बांकुरा पुलिस ने ₹72 करोड़ के साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया, रानीबांध से 7 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिला पुलिस ने सोमवार, 31 अगस्त को जिले के घने जंगलों से घिरे रानीबांध इलाके में संचालित एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। प्रारंभिक जाँच के अनुसार इस रैकेट में शामिल कुल रकम लगभग ₹72 करोड़ आँकी गई है और इस सिलसिले में 7 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
जिला पुलिस अधीक्षक वीजी सतीश ने मीडिया को बताया कि रानीबांध को हाल ही में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cybercrime Reporting Portal) द्वारा साइबर अपराध के एक संभावित हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया था। इसके बाद बांकुरा पुलिस ने आधुनिक तकनीकों की मदद से क्षेत्र में निगरानी तेज़ कर दी।
सतीश ने कहा, 'हमारे अधिकारी अभी इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं के बारे में जानकारी पाने के लिए पूछताछ कर रहे हैं।'
जाँच की तकनीक और तरीका
पुलिस अधीक्षक के अनुसार संदिग्धों की सूची तैयार करने के लिए अधिकारियों ने चार प्रमुख तकनीकों का उपयोग किया — डेटा एनालिटिक्स, अकाउंट ट्रेसिंग, ट्रांजैक्शन ट्रेल का विश्लेषण और क्रिमिनल लिंकेज मैपिंग।
जाँचकर्ताओं ने उन बैंक खातों से धनराशि के प्रवाह का पता लगाया जिनमें पीड़ितों का पैसा जमा हुआ था। इसके बाद हुए ट्रांसफर की जाँच की गई और पैसे जमा करने व निकालने के बीच के समय-अंतर का विश्लेषण किया गया। सतीश ने कहा, 'ये सभी महत्वपूर्ण सुराग साबित हुए।' उन एटीएम की भी सूची तैयार की गई जिनका बार-बार नकद निकासी के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
गिरफ्तार किए गए सात लोगों में पिंटू मंडी, अर्शल सोरेन, देबब्रत पाल, सोवन सोरेन, दिब्येंदु मलिक, अविनाश मंडी और दीपक सरदार शामिल हैं। इनमें से देबब्रत पाल पड़ोसी राज्य ओडिशा के बालासोर का निवासी है।
पुलिस ने इनके पास से 34 बैंक पासबुक, 13 एटीएम कार्ड, 9 चेकबुक के साथ-साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड और ईपीआईसी कार्ड भी जब्त किए हैं। जाँचकर्ताओं का मानना है कि ये गिरफ्तार व्यक्ति देशभर में फैले एक बड़े नेटवर्क के छोटे ऑपरेटर हैं।
व्यापक संदर्भ: बंगाल में बढ़ता साइबर अपराध
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कोलकाता पुलिस के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वीकार किया था कि साइबर अपराध की घटनाएँ बढ़ रही हैं और कई पीड़ितों की जीवन-भर की बचत डूब रही है।
गौरतलब है कि जुलाई में कोलकाता पुलिस ने 60 पुलिस स्टेशनों के अंतर्गत 120 स्थानों पर एक महीने का साइबर जागरूकता अभियान चलाया था, जिसका उद्देश्य नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति सचेत करना था।
आगे की जाँच
पुलिस अधीक्षक सतीश ने स्पष्ट किया कि पूछताछ अभी जारी है और रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुँचना प्राथमिकता है। यह मामला राज्य में साइबर अपराध के भूगोल को समझने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है — रानीबांध जैसे दूरदराज़ और वन-क्षेत्रों का साइबर ठगी के अड्डों के रूप में उभरना एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।