सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी प्रदर्शनकारियों की एफआईआर रद्द की, नड्डा बोले — BJP राज्यों में भी मामले वापस होंगे
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में देशभर में उतरे छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह निर्देश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: क्या कहा अदालत ने
अदालत ने पाँच राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज आपराधिक मामलों को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों को आपराधिक कार्यवाही का सामना नहीं करना चाहिए। साथ ही, दिल्ली पुलिस को फेशियल रिकग्निशन तकनीक के ज़रिए चिह्नित 2,873 कथित आपराधिक इतिहास वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अलग से नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई।
अदालत ने प्रभावित परिवारों को 90 दिनों के भीतर सम्मानजनक मुआवज़ा सीधे बैंक खातों में जमा करने के सरकार के आश्वासन को भी अपने आदेश का हिस्सा बनाया।
नड्डा का बयान: सरकार ने वादा निभाया
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार छात्रों से किया गया वादा पूरा कर रही है। उन्होंने बताया, '25 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और मैंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी। इसी क्रम में भाजपा शासित राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की गई और अब हम उस आश्वासन को पूरा कर रहे हैं।'
नड्डा ने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि युवाओं की प्रगति और विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने वापस लिया मार्च
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने घोषणा की कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का निर्णय किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया।
सौरव दास ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन तकनीक के आधार पर दावा किया था कि प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे। उनके अनुसार, यदि ऐसे लोग वास्तव में वहाँ थे, तो उनके विरुद्ध अलग से जाँच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए — न कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों को निशाना बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इस फैसले के लिए अदालत, दोनों पक्षों के वकीलों और सॉलिसिटर जनरल का आभार व्यक्त किया।
पृष्ठभूमि: नीट-यूजी विवाद और छात्र आंदोलन
गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों ने व्यापक प्रदर्शन किए थे, जिनमें हज़ारों की संख्या में विद्यार्थी सड़कों पर उतरे थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कई राज्यों में छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिससे उनके भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। यह ऐसे समय में आया है जब चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा
भाजपा शासित राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले अब वापस लिए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। मुआवज़ा राशि 90 दिनों के भीतर सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। फेशियल रिकग्निशन तकनीक से चिह्नित 2,873 व्यक्तियों के विरुद्ध अलग जाँच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।