दानिश कनेरिया का बड़ा बयान: पाकिस्तान क्रिकेट 70 साल में सबसे निचले स्तर पर, 'ये खेल ही क्यों रहे'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व पाकिस्तानी स्पिनर दानिश कनेरिया ने 1 सितंबर को पाकिस्तान क्रिकेट टीम की मौजूदा स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पिछले 70 वर्षों में उन्होंने टीम को इतनी बुरी हालत में कभी नहीं देखा। बाबर आजम की कप्तानी में पाकिस्तान इंग्लैंड में 3 टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 से पिछड़ चुका है और टीम प्रबंधन तीखी आलोचना के घेरे में है।
मुख्य घटनाक्रम
इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान ने शुरुआती दोनों टेस्ट गंवाए हैं। कनेरिया के अनुसार, हार से भी ज़्यादा चिंताजनक यह है कि किसी भी खिलाड़ी में संघर्ष करने की इच्छाशक्ति नज़र नहीं आती। उन्होंने कहा, 'हारना बुरा नहीं है, लेकिन पाकिस्तान टीम के किसी भी खिलाड़ी द्वारा कोई संघर्ष या जूझने की क्षमता दिखाई नहीं पड़ती। यह सबसे बुरी स्थिति है।'
तीसरे टेस्ट के लिए टीम में 7 बदलाव किए जाने की खबरों पर कनेरिया ने चयनकर्ताओं पर निशाना साधते हुए पूछा कि इन खिलाड़ियों को पहले क्यों नहीं चुना गया।
नेतृत्व और प्रबंधन पर सवाल
कनेरिया ने कप्तानी के निरंतर बदलाव को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बाबर आजम को हटाकर फिर कप्तान बनाया गया, सरफराज अहमद को टेस्ट कोच बनाया गया और अब उन्हें भी हटाया जा रहा है। उनका तर्क था कि जिसे भी जिम्मेदारी दी जाए, उसे पर्याप्त समय और स्पष्ट लक्ष्य मिलने चाहिए।
पूर्व क्रिकेटर यूनिस खान को मुख्य चयनकर्ता बनाए जाने की चर्चा का उल्लेख करते हुए कनेरिया ने कहा कि यह खबर सुनकर उन्हें खुशी हुई थी, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने उनकी शर्तें नहीं मानीं और वे चयनकर्ता नहीं बने। आकिब जावेद के बारे में कनेरिया ने कहा कि उन्हें क्रिकेट निदेशक से लेकर चयनकर्ता तक कई ओहदे मिलते रहे, लेकिन क्रिकेट का स्तर नहीं सुधरा।
गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी की कमज़ोरियाँ
कनेरिया ने गेंदबाज़ी की कमज़ोरी को सबसे बड़ी समस्या बताया। उनके अनुसार इंग्लैंड की परिस्थितियों में 140 से 150 किमी/घंटा की गति के गेंदबाज़ चाहिए, जबकि टीम में 120 किमी/घंटा की गति के गेंदबाज़ हैं। उन्होंने मोहम्मद अब्बास और साजिद खान का उदाहरण देते हुए कहा कि अच्छा प्रदर्शन करने वालों को भी टीम से बाहर कर दिया जाता है।
बल्लेबाज़ी पर भी कनेरिया ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बाबर आजम का जोफ्रा आर्चर की गेंद पर आउट होने का तरीका 'हास्यास्पद' था और मोहम्मद रिजवान की बल्लेबाज़ी व विकेटकीपिंग दोनों साधारण स्तर की हैं।
घरेलू क्रिकेट ढाँचे की विफलता
कनेरिया ने पाकिस्तान क्रिकेट की गिरावट की जड़ घरेलू ढाँचे में बदलाव को बताया। उनके अनुसार पहले क़ायदे आज़म ट्रॉफी और पैट्रन ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताएँ खिलाड़ियों को मज़बूत बनाती थीं। विभागीय क्रिकेट बंद होने के बाद से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की आपूर्ति कम हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय टीम का चयन किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
कनेरिया ने BCCI की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय बोर्ड ने खिलाड़ियों के अनुबंध में घरेलू क्रिकेट खेलना अनिवार्य किया है, जबकि पाकिस्तान में खिलाड़ी घरेलू मैच नहीं खेलते।
बांग्लादेश और श्रीलंका से तुलना
कनेरिया ने बांग्लादेश की तारीफ करते हुए कहा कि उनके पास 140 किमी/घंटा से ऊपर की गति के गेंदबाज़ हैं और बेहतरीन कोचिंग टीम है, जिसके नतीजे दिख रहे हैं। श्रीलंका के कोच गैरी कर्स्टन की भी उन्होंने प्रशंसा की और कहा कि 7 से 8 महीने में श्रीलंका बहुत खतरनाक टीम बन जाएगी। गौरतलब है कि कर्स्टन पाकिस्तान के हेड कोच भी रह चुके हैं, लेकिन वहाँ टिक नहीं सके। युवा बल्लेबाज़ सोनल दिनुषा को भी कनेरिया ने उज्ज्वल भविष्य वाला खिलाड़ी बताया।
कनेरिया ने अंत में कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट का दुनियाभर में मज़ाक बन रहा है, दर्शक मैच देखना छोड़ रहे हैं और इंग्लैंड में टीम को काउंटी स्तर से भी नीचे आँका जा रहा है। उनका मानना है कि जब तक चयन समिति और कोचिंग में योग्य और जवाबदेह लोग नहीं आते, स्थिति नहीं सुधरेगी।