पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र चुनाव: एबीवीपी के अंकित बिधान ने 500+ वोटों से जीता अध्यक्ष पद, लगातार दूसरी बार इतिहास रचा
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवार अंकित बिधान ने सोमवार, 31 अगस्त को पंजाब विश्वविद्यालय छात्र परिषद (पीयूसीएससी) के अध्यक्ष पद पर 500 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास में पहला मौका है जब एबीवीपी ने लगातार दूसरी बार शीर्ष पद पर कब्जा किया है। चार-कोणीय मुकाबले में मिली इस जीत को बिधान ने 'पूरी जेन-जी की जीत' करार दिया।
मुख्य मुकाबला और परिणाम
अध्यक्ष पद के लिए सीधा मुकाबला कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू, आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थित एएसएपी के आदिल बीर सिंह, और 'साथ' के दर्शप्रीत सिंह के बीच था। चुनाव में कुल 16 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। अन्य पदों पर पीयूडीएफ के अरमान सिंह भिंडर ने उपाध्यक्ष का पद जीता, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार ध्यान सिंह और विशाल बामल ने क्रमशः सचिव और संयुक्त सचिव के पद हासिल किए।
एसओआई के समर्थन की भूमिका
मतदान से ठीक एक दिन पहले, शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) ने एबीवीपी उम्मीदवार को अपना समर्थन देने की घोषणा की। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस समर्थन ने अंतिम समय में मतदाताओं की राय को प्रभावित किया। गौरतलब है कि एसएडी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच पुराने गठबंधन की पृष्ठभूमि में यह समर्थन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ भाजपा नेता बी. एल. संतोष ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'एबीवीपी के अंकित बिधान ने पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट का चुनाव शानदार ढंग से जीता। यह लगातार दूसरी बार है। पिछले 48 घंटों में एसओआई ने भी एबीवीपी उम्मीदवार का समर्थन किया। इस शानदार जीत के लिए अंकित बिधान और एबीवीपी को बधाई।' विजेता बिधान ने कहा, 'यह सिर्फ मेरी जीत नहीं, बल्कि पूरी जेन-जी की जीत है।' उन्होंने यह भी कहा कि नतीजे दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एबीवीपी युवा पीढ़ी के दिलों में जगह रखते हैं।
मतदान प्रक्रिया और विवाद
इस चुनाव में लगभग 16,500 छात्र मतदान के पात्र थे, जिनमें 9,000 महिला मतदाता और एक ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल थे। पिछले वर्ष की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 344 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालाँकि, मतदान के दौरान कुछ छात्रों ने यह दावा करते हुए विरोध किया कि उन्हें वोट डालने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। एक मतदान केंद्र पर छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई की खबरें भी सामने आईं। एबीवीपी के निवर्तमान अध्यक्ष गौरव वीर सिंह सोहल ने बताया कि संगठन ने अधिकारियों से मतदान का समय बढ़ाने की माँग की थी और लंबे वीकेंड के कारण मतदाता उपस्थिति कम रहने की आशंका थी।
अन्य कॉलेजों के नतीजे और आगे की राह
जीजीडीएसडी कॉलेज, सेक्टर 32 में अभिराज सिंह और पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर 46 में परमिंदर सिंह ने अध्यक्ष पद जीते। यह जीत एबीवीपी के लिए उत्तर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। नवनिर्वाचित छात्र परिषद से अपेक्षा है कि वह शीघ्र ही विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ छात्र हितों के मुद्दों पर संवाद शुरू करेगी।