पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव: एबीवीपी की लगातार दूसरी जीत पर अमित शाह और पीयूष गोयल ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। इस उपलब्धि पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 1 सितंबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से परिषद के कार्यकर्ताओं को बधाई दी। यह जीत चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में युवाओं के बीच एबीवीपी की बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित करती है।
अमित शाह की प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की शानदार जीत पर परिषद के सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई। लगातार दूसरी बार मिली यह जीत युवा शक्ति के राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर अटूट विश्वास का प्रमाण है।' शाह ने आगे कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि एबीवीपी के कार्यकर्ता स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलते हुए छात्रहित के लिए निरंतर संकल्पित भाव से कार्य करते रहेंगे।
पीयूष गोयल का संदेश
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक्स पर बधाई देते हुए कहा, 'पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की लगातार दूसरी जीत पर परिषद के सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं बल्कि विश्वविद्यालय के युवाओं के विश्वास और परिषद के कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत, प्रतिबद्धता और छात्रहित के प्रति समर्पण की जीत है।' गोयल ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेकर विद्यार्थियों की आवाज बनें और विश्वविद्यालय के विकास में अपनी भूमिका निभाएं।
एबीवीपी: संगठन की पृष्ठभूमि
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की स्थापना 9 जुलाई 1949 को हुई थी। इसके संस्थापक बलराज मधोक थे और मुख्य कार्यवाहक प्रो. यशवंतराव केलकर थे। संगठन का ध्येय वाक्य 'ज्ञान, शील और एकता' है। एबीवीपी को भारत और विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन माना जाता है, जो छात्रशक्ति को राष्ट्रशक्ति के रूप में देखता है।
जीत का महत्व
पंजाब यूनिवर्सिटी में लगातार दूसरी बार मिली यह जीत एबीवीपी की संगठनात्मक मजबूती का संकेत है। यह ऐसे समय में आई है जब देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाताओं तक पहुँचने का अहम माध्यम बन चुके हैं। गौरतलब है कि पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ चुनाव परंपरागत रूप से उत्तर भारत के प्रमुख छात्र चुनावों में गिना जाता है। आगामी समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एबीवीपी इस जनादेश को छात्रहित की नीतियों में कैसे रूपांतरित करती है।