लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान 194 रनों से हारा, लगातार 4 पारियों में 200 से कम — टेस्ट इतिहास में पहली बार
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान क्रिकेट टीम को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर 31 अगस्त को इंग्लैंड के हाथों 194 रनों की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। 389 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की पूरी टीम महज 194 रन बनाकर पवेलियन लौट गई। यह हार पाकिस्तान के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में एक शर्मनाक मील का पत्थर बन गई है — टीम पहली बार लगातार चार पारियों में 200 रनों का आँकड़ा पार करने में नाकाम रही है।
मुख्य घटनाक्रम
लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान महज 110 रन पर सिमट गया था। दूसरी पारी में भी टीम 194 रन से आगे नहीं जा सकी। इससे पहले लीड्स टेस्ट में पाकिस्तान ने पहली पारी में 171 और दूसरी पारी में 135 रन बनाए थे। यानी लगातार चार पारियों में — लीड्स की दोनों और लॉर्ड्स की दोनों — पाकिस्तान 200 रन की दहलीज भी नहीं लाँघ सका। गौरतलब है कि पाकिस्तान के टेस्ट इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान के बल्लेबाज दोनों पारियों में मिलाकर केवल 529 गेंदें ही खेल सके।
बल्लेबाज़ी का हाल
दूसरी पारी में सऊद शकील अकेले योद्धा की तरह डटे रहे और 97 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें कोई साथ नहीं मिला। कप्तान बाबर आज़म दोनों पारियों में बुरी तरह फ्लॉप रहे और कुल मिलाकर सिर्फ 14 रन ही बना सके। शान मसूद ने दूसरी पारी में 26 रन का योगदान दिया। पाकिस्तान के 6 बल्लेबाज दहाई का आँकड़ा भी नहीं छू सके।
इंग्लैंड की गेंदबाज़ी
इंग्लैंड की ओर से ओली रॉबिन्सन ने दोनों पारियों में मिलाकर कुल 8 विकेट झटककर मैच के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ का दर्जा हासिल किया। जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने भी प्रभावशाली गेंदबाज़ी करते हुए मैच में 5-5 विकेट अपने नाम किए।
SENA देशों में पाकिस्तान का निराशाजनक रिकॉर्ड
SENA (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों में 2018 से खेले 18 टेस्ट मैचों में यह पाकिस्तान की 16वीं हार है। टीम को इन परिस्थितियों में आखिरी जीत 2018 में मिली थी — यानी सात साल से भी अधिक समय से पाकिस्तान SENA देशों में जीत का स्वाद नहीं चख सका है।
आगे क्या
इस जीत के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। सीरीज़ का तीसरा और अंतिम टेस्ट अब पाकिस्तान के लिए महज इज्ज़त बचाने का मौका होगा। बल्लेबाज़ी क्रम की इस लगातार विफलता को देखते हुए टीम प्रबंधन पर रणनीति और चयन को लेकर गंभीर सवाल उठने तय हैं।