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बर्दवान साइबर धोखाधड़ी: ₹6.70 लाख की ठगी में चार गिरफ्तार, 28 संदिग्ध बैंक खाते जब्त

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बर्दवान साइबर धोखाधड़ी: ₹6.70 लाख की ठगी में चार गिरफ्तार, 28 संदिग्ध बैंक खाते जब्त

सारांश

पूर्वी बर्दवान में साइबर पुलिस ने चार आरोपियों को दबोचा — 28 संदिग्ध खाते, 60 से अधिक ठगी के मामले और 268 फर्जी मोबाइल नंबरों का जाल। डिजिटल अरेस्ट और निवेश धोखाधड़ी के हथकंडे अपनाने वाले इस गिरोह की जड़ें और गहरी हो सकती हैं।

मुख्य बातें

बर्दवान साइबर पुलिस ने 27 अगस्त 2026 को चार साइबर जालसाजों — बिजोय देबनाथ, शिवम बिस्वास, तरुणजीत देबनाथ और शुभो बाला — को गिरफ्तार किया।
जांच में 28 संदिग्ध बैंक खाते मिले, जिनमें कथित तौर पर ₹6,70,000 की ठगी की रकम जमा थी।
ये खाते 60 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े पाए गए हैं।
जांच में 6 POS एजेंट और 268 संदिग्ध मोबाइल नंबर भी सामने आए; नकली दस्तावेजों पर सिम कार्ड जारी किए जाते थे।
ठगी के लिए डिजिटल अरेस्ट , कॉल, एसएमएस और निवेश धोखाधड़ी जैसे हथकंडे अपनाए जाते थे।

पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले में बर्दवान साइबर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बुधवार, 27 अगस्त 2026 को साइबर धोखाधड़ी के ज़रिए आम लोगों से लाखों रुपए ठगने के आरोप में चार जालसाजों को गिरफ्तार किया। जांच में 28 संदिग्ध बैंक खाते सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर ₹6,70,000 की धोखाधड़ी की रकम जमा की गई थी।

मुख्य घटनाक्रम

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि ये गिरफ्तारियां राज्य साइबर अपराध विभाग से मिली विशेष सूचना के आधार पर की गईं। राज्य के साइबर अपराध अधिकारियों ने बर्दवान साइबर पुलिस स्टेशन को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें नादानघाट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के समुद्रगढ़ स्थित नसरातपुर की एक सरकारी बैंक की रेल बाजार शाखा के कुछ खातों में संदिग्ध लेनदेन का उल्लेख था।

पुलिस ने स्वयं संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है।

आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए चार लोगों की पहचान बिजोय देबनाथ, शिवम बिस्वास, तरुणजीत देबनाथ और शुभो बाला के रूप में हुई है। ये सभी पूर्वी बर्दवान जिले के नादानघाट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के चंपाहाटी और हाटशिमाला इलाकों के निवासी हैं।

धोखाधड़ी का तरीका

जांच से पता चला है कि इस गिरोह से जुड़े 28 बैंक खाते देशभर में 60 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों से संबंधित हैं। जांच में 6 पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंटों के नाम भी सामने आए हैं, जो कथित तौर पर नकली दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे।

अधिकारियों के अनुसार, इन फर्जी सिम कार्डों का उपयोग कॉल, एसएमएस, निवेश धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के ज़रिए साइबर ठगी के लिए किया जाता था। इसके अलावा जांचकर्ताओं को 268 संदिग्ध मोबाइल नंबर भी मिले हैं।

जांच की स्थिति

जांच अधिकारी अभी यह पता लगाने में जुटे हैं कि संदिग्ध बैंक खाते किसके नाम पर खोले गए थे, धोखाधड़ी की रकम कहां खपाई गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में डिजिटल ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

आगे क्या होगा

पुलिस सूत्रों के अनुसार, POS एजेंटों और अन्य संदिग्धों की पहचान के बाद आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों में हुए लेनदेन की पूरी श्रृंखला को उजागर करने में लगी हैं ताकि ठगी के असली लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

फर्जी बैंक खातों और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए हथकंडों पर टिका है। ₹6.70 लाख की पुष्टि की गई रकम छोटी लग सकती है, लेकिन 60 से अधिक मामलों से जुड़े 28 खाते यह संकेत देते हैं कि वास्तविक नुकसान कहीं अधिक हो सकता है। असली सवाल यह है कि POS एजेंट और सिम कार्ड आपूर्तिकर्ता इतने समय तक कैसे बचते रहे — और क्या दूरसंचार नियामक इस खामी को बंद करने के लिए पर्याप्त सक्रिय हैं।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बर्दवान साइबर धोखाधड़ी मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने बिजोय देबनाथ, शिवम बिस्वास, तरुणजीत देबनाथ और शुभो बाला को गिरफ्तार किया है। ये सभी पूर्वी बर्दवान जिले के नादानघाट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के चंपाहाटी और हाटशिमाला इलाकों के रहने वाले हैं।
इस साइबर धोखाधड़ी में कितनी रकम का घोटाला हुआ?
जांच अधिकारियों के अनुसार, 28 संदिग्ध बैंक खातों में साइबर धोखाधड़ी के ज़रिए करीब ₹6,70,000 जमा किए गए थे। ये खाते 60 से अधिक साइबर ठगी के मामलों से जुड़े पाए गए हैं।
इस गिरोह ने ठगी के लिए क्या तरीके अपनाए?
गिरोह ने नकली दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए फर्जी सिम कार्डों का उपयोग कर कॉल, एसएमएस, निवेश धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे हथकंडों से लोगों को ठगा। जांच में 6 POS एजेंट और 268 संदिग्ध मोबाइल नंबर भी सामने आए हैं।
जांच में अब तक क्या सामने आया है?
जांच अधिकारियों को 28 संदिग्ध बैंक खाते और 268 संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि खाते किसके नाम पर खोले गए, रकम कहां गई और इस नेटवर्क में और कौन शामिल हैं।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, POS एजेंटों और अन्य संदिग्धों की पहचान के बाद आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। राज्य साइबर अपराध विभाग और बर्दवान साइबर पुलिस मिलकर पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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