13 अगस्त 2026
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नीट आंदोलनकारियों पर दर्ज 12-13 FIR वापस लेगी महाराष्ट्र सरकार, 900 से अधिक छात्रों को राहत

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नीट आंदोलनकारियों पर दर्ज 12-13 FIR वापस लेगी महाराष्ट्र सरकार, 900 से अधिक छात्रों को राहत

सारांश

नीट पेपर लीक के विरोध में उतरे 900 से अधिक छात्रों और प्रदर्शनकारियों को महाराष्ट्र सरकार ने बड़ी राहत दी है — मुंबई के पाँच थानों में दर्ज 12-13 FIR वापस लेने का आदेश जारी हुआ और मामले वापसी की समय-सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई गई।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर महाराष्ट्र के गृह विभाग ने नीट आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने का आदेश जारी किया।
मुंबई के वर्ली, दादर, सायन, माहिम और शिवाजी पार्क थानों में दर्ज 12-13 एफआईआर वापस ली जाएंगी।
900 से अधिक छात्रों और प्रदर्शनकारियों के नाम इन मामलों में दर्ज थे, जिन पर BNSS के तहत जमानती धाराएं लगाई गई थीं।
मामले वापसी की समय-सीमा 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 की गई।
फडणवीस ने गृह विभाग को यह निर्देश 28 जुलाई 2026 को दिया था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और आंदोलनकारियों पर दर्ज आपराधिक मामले वापस लेने का औपचारिक निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मुंबई के वर्ली, दादर, सायन, माहिम और शिवाजी पार्क सहित विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज 12 से 13 एफआईआर को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इस निर्णय से 900 से अधिक छात्रों और प्रदर्शनकारियों को सीधी राहत मिलेगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 28 जुलाई 2026 को ही गृह विभाग को निर्देश दिया था कि नीट परीक्षा से जुड़े आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएं। इसके बाद गृह विभाग ने औपचारिक आदेश जारी किया और मामले वापसी की प्रक्रिया को आधिकारिक रूप दिया गया।

सरकार ने इस फैसले के दायरे में आने वाले मामलों के लिए समय-सीमा को 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया है, जिससे अधिक-से-अधिक प्रभावित छात्र इस राहत का लाभ उठा सकें।

किन धाराओं में दर्ज थे मामले

मुंबई पुलिस ने कथित अनियमितताओं के खिलाफ बिना अनुमति के किए गए प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में छात्रों पर अवैध जमावड़े और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसी जमानती धाराओं में मामले दर्ज किए थे। इनमें से सैकड़ों को व्हाट्सऐप के माध्यम से नोटिस भेजकर जांच अधिकारियों के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था।

सरकार की प्रतिक्रिया और नीति

यह कदम अन्य राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की तर्ज पर उठाया गया है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के कारण दर्ज मामलों का नकारात्मक प्रभाव युवा अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के समर्थन में महाराष्ट्र में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे।

आम जनता और छात्रों पर असर

इस निर्णय से वे सभी छात्र और प्रदर्शनकारी राहत पाएंगे जिनके नाम इन 12-13 एफआईआर में दर्ज हैं। विशेष रूप से वे युवा अभ्यर्थी, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, अब आपराधिक मामले के बोझ से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

क्या होगा आगे

गृह विभाग के आदेश के बाद संबंधित पुलिस थानों को मामले वापसी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। 31 मार्च 2027 तक की विस्तारित समय-सीमा यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी पात्र प्रदर्शनकारी इस राहत से वंचित न रहे। नीट परीक्षा सुधार की व्यापक माँग अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर विचाराधीन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने नीट आंदोलनकारियों पर दर्ज केस क्यों वापस लिए?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के कारण दर्ज मामलों का असर युवा अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य पर न पड़े। गृह विभाग ने इस आशय का आधिकारिक आदेश जारी किया है।
कितने छात्रों और प्रदर्शनकारियों को इस फैसले से राहत मिलेगी?
900 से अधिक छात्रों और प्रदर्शनकारियों के नाम इन मामलों में दर्ज थे। मुंबई के वर्ली, दादर, सायन, माहिम और शिवाजी पार्क थानों में दर्ज 12 से 13 एफआईआर वापस ली जाएंगी।
नीट आंदोलनकारियों पर किन धाराओं में केस दर्ज थे?
मुंबई पुलिस ने अवैध जमावड़े और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसी जमानती धाराओं में मामले दर्ज किए थे। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सऐप के जरिए नोटिस भेजकर जांच अधिकारियों के समक्ष पेश होने को कहा गया था।
मामले वापसी की समय-सीमा क्या है?
सरकार ने मामले वापसी की समय-सीमा 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी है, ताकि सभी पात्र प्रदर्शनकारी इस राहत का लाभ उठा सकें।
क्या अन्य राज्यों ने भी नीट आंदोलनकारियों के केस वापस लिए हैं?
महाराष्ट्र ने यह कदम अन्य राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की तर्ज पर उठाया है, हालांकि स्रोत में किसी विशेष राज्य का नाम नहीं दिया गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर नीट विरोध आंदोलन के व्यापक संदर्भ में लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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