बर्दवान साइबर धोखाधड़ी: ₹6.70 लाख की ठगी में चार गिरफ्तार, 28 संदिग्ध बैंक खाते जब्त
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले में बर्दवान साइबर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बुधवार, 27 अगस्त 2026 को साइबर धोखाधड़ी के ज़रिए आम लोगों से लाखों रुपए ठगने के आरोप में चार जालसाजों को गिरफ्तार किया। जांच में 28 संदिग्ध बैंक खाते सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर ₹6,70,000 की धोखाधड़ी की रकम जमा की गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि ये गिरफ्तारियां राज्य साइबर अपराध विभाग से मिली विशेष सूचना के आधार पर की गईं। राज्य के साइबर अपराध अधिकारियों ने बर्दवान साइबर पुलिस स्टेशन को एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें नादानघाट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के समुद्रगढ़ स्थित नसरातपुर की एक सरकारी बैंक की रेल बाजार शाखा के कुछ खातों में संदिग्ध लेनदेन का उल्लेख था।
पुलिस ने स्वयं संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है।
आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार किए गए चार लोगों की पहचान बिजोय देबनाथ, शिवम बिस्वास, तरुणजीत देबनाथ और शुभो बाला के रूप में हुई है। ये सभी पूर्वी बर्दवान जिले के नादानघाट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के चंपाहाटी और हाटशिमाला इलाकों के निवासी हैं।
धोखाधड़ी का तरीका
जांच से पता चला है कि इस गिरोह से जुड़े 28 बैंक खाते देशभर में 60 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों से संबंधित हैं। जांच में 6 पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंटों के नाम भी सामने आए हैं, जो कथित तौर पर नकली दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे।
अधिकारियों के अनुसार, इन फर्जी सिम कार्डों का उपयोग कॉल, एसएमएस, निवेश धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के ज़रिए साइबर ठगी के लिए किया जाता था। इसके अलावा जांचकर्ताओं को 268 संदिग्ध मोबाइल नंबर भी मिले हैं।
जांच की स्थिति
जांच अधिकारी अभी यह पता लगाने में जुटे हैं कि संदिग्ध बैंक खाते किसके नाम पर खोले गए थे, धोखाधड़ी की रकम कहां खपाई गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में डिजिटल ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, POS एजेंटों और अन्य संदिग्धों की पहचान के बाद आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों में हुए लेनदेन की पूरी श्रृंखला को उजागर करने में लगी हैं ताकि ठगी के असली लाभार्थियों तक पहुंचा जा सके।