चावल आवंटन घोटाला: CBI ने FCI और NERAMAC अधिकारियों पर दर्ज किया केस, ₹28.87 करोड़ के नुकसान का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नई दिल्ली में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के तत्कालीन अधिकारियों और नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ सस्ती दर पर चावल आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर औपचारिक मामला दर्ज किया है। जांच के अनुसार इस कथित घोटाले से सरकारी खजाने को करीब ₹28.87 करोड़ का सीधा नुकसान पहुँचाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत जून 2026 में हुई, जब उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की विजिलेंस रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में गड़बड़ी उजागर होने के बाद चावल आवंटन की गहन जांच के लिए एक तटस्थ समिति गठित की गई थी। समिति को यह पता लगाना था कि FCI दिल्ली रीजन ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत राज्य सरकारों को चावल बेचने वाली श्रेणी में NERAMAC को चावल का आवंटन किस आधार पर किया।
मुख्य अनियमितताएँ
जांच में सामने आया कि FCI दिल्ली रीजन ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया, जिसमें से NERAMAC ने 50,645 मीट्रिक टन चावल उठा लिया। यह चावल ₹23,200 प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर दिया गया, जबकि उस समय बाज़ार में चावल की रिज़र्व कीमत करीब ₹28,900 प्रति मीट्रिक टन थी।
नियमों के अनुसार NERAMAC — जो एक केंद्र सरकार की कंपनी है — बिना ई-ऑक्शन के इस प्रकार चावल लेने की पात्र नहीं थी। ई-ऑक्शन से छूट केवल राज्य सरकारों और राज्य सरकार की कॉरपोरेशनों को मिलती है, केंद्रीय संस्थाओं को नहीं। इसके बावजूद कथित तौर पर यह आवंटन कर दिया गया।
वित्तीय लेन-देन में संदिग्ध रास्ता
जांच में एक और बड़ी अनियमितता उजागर हुई — चावल के आवंटन का भुगतान NERAMAC की ओर से सीधे नहीं किया गया, बल्कि अलग-अलग निजी कंपनियों — जिनमें चावल मिलर्स और थोक व्यापारी शामिल थे — के ज़रिए भेजा गया। इसके अलावा जांच के दौरान ऐसा कोई अभिलेख नहीं मिला जो यह प्रमाणित कर सके कि NERAMAC को आवंटित चावल वास्तव में उसी उद्देश्य के लिए जनता में वितरित किया गया, जिसके नाम पर यह आवंटन हुआ था।
इसके साथ ही पुराने स्टॉक को पहले निकालने के लिए लागू FIFO (First In First Out) नियम का भी पालन नहीं किया गया, जो खाद्यान्न प्रबंधन में एक अनिवार्य प्रक्रिया है।
सरकारी खजाने को नुकसान
विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार, यदि NERAMAC को आवंटित 50,645 मीट्रिक टन चावल को ₹28,900 प्रति मीट्रिक टन की रिज़र्व कीमत पर ई-ऑक्शन के माध्यम से बेचा जाता, तो FCI को करीब ₹28.87 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता। इस प्रकार रियायती आवंटन से सरकार को सीधा वित्तीय नुकसान पहुँचाया गया।
CBI की जांच और आगे की कार्रवाई
CBI ने अब इस पूरे मामले की विधिवत जांच शुरू कर दी है। मामले में FCI दिल्ली के तत्कालीन अधिकारी, NERAMAC के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अन्य अधिकारी, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारी तथा अन्य लोग आरोपी हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब खाद्यान्न वितरण प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। जांच के नतीजे आने वाले हफ्तों में सार्वजनिक खाद्य नीति और सरकारी कंपनियों के बीच आवंटन प्रक्रिया पर व्यापक बहस छेड़ सकते हैं।