एशियन पैरा गेम्स 2026: प्रीति पाल ने 100 मीटर T35 में जीता सिल्वर, नागोया में दूसरा मेडल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पैरा एथलीट प्रीति पाल ने 21 अक्टूबर 2026 को नागोया में जारी एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की 100 मीटर T35 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर एक बार फिर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने 29.53 सेकंड का समय निकाला और इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में यह उनका दूसरा पदक रहा।
लगातार दो मेडल का करिश्मा
प्रीति पाल ने 20 अक्टूबर को 200 मीटर T35 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने के महज एक दिन बाद 100 मीटर T35 में भी रजत पदक पर कब्जा जमाया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत एशियन पैरा गेम्स में अपनी ट्रैक-एंड-फील्ड उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। गौरतलब है कि नागोया में उनके इन दोनों प्रदर्शनों ने भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स जगत में उत्साह की नई लहर पैदा कर दी है।
संघर्ष से शिखर तक का सफर
उत्तर प्रदेश के एक ग्रामीण किसान परिवार में जन्मीं प्रीति को जन्म से ही शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जन्म के तुरंत बाद उनके शरीर के निचले हिस्से पर छह दिनों तक प्लास्टर लगाना पड़ा था, और पैरों की कमजोरी व असामान्य बनावट के कारण उनके जीवन को लेकर कई लोगों को संशय था।
पाँच वर्ष की आयु में उन्हें कैलिपर्स (सहारा देने वाले उपकरण) पहनने पड़े, जिन्हें उन्होंने आठ साल तक पहना। परंपरागत इलाजों और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर प्रीति ने जानलेवा परिस्थितियों को पार किया और एक योद्धा की तरह खड़ी रहीं।
पैरा-स्पोर्ट्स की राह और मेंटर का योगदान
17 वर्ष की आयु में सोशल मीडिया पर पैरालंपिक खेलों की क्लिप्स देखकर प्रीति की रुचि पैरा-स्पोर्ट्स में जागी। एथलेटिक्स की प्रैक्टिस शुरू करने के कुछ वर्षों बाद उनकी मुलाकात पैरालंपियन और मेंटर फातिमा खातून से हुई, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी। फातिमा से प्रेरणा लेकर प्रीति ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया और 2023 में हांगझू एशियन पैरा गेम्स में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।
अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ
प्रीति पाल ने 2024 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में ब्रॉन्ज मेडल जीते। इसके बाद उन्होंने पेरिस पैरालंपिक 2024 में 200 मीटर T35 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया — वे पैरालंपिक या ओलंपिक के ट्रैक-एंड-फील्ड इवेंट में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं।
उनके मेडल का सिलसिला यहीं नहीं थमा। वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज, इंडियन ओपन टूर्नामेंट्स में चार गोल्ड और नई दिल्ली ग्रां प्री में एक गोल्ड — यह आँकड़े उनकी निरंतरता और समर्पण की कहानी खुद बयान करते हैं।
आगे क्या
नागोया में प्रीति के दोनों सिल्वर मेडल भारतीय पैरा-एथलेटिक्स को नई ऊँचाई पर ले जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के बाद 2028 पैरालंपिक की तैयारी में उनकी दावेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।