भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुँची, NDA नेताओं ने मोदी सरकार की नीतियों को दिया श्रेय
सारांश
मुख्य बातें
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास-केंद्रित आर्थिक नीतियों की सफलता बताया है और कहा है कि यह ग्रोथ दर अनुमानित आँकड़ों से भी अधिक रही है।
मुख्य घटनाक्रम
1 सितंबर को जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो पूर्वानुमानित दर से अधिक बताई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बना हुआ है और कई देशों की जीडीपी ग्रोथ सुस्त पड़ी है।
NDA नेताओं की प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल भाजपा नेता दिलीप घोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'सरकार ने अपना तय किया हुआ लक्ष्य लगभग हासिल कर लिया है। लोग अक्सर लक्ष्यों की आलोचना करते हैं, लेकिन पहले की सरकारें भी लक्ष्य तय करती थीं और अक्सर उनके आसपास भी नहीं पहुंच पाती थीं। आज, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार जो कहती है, वह करती है और उसे पूरा करती है।'
घोष ने आगे कहा, 'भारत हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है — चाहे अर्थव्यवस्था हो, कानून-व्यवस्था हो, खेल हो या अन्य क्षेत्र — और नए मानक स्थापित कर रहा है। उद्योग बढ़ रहे हैं और जीडीपी भी बढ़ रही है और भविष्य में भी बढ़ती रहेगी।'
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मैं प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को उनकी विकास-केंद्रित नीतियों के लिए सलाम करता हूं। तमाम मुश्किलों के बावजूद, भारत ने पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की है।'
भाजपा प्रवक्ता का बयान
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, 'भारत की जीडीपी ग्रोथ एक तिमाही में 7.8 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो अनुमानित ग्रोथ रेट से भी ज्यादा है। यह पीएम मोदी की आर्थिक नीतियों का नतीजा है। दुनिया की जीडीपी गिर रही है, जबकि हमारी जीडीपी लगातार बढ़ रही है।'
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। 7.8 प्रतिशत की यह वृद्धि दर भारत को वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बीच भी मज़बूत स्थिति में रखती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि उच्च जीडीपी ग्रोथ के साथ-साथ रोज़गार सृजन और आय असमानता जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, यदि यह गति बनी रही तो भारत पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने जीडीपी लक्ष्य को पार कर सकता है। वित्त मंत्रालय और नीति आयोग के अनुमान आने वाले महीनों में इस दिशा में और स्पष्टता देंगे।