19 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एसआईआर पर अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला: मतदाता सूची की खामियां 'गंभीर लापरवाही'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एसआईआर पर अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला: मतदाता सूची की खामियां 'गंभीर लापरवाही'

सारांश

अखिलेश यादव ने एसआईआर प्रक्रिया पर करोड़ों खर्च के बावजूद मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। एक महिला के नाम का चार केंद्रों पर दर्ज होना, टीसीएस की भूमिका और भाजपा-आयोग 'मिलीभगत' के आरोप — सपा ने चुनाव से पहले यह मुद्दा पूरी ताकत से उठाया।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 19 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में चुनाव आयोग पर एसआईआर के तहत मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया।
एक ही मतदाता का नाम चार अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज होने जैसी विसंगतियों को उन्होंने 'गंभीर लापरवाही' बताया।
सपा ने मतदाता सूची तैयार करने में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
अखिलेश ने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच 'मिलीभगत' का आरोप लगाया और कहा कि आयोग से सवाल करने पर भाजपा नेता जवाब देने आ जाते हैं।
पार्टी की आगामी रणनीति के लिए 26 नवंबर को बैठक आयोजित की जाएगी।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 19 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत मतदाता सूची में सामने आई कथित अनियमितताएं महज तकनीकी चूक नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही हैं। उन्होंने एक व्यक्ति के नाम का चार अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज होना और एक ही मतदाता के कई वोट होने जैसी विसंगतियों का उदाहरण देते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

मुख्य घटनाक्रम

अखिलेश यादव गोमतीनगर विस्तार में पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री विद्यावती से मुलाकात करने पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं और पीडीए प्रहरियों की सतर्कता के कारण ये खामियां उजागर हुईं, और अब चुनाव आयोग स्वयं इन्हें स्वीकार कर सुधार की बात कर रहा है।

एक ठोस उदाहरण देते हुए सपा प्रमुख ने बताया कि पीडीए प्रहरी सचिन ने फूलमती नामक महिला के कई स्थानों पर वोट दर्ज होने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को इसकी सूचना दे दी गई है और उम्मीद है कि अतिरिक्त प्रविष्टियां हटाई जाएंगी।

करोड़ों खर्च, फिर भी विसंगतियां

अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पर करोड़ों रुपए व्यय किए गए, लेकिन इसके बाद भी इस तरह की कथित गड़बड़ियां सामने आना पूरी कवायद की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इस प्रक्रिया के दौरान कई बूथ लेवल अधिकारियों की मृत्यु का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इतने बड़े अभियान के बाद भी ऐसी त्रुटियों का सामने आना चिंताजनक है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं।

टीसीएस की भूमिका पर सवाल

सपा प्रमुख ने मतदाता सूची तैयार करने में निजी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की भागीदारी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसकी विश्वसनीयता को लेकर स्पष्टीकरण अनिवार्य है। उनके अनुसार, किसी निजी कंपनी के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित कोशिश लोकतंत्र के लिए गहरी चिंता का विषय है।

भाजपा-आयोग 'मिलीभगत' का आरोप

अखिलेश ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनाव हारने की स्थिति में चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम करती है। उन्होंने कहा कि जब सपा चुनाव आयोग से सवाल करती है, तो भाजपा नेता जवाब देने सामने आ जाते हैं — जो आलोचकों के अनुसार आयोग की स्वायत्तता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने दिल्ली में चुनाव आयोग के विरोध से जुड़े घटनाक्रम और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग का भी उल्लेख किया।

आगे की रणनीति

आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बारे में सपा अध्यक्ष ने बताया कि पार्टी की कार्ययोजना तय करने के लिए 26 नवंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में रणनीति और दिशा पर विस्तार से चर्चा होगी। मतदाता सूची में पारदर्शिता की माँग के साथ सपा अब चुनावी मैदान में अपनी जवाबदेही की राजनीति को और धार देने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एसआईआर जैसी महंगी प्रक्रिया के बाद भी इनका सामने आना आयोग की कार्यकुशलता पर वास्तविक सवाल उठाता है। टीसीएस जैसी निजी कंपनी की चुनावी डेटा प्रबंधन में भूमिका पर पारदर्शिता का अभाव एक ऐसा बिंदु है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि यदि विपक्ष के कार्यकर्ता ये खामियां उजागर कर रहे हैं, तो राज्य तंत्र की निगरानी कहाँ थी — और क्या सुधार की प्रक्रिया चुनाव से पहले पूरी होगी?
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने की प्रक्रिया है। विवाद इसलिए है क्योंकि सपा के अनुसार करोड़ों रुपए खर्च के बाद भी एक ही व्यक्ति का नाम चार मतदान केंद्रों पर दर्ज होने जैसी कथित गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर कौन-से मुख्य आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के कई नाम दर्ज हैं, एसआईआर पर करोड़ों खर्च के बावजूद विसंगतियां बरकरार हैं, और भाजपा व चुनाव आयोग के बीच 'मिलीभगत' है। उन्होंने टीसीएस की भूमिका पर भी पारदर्शिता की माँग की।
टीसीएस का मतदाता सूची से क्या संबंध है और सपा की आपत्ति क्या है?
अखिलेश यादव के अनुसार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल है। सपा का कहना है कि किसी निजी कंपनी के जरिए चुनावी डेटा प्रबंधन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए खतरा हो सकता है और इस पर स्पष्टीकरण आवश्यक है।
सपा की आगामी चुनावी रणनीति बैठक कब होगी?
सपा ने 26 नवंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इसमें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति और विभिन्न क्षेत्रों में कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
फूलमती मामला क्या है जिसका अखिलेश ने उल्लेख किया?
सपा के पीडीए प्रहरी सचिन ने दावा किया कि फूलमती नामक एक महिला मतदाता का नाम कई स्थानों पर दर्ज है। अखिलेश के अनुसार इसकी सूचना बूथ लेवल अधिकारी को दे दी गई है और उम्मीद है कि अतिरिक्त प्रविष्टियां हटाई जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले