31 अगस्त 2026
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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र चुनाव: एबीवीपी के अंकित बिधान ने 500+ वोटों से जीता अध्यक्ष पद, लगातार दूसरी बार इतिहास रचा

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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र चुनाव: एबीवीपी के अंकित बिधान ने 500+ वोटों से जीता अध्यक्ष पद, लगातार दूसरी बार इतिहास रचा

सारांश

पंजाब विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने इतिहास रचा — लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर कब्जा। अंकित बिधान की 500+ वोटों की जीत, एसओआई के अंतिम समय के समर्थन और जेन-जी की लामबंदी से मिली। यह उत्तर भारत के परिसरों में एबीवीपी के बढ़ते प्रभाव का संकेत है।

मुख्य बातें

एबीवीपी के अंकित बिधान ने 31 अगस्त को पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद का अध्यक्ष पद 500 से अधिक वोटों के अंतर से जीता।
पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार शीर्ष पद हासिल किया।
मतदान से एक दिन पहले शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठन एसओआई ने एबीवीपी को समर्थन दिया।
चुनाव में 16,500 पात्र मतदाता थे, जिनमें 9,000 महिला मतदाता और एक ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल थे।
एक मतदान केंद्र पर छात्रों और पुलिस के बीच हाथापाई की खबरें आईं; छात्रों ने पर्याप्त समय न मिलने का विरोध किया।
पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर उपाध्यक्ष, निर्दलीय ध्यान सिंह सचिव और विशाल बामल संयुक्त सचिव चुने गए।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवार अंकित बिधान ने सोमवार, 31 अगस्त को पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद (पीयूसीएससी) के अध्यक्ष पद पर 500 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास में पहला मौका है जब एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार शीर्ष पद पर कब्जा किया है। चार-कोणीय मुकाबले में मिली इस जीत को बिधान ने 'पूरी जेन-जी की जीत' करार दिया।

मुख्य मुकाबला और परिणाम

अध्यक्ष पद के लिए सीधा मुकाबला कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू, आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थित एएसएपी के आदिल बीर सिंह, और 'साथ' के दर्शप्रीत सिंह के बीच था। चुनाव में कुल 16 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। अन्य पदों पर पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर ने उपाध्यक्ष का पद जीता, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार ध्यान सिंह और विशाल बामल ने क्रमशः सचिव और संयुक्त सचिव के पद हासिल किए।

एसओआई के समर्थन की भूमिका

मतदान से ठीक एक दिन पहले, शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) ने एबीवीपी उम्मीदवार को अपना समर्थन देने की घोषणा की। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस समर्थन ने अंतिम समय में मतदाताओं की राय को प्रभावित किया। गौरतलब है कि एसएडी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच पुराने गठबंधन की पृष्ठभूमि में यह समर्थन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नेताओं की प्रतिक्रिया

वरिष्ठ भाजपा नेता बी. एल. संतोष ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'एबीवीपी के अंकित बिधान ने पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट का चुनाव शानदार ढंग से जीता। यह लगातार दूसरी बार है। पिछले 48 घंटों में एसओआई ने भी एबीवीपी उम्मीदवार का समर्थन किया। इस शानदार जीत के लिए अंकित बिधान और एबीवीपी को बधाई।' विजेता बिधान ने कहा, 'यह सिर्फ मेरी जीत नहीं, बल्कि पूरी जेन-जी की जीत है।' उन्होंने यह भी कहा कि नतीजे दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एबीवीपी युवा पीढ़ी के दिलों में जगह रखते हैं।

मतदान प्रक्रिया और विवाद

इस चुनाव में लगभग 16,500 छात्र मतदान के पात्र थे, जिनमें 9,000 महिला मतदाता और एक ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल थे। पिछले वर्ष की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 344 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालाँकि, मतदान के दौरान कुछ छात्रों ने यह दावा करते हुए विरोध किया कि उन्हें वोट डालने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। एक मतदान केंद्र पर छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई की खबरें भी सामने आईं। एबीवीपी के निवर्तमान अध्यक्ष गौरव वीर सिंह सोहल ने बताया कि संगठन ने अधिकारियों से मतदान का समय बढ़ाने की माँग की थी और लंबे वीकेंड के कारण मतदाता उपस्थिति कम रहने की आशंका थी।

अन्य कॉलेजों के नतीजे और आगे की राह

जीजीडीएसडी कॉलेज, सेक्टर 32 में अभिराज सिंह और पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर 46 में परमिंदर सिंह ने अध्यक्ष पद जीते। यह जीत एबीवीपी के लिए उत्तर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। नवनिर्वाचित छात्र परिषद से अपेक्षा है कि वह शीघ्र ही विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ छात्र हितों के मुद्दों पर संवाद शुरू करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही विधानसभा स्तर पर दोनों अलग हो चुके हों। हाथापाई और मतदान समय को लेकर विरोध जैसी घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और समावेशी बनाने में सफल रहा। जीत का श्रेय 'जेन-जी' को देना एक चतुर राजनीतिक बयानबाजी है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि नवनिर्वाचित परिषद छात्रों की शैक्षणिक और रोजगार संबंधी माँगों पर कितनी प्रभावी ढंग से काम करती है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद चुनाव 2026 में कौन जीता?
एबीवीपी के उम्मीदवार अंकित बिधान ने 31 अगस्त को पीयूसीएससी अध्यक्ष पद का चुनाव 500 से अधिक वोटों के अंतर से जीता। यह पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास में एबीवीपी की लगातार दूसरी जीत है।
एसओआई ने एबीवीपी को समर्थन क्यों दिया?
शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) ने मतदान से एक दिन पहले एबीवीपी उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की। स्रोतों के अनुसार इसके पीछे की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन इसे अकाली-भाजपा की पुरानी राजनीतिक नजदीकी से जोड़कर देखा जा रहा है।
पीयूसीएससी चुनाव में अन्य पदों पर कौन जीता?
पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर ने उपाध्यक्ष पद जीता। निर्दलीय उम्मीदवार ध्यान सिंह सचिव और विशाल बामल संयुक्त सचिव चुने गए।
चुनाव के दौरान विवाद क्यों हुआ?
मतदान के दौरान कुछ छात्रों ने यह आरोप लगाते हुए विरोध किया कि उन्हें वोट डालने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। एक मतदान केंद्र पर छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई की खबरें भी आईं। एबीवीपी ने मतदान का समय बढ़ाने की माँग की थी।
इस चुनाव में कितने छात्र मतदाता थे और मतदाता संख्या में क्या बदलाव आया?
इस चुनाव में लगभग 16,500 छात्र मतदान के पात्र थे, जिनमें 9,000 महिला मतदाता और एक ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल थे। पिछले वर्ष की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 344 की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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