एसआईआर पर अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला: मतदाता सूची की खामियां 'गंभीर लापरवाही'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 19 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत मतदाता सूची में सामने आई कथित अनियमितताएं महज तकनीकी चूक नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही हैं। उन्होंने एक व्यक्ति के नाम का चार अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज होना और एक ही मतदाता के कई वोट होने जैसी विसंगतियों का उदाहरण देते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
मुख्य घटनाक्रम
अखिलेश यादव गोमतीनगर विस्तार में पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री विद्यावती से मुलाकात करने पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं और पीडीए प्रहरियों की सतर्कता के कारण ये खामियां उजागर हुईं, और अब चुनाव आयोग स्वयं इन्हें स्वीकार कर सुधार की बात कर रहा है।
एक ठोस उदाहरण देते हुए सपा प्रमुख ने बताया कि पीडीए प्रहरी सचिन ने फूलमती नामक महिला के कई स्थानों पर वोट दर्ज होने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को इसकी सूचना दे दी गई है और उम्मीद है कि अतिरिक्त प्रविष्टियां हटाई जाएंगी।
करोड़ों खर्च, फिर भी विसंगतियां
अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पर करोड़ों रुपए व्यय किए गए, लेकिन इसके बाद भी इस तरह की कथित गड़बड़ियां सामने आना पूरी कवायद की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इस प्रक्रिया के दौरान कई बूथ लेवल अधिकारियों की मृत्यु का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इतने बड़े अभियान के बाद भी ऐसी त्रुटियों का सामने आना चिंताजनक है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं।
टीसीएस की भूमिका पर सवाल
सपा प्रमुख ने मतदाता सूची तैयार करने में निजी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की भागीदारी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसकी विश्वसनीयता को लेकर स्पष्टीकरण अनिवार्य है। उनके अनुसार, किसी निजी कंपनी के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित कोशिश लोकतंत्र के लिए गहरी चिंता का विषय है।
भाजपा-आयोग 'मिलीभगत' का आरोप
अखिलेश ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनाव हारने की स्थिति में चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करती है। उन्होंने कहा कि जब सपा चुनाव आयोग से सवाल करती है, तो भाजपा नेता जवाब देने सामने आ जाते हैं — जो आलोचकों के अनुसार आयोग की स्वायत्तता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने दिल्ली में चुनाव आयोग के विरोध से जुड़े घटनाक्रम और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग का भी उल्लेख किया।
आगे की रणनीति
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बारे में सपा अध्यक्ष ने बताया कि पार्टी की कार्ययोजना तय करने के लिए 26 नवंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में रणनीति और दिशा पर विस्तार से चर्चा होगी। मतदाता सूची में पारदर्शिता की माँग के साथ सपा अब चुनावी मैदान में अपनी जवाबदेही की राजनीति को और धार देने की तैयारी में है।