वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की 7.8% ग्रोथ, सीतारमण बोलीं — 'यह जीवंत अर्थव्यवस्था का प्रमाण'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 सितंबर 2026 को एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच भी अपनी विकास गति को बनाए रखने में सक्षम है। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर को निरंतर बाहरी दबावों के बावजूद हासिल की गई उपलब्धि बताया।
मुख्य घटनाक्रम
सीतारमण ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा, 'ये सभी एक जीवंत अर्थव्यवस्था के बहुत स्पष्ट संकेत हैं, एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो वैश्विक स्तर पर बदलावों को स्वीकार करती है और खुद को इस तरह से ढालती है कि हमारी ग्रोथ प्रभावित न हो।' उन्होंने यह भी माना कि भारत कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों — यूरिया, अमोनिया, डीएपी — के लिए आयात पर बड़े पैमाने पर निर्भर है।
वित्त मंत्री के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के संकेतक सकारात्मक दिशा में हैं और देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब डॉलर पर है। उन्होंने इसे 'कोई सामान्य आँकड़ा नहीं' बताते हुए कहा कि यह आँकड़ा वैश्विक निवेशकों में भारत की साख को दर्शाता है।
क्षेत्रवार आर्थिक प्रदर्शन
वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि यह विस्तार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि वित्तीय क्षेत्र और पेशेवर सेवाएँ 12.1 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ीं। उन्होंने कहा, 'इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, अगर भारतीय अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो यह दिल को सुकून देने वाला है।'
डिजिटल बुनियादी ढाँचे और सुधारों की भूमिका
सीतारमण ने भारत की आर्थिक मज़बूती का श्रेय नागरिकों की मेहनत, आर्थिक सुधारों और डिजिटल बुनियादी ढाँचे के विस्तार को दिया। उन्होंने कहा कि UPI, NPCI और QR कोड की गहरी पैठ ने छोटे, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचने में सक्षम बनाया है।
उन्होंने बताया कि कारोबार को आसान बनाने के लिए 1,000 से अधिक कानूनों को समाप्त किया गया है और लगभग 40,000 नियमों को सरल बनाया गया है। राज्य सरकारों की भागीदारी को भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बताया गया।
जी20 एजेंडा और द्विपक्षीय बैठकें
एशविले में वित्त मंत्री ने अमेरिका, पोलैंड, कतर, दक्षिण कोरिया और रूस के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी अध्यक्षता के तहत विकास, वैश्विक असंतुलन और वित्तीय साक्षरता पर 'निष्पक्ष, खुली चर्चा' का समर्थन करता है। जी20 बैठक के बाद वह भारत में रुचि रखने वाले निवेशकों से मुलाकात के लिए न्यूयॉर्क रवाना होंगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर को प्रभावित कर रही हैं। सरकार द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और निवेशक संरक्षण समझौतों पर काम जारी रखे हुए है। विदेशी जमा और प्रवासी भारतीयों के निवेश को भी वित्त मंत्री ने बैंकिंग प्रणाली में विश्वास के संकेत के रूप में रेखांकित किया।