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सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी प्रदर्शनकारियों की एफआईआर रद्द की, नड्डा बोले — BJP राज्यों में भी मामले वापस होंगे

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सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी प्रदर्शनकारियों की एफआईआर रद्द की, नड्डा बोले — BJP राज्यों में भी मामले वापस होंगे

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर नीट-यूजी प्रदर्शनकारियों पर 5 राज्यों में दर्ज एफआईआर रद्द कर दीं। BJP अध्यक्ष नड्डा ने कहा — 25 जुलाई का वादा पूरा हो रहा है और BJP शासित राज्यों में भी मामले वापस होंगे। CJP ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2026 को अनुच्छेद 142 के तहत दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में नीट-यूजी प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द कीं।
नड्डा ने कहा कि BJP शासित राज्यों में भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे।
अदालत ने दिल्ली पुलिस को फेशियल रिकग्निशन तकनीक से चिह्नित 2,873 कथित अपराधियों के विरुद्ध अलग एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी।
प्रभावित परिवारों को 90 दिनों के भीतर मुआवज़ा सीधे बैंक खातों में देने का सरकारी आश्वासन अदालत के आदेश का हिस्सा बना।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने की घोषणा की।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में देशभर में उतरे छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह निर्देश जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: क्या कहा अदालत ने

अदालत ने पाँच राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज आपराधिक मामलों को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों को आपराधिक कार्यवाही का सामना नहीं करना चाहिए। साथ ही, दिल्ली पुलिस को फेशियल रिकग्निशन तकनीक के ज़रिए चिह्नित 2,873 कथित आपराधिक इतिहास वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अलग से नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई।

अदालत ने प्रभावित परिवारों को 90 दिनों के भीतर सम्मानजनक मुआवज़ा सीधे बैंक खातों में जमा करने के सरकार के आश्वासन को भी अपने आदेश का हिस्सा बनाया।

नड्डा का बयान: सरकार ने वादा निभाया

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार छात्रों से किया गया वादा पूरा कर रही है। उन्होंने बताया, '25 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और मैंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी। इसी क्रम में भाजपा शासित राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की गई और अब हम उस आश्वासन को पूरा कर रहे हैं।'

नड्डा ने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि युवाओं की प्रगति और विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने वापस लिया मार्च

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने घोषणा की कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का निर्णय किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया।

सौरव दास ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन तकनीक के आधार पर दावा किया था कि प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे। उनके अनुसार, यदि ऐसे लोग वास्तव में वहाँ थे, तो उनके विरुद्ध अलग से जाँच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए — न कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों को निशाना बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस फैसले के लिए अदालत, दोनों पक्षों के वकीलों और सॉलिसिटर जनरल का आभार व्यक्त किया।

पृष्ठभूमि: नीट-यूजी विवाद और छात्र आंदोलन

गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों ने व्यापक प्रदर्शन किए थे, जिनमें हज़ारों की संख्या में विद्यार्थी सड़कों पर उतरे थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई राज्यों में छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिससे उनके भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। यह ऐसे समय में आया है जब चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या होगा

भाजपा शासित राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले अब वापस लिए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। मुआवज़ा राशि 90 दिनों के भीतर सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। फेशियल रिकग्निशन तकनीक से चिह्नित 2,873 व्यक्तियों के विरुद्ध अलग जाँच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक गहरे सवाल को अनुत्तरित छोड़ता है — नीट-यूजी पेपर लीक की जड़ तक जाँच कहाँ पहुँची? एफआईआर रद्द करना और मुआवज़े का आश्वासन प्रक्रियागत न्याय है, पर जब तक लीक के असली ज़िम्मेदार जवाबदेह नहीं होते, तब तक यह राहत अधूरी है। फेशियल रिकग्निशन तकनीक के ज़रिए 2,873 'अपराधियों' की पहचान का दावा भी जाँच का विषय है — यह तकनीक भारत में पहले भी विवादास्पद रही है और गलत पहचान के मामले सामने आ चुके हैं। सरकार के 'वादा निभाने' की कथा के बीच यह प्रश्न बना रहेगा कि चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं की संस्थागत विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस सुधार कब आएंगे।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी प्रदर्शनकारियों की एफआईआर क्यों रद्द की?
सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया, यह मानते हुए कि नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों पर आपराधिक मामले दर्ज करना उचित नहीं था। दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज एफआईआर निरस्त की गईं।
BJP शासित राज्यों में नीट प्रदर्शनकारियों के मामले कब वापस होंगे?
BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने 1 सितंबर 2026 को घोषणा की कि भाजपा शासित राज्यों में भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर छात्र प्रतिनिधियों से किए गए वादे के अनुसार यह कदम उठाया जा रहा है।
फेशियल रिकग्निशन तकनीक से चिह्नित 2,873 लोगों का क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को फेशियल रिकग्निशन तकनीक के ज़रिए चिह्नित 2,873 कथित आपराधिक इतिहास वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अलग से नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ अलग जाँच होनी चाहिए, न कि छात्रों को निशाना बनाया जाए।
प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा कब मिलेगा?
सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया है कि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक मुआवज़ा 90 दिनों के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा। अदालत ने इस आश्वासन को अपने आदेश का हिस्सा बनाया है।
5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च क्यों वापस लिया गया?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने घोषणा की कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लिया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया।
राष्ट्र प्रेस
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