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अफीम नीति 2026-27: 1.33 लाख किसानों को लाइसेंस, 18 हजार नए काश्तकारों को मिला मौका

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अफीम नीति 2026-27: 1.33 लाख किसानों को लाइसेंस, 18 हजार नए काश्तकारों को मिला मौका

सारांश

केंद्र सरकार की अफीम नीति 2026-27 दो दशक बाद 10,500 डी-लाइसेंस किसानों के लिए दरवाजे खोलती है। 1.33 लाख काश्तकारों को लाइसेंस और नीमच में 10,000 मीट्रिक टन की नई प्रसंस्करण इकाई — यह नीति मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए बड़ा बदलाव है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार की अफीम नीति 2026-27 से देशभर के लगभग 1.33 लाख काश्तकार लाभान्वित होंगे।
पिछले वर्ष की तुलना में 18 हजार अतिरिक्त किसानों को अफीम खेती का अवसर मिलेगा।
वर्ष 1998 से 2003 के बीच डी-लाइसेंस हुए लगभग 10,500 किसानों को दोबारा खेती का मौका दिया जाएगा।
चीरा पद्धति के लिए 0.10 हेक्टेयर और यूपीएस के लिए 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित; 5% अतिरिक्त रकबा क्षम्य।
नीमच में 10,000 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता की आधुनिक पोस्त भूसा प्रसंस्करण इकाई अगले वित्तीय वर्ष में शुरू होगी।
पात्रता सूची सीबीएन की वेबसाइट पर अपलोड होगी; मौजूदा लाइसेंसधारियों को दस्तावेज़ दोबारा जमा नहीं कराने होंगे।

केंद्र सरकार की अफीम नीति 2026-27 के तहत देशभर के लगभग 1.33 लाख काश्तकार लाभान्वित होंगे। नीमच केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में 18 हजार अतिरिक्त किसानों को इस बार अफीम खेती का अवसर मिलेगा। नई नीति में किसानों की पात्रता, खेती का क्षेत्रफल और उपज के मानक स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वर्ष 1998 से 2003 के बीच डी-लाइसेंस हुए लगभग 10,500 किसानों को दोबारा खेती का अवसर देना है। इन किसानों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के काश्तकार शामिल हैं। यह कदम उन हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है जो दो दशकों से अधिक समय से लाइसेंस से वंचित थे।

सीबीएन के अनुसार, लगभग 35,900 किसानों को लुनी-चिरनी (चीरा पद्धति) के पट्टे और लगभग 30,000 किसानों को सीपीएस (बिना चीरा पद्धति/यूपीएस) के पट्टे दिए जाएंगे।

खेती का क्षेत्रफल और उपज मानक

नई नीति में चीरा पद्धति के लिए 0.10 हेक्टेयर और बिना चीरा पद्धति (यूपीएस) के लिए 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। किसान अन्य व्यक्तियों की भूमि पट्टे पर लेकर भी खेती कर सकेंगे, और 5% अतिरिक्त रकबा क्षम्य रहेगा।

पात्रता के लिए चीरा पद्धति में न्यूनतम 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मॉर्फिन तथा यूपीएस में 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपज अनिवार्य है। अगले वर्ष यह मानक क्रमशः 5.9 किलोग्राम और 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो जाएंगे।

बुनियादी ढाँचा विस्तार

नीमच में 10 हजार मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता की एक आधुनिक पोस्त भूसा प्रसंस्करण इकाई आगामी वित्तीय वर्ष में शुरू होने की योजना है। यह इकाई क्षेत्र की प्रसंस्करण क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी और किसानों को उनकी उपज के बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक होगी।

सीबीएन अधिकारी का संदेश

नीमच उप नारकोटिक्स आयुक्त निखिल गांधी ने बताया कि सीबीएन का पूरा प्रयास है कि किसान न्यूनतम परेशानी में अपने लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकें और पात्रता के अनुसार उन्हें लाइसेंस मिले। उन्होंने कहा कि पात्रता सूची सीबीएन की वेबसाइट पर जल्द अपलोड की जाएगी, जिसे किसान स्वयं जाँच सकेंगे।

गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि सूची में नाम होने पर कोई भी व्यक्ति किसान को प्रलोभन देकर या डराकर उसका पट्टा नहीं कटवा सकता। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी दलाल के झाँसे में न आएं।

आवेदन प्रक्रिया और शिकायत निवारण

पात्र किसानों की सूची दो चरणों में अपलोड होगी — पहले नियमित पट्टाधारकों की, फिर छूट नीति (रिलैक्सेशन पॉलिसी) के अंतर्गत नए पट्टों की। मौजूदा लाइसेंसधारियों को दस्तावेज़ दोबारा जमा नहीं कराने होंगे। पंजीकृत मोबाइल और ईमेल पर सूचना प्रेषित की जाएगी।

जिन किसानों को लगता है कि उनका नाम सूची में होना चाहिए था लेकिन नहीं है, वे अपने दस्तावेजों के साथ जिला अफीम अधिकारी के कार्यालय या सीधे उप नारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय, नीमच में संपर्क कर सकते हैं। नीति के लागू होने से किसानों में बुवाई के प्रति उत्साह बढ़ा है, और अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष भी अच्छी उपज की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 किसानों की वापसी — यह नीति संख्याओं में बड़ी दिखती है, लेकिन असली परीक्षा उपज मानकों के क्रमिक कड़े होने में है। अगले वर्ष चीरा पद्धति का मॉर्फिन मानक 4.4 से बढ़कर 5.9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो जाएगा — यानी नए किसानों के पास तकनीकी दक्षता हासिल करने के लिए महज एक सीजन का समय है। नीमच की नई प्रसंस्करण इकाई अगर समय पर चालू हुई, तो यह बाधा कम होगी; लेकिन सरकारी परियोजनाओं में देरी का इतिहास चिंता का आधार देता है। दलालों के झाँसे से बचाने की अपील सही दिशा में है, पर इसे डिजिटल पारदर्शिता से ही सुनिश्चित किया जा सकता है — जो अभी भी ग्रामीण काश्तकारों के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफीम नीति 2026-27 क्या है और इससे कितने किसान लाभान्वित होंगे?
केंद्र सरकार की अफीम नीति 2026-27 के तहत देशभर के लगभग 1.33 लाख काश्तकारों को अफीम खेती के लाइसेंस दिए जाएंगे। पिछले वर्ष की तुलना में 18 हजार अतिरिक्त किसानों को इस बार मौका मिलेगा और 1998-2003 के बीच डी-लाइसेंस हुए लगभग 10,500 किसान भी पात्र होंगे।
अफीम खेती के लिए पात्रता सूची कहाँ देख सकते हैं और आवेदन कैसे करें?
पात्रता सूची केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। किसान अपना नाम स्वयं जाँच सकते हैं और उसी पोर्टल पर लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं; पंजीकृत मोबाइल और ईमेल पर भी सूचना भेजी जाएगी।
चीरा पद्धति और यूपीएस (बिना चीरा पद्धति) के लिए कितना क्षेत्रफल और उपज मानक निर्धारित है?
चीरा पद्धति के लिए 0.10 हेक्टेयर और यूपीएस के लिए 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित है। पात्रता के लिए चीरा पद्धति में न्यूनतम 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मॉर्फिन और यूपीएस में 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपज अनिवार्य है, जो अगले वर्ष क्रमशः 5.9 किलोग्राम और 900 किलोग्राम हो जाएगी।
यदि किसान का नाम पात्रता सूची में न हो तो क्या करें?
जिस किसान को लगता है कि उसका नाम पात्रता सूची में होना चाहिए था, वह अपने वैध दस्तावेजों के साथ जिला अफीम अधिकारी के कार्यालय या सीधे उप नारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय, नीमच में संपर्क कर सकता है। अधिकारी दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पात्रता का निर्धारण करेंगे; किसी दलाल की जरूरत नहीं है।
नीमच में नई पोस्त भूसा प्रसंस्करण इकाई कब शुरू होगी?
नीमच में 10,000 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता की आधुनिक पोस्त भूसा प्रसंस्करण इकाई आगामी वित्तीय वर्ष में शुरू होने की योजना है। यह इकाई किसानों की उपज के बेहतर प्रसंस्करण और मूल्य वृद्धि में सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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