नीट पेपर लीक विरोध: कांग्रेस ने मांगी 500-700 हिरासती छात्रों की तत्काल रिहाई, एफआईआर वापसी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने 23 जुलाई 2026 को पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते और मुंबई पुलिस आयुक्त को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा, जिसमें नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 500 से 700 छात्रों को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने पर गहरी आपत्ति जताई गई। पार्टी का आरोप है कि 20 जुलाई से 22 जुलाई 2026 के बीच मुंबई के मेट्रो स्टेशनों, सार्वजनिक सड़कों और यहाँ तक कि छात्रों के घरों से उन्हें उठाया गया — जबकि उनमें से कई विरोध-स्थल तक पहुँचे भी नहीं थे।
मुख्य माँगें
एमपीसीसी ने ज्ञापन में चार स्पष्ट माँगें रखी हैं। पहली — हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए। दूसरी — 20 से 22 जुलाई 2026 के बीच दर्ज की गई सभी एफआईआर, जिन्हें पार्टी 'मनगढ़ंत और बदले की भावना से प्रेरित' बता रही है, पूरी तरह वापस ली जाएँ। तीसरी — बिना अदालती आदेश के मोबाइल फोन की तलाशी लेने और घरों में हिरासत में रखने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जाँच हो और उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। चौथी — छात्रों और उनके परिवारों को डराने-धमकाने पर सख्त रोक लगाई जाए।
पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप
एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, पूर्व मंत्री नसीम खान, विधायक भाई जगताप और पार्टी पदाधिकारी धनंजय शिंदे ने संयुक्त रूप से यह ज्ञापन प्रस्तुत किया। उनका कहना है कि हिरासत में लिए गए युवाओं की उम्र 16 से 30 वर्ष के बीच है, जिनमें नाबालिग और युवतियाँ भी शामिल हैं। ज्ञापन के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को मुंबई में न कर्फ्यू था और न ही धारा 144 लागू थी — फिर भी पुलिस ने महज़ संदेह के आधार पर कार्रवाई की।
आरोप है कि शिवाजी पार्क, धारावी, माहिम, जुहू, चेंबूर और दादर सहित कई पुलिस थानों में झूठी एफआईआर दर्ज की गईं। पार्टी का दावा है कि 200 से 300 छात्र अभी भी इन थानों में हिरासत में हैं।
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी अदालती अनुमति के छात्रों के निजी मोबाइल फोन की जबरदस्ती जाँच की और उन्हें अपनी 'लाइव लोकेशन' साझा करने पर मजबूर किया। कांग्रेस के अनुसार, यह संविधान प्रदत्त निजता के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है। पार्टी ने यह भी चेतावनी दी कि इन एफआईआर का असर संबंधित युवाओं की उच्च शिक्षा, रोज़गार और विदेश यात्रा की संभावनाओं पर दीर्घकालिक रूप से पड़ सकता है।
कांग्रेस की चेतावनी
सपकाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र में कानून का शासन चलता है और पुलिस की मनमानी बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'अगर प्रशासन ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो कांग्रेस पार्टी मजबूती से छात्रों के साथ खड़ी होगी और पूरे राज्य में जबरदस्त आंदोलन शुरू करेगी।' ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन संविधान द्वारा गारंटीशुदा मौलिक अधिकार है और छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार अस्वीकार्य है।
आगे क्या
यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्र आक्रोश चरम पर है और कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी परीक्षा घोटाले के विरोध में छात्रों की सामूहिक हिरासत पर सवाल उठे हों। कांग्रेस के ज्ञापन के बाद अब सभी की निगाहें पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस आयुक्त की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।