारा सिर्फ एक ही कैंप हुआ था। हमारे पास कोच नहीं थे। इसलिए इस बार चीजें काफी अलग थीं। सपोर्ट बहुत ही शानदार रहा।'
यह तुलना महत्वपूर्ण है — पिछले एशियन गेम्स में एकल प्रशिक्षण शिविर और कोचिंग स्टाफ की कमी के बावजूद टीम मैदान में उतरती थी। SAI की बढ़ी हुई भागीदारी ने न केवल तकनीकी दक्षता, बल्कि मानसिक तैयारी में भी फर्क डाला।
23 साल का ऐतिहासिक इंतज़ार
परिनाज ने स्वीकार किया कि उन्हें मेडल जीतने से पहले इस रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी। उनके शब्दों में, 'यह 23 साल बाद टीम इवेंट में हमारा पहला मेडल है। मुझे तो यह भी पता नहीं था कि हमने कोई रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन यह बहुत अच्छा लग रहा है। पूरी टीम को सलाम।'
गौरतलब है कि भारत की महिला स्कीट टीम ने इससे पहले 2003 के एशियन गेम्स में अंतिम बार टीम इवेंट में मेडल जीता था। यह उपलब्धि भारतीय शूटिंग के लिए एक नई पीढ़ी की शुरुआत का प्रतीक है।
व्यक्तिगत फाइनल का अनुभव
अपना पहला अंतरराष्ट्रीय फाइनल खेलने वालीं परिनाज ने कहा, 'सच कहूं तो, मेरे दिमाग में ज़्यादा कुछ नहीं चल रहा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर यह मेरा पहला फाइनल था। इसलिए चीजें उतनी अच्छी नहीं रहीं, लेकिन कोई बात नहीं; यह हमेशा कुछ सीखने का अनुभव होता है।'
यह आत्मनिरीक्षण एक युवा खिलाड़ी की परिपक्वता दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहले फाइनल का दबाव स्वाभाविक रूप से प्रदर्शन को प्रभावित करता है, और इस अनुभव से परिनाज भविष्य के लिए और मज़बूत होंगी।
समर्पण और आगे की राह
परिनाज ने यह मेडल उन सभी को समर्पित किया जिन्होंने उनकी यात्रा में साथ दिया। उन्होंने कहा, 'मेडल समर्पित करने के बारे में सोचते हुए, मेरे मन में कई लोगों का ख्याल आता है — फेडरेशन, SAI, मेरे परिवार, मेरे पर्सनल कोच और घरेलू कोच से लेकर कई लोग शामिल हैं।'
इस ऐतिहासिक ब्रॉन्ज के साथ भारतीय महिला स्कीट शूटिंग ने एशियाई मंच पर अपनी वापसी का संकेत दे दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यह टीम 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी में इसी गति को बनाए रख सकती है।