24 जुलाई 2026
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नीट पेपर लीक: कांग्रेस ने छात्रों के लिए हेल्पलाइन शुरू की, हर्षवर्धन सपकाल ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा

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नीट पेपर लीक: कांग्रेस ने छात्रों के लिए हेल्पलाइन शुरू की, हर्षवर्धन सपकाल ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा

सारांश

नीट पेपर लीक विवाद में महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए वकीलों और डॉक्टरों सहित एक हेल्पलाइन शुरू की है। साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और PM मोदी से सीधे छात्रों से संवाद की माँग उठाई है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 24 जुलाई को नीट आंदोलन में फँसे छात्रों के लिए हेल्पलाइन की घोषणा की।
हेल्पलाइन में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वकील और डॉक्टर भी जुड़े हैं।
सपकाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की माँग दोहराई।
शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे भी छात्रों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।
महाराष्ट्र में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस हिरासत में लिया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधार और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 24 जुलाई को नीट पेपर लीक विवाद में प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में एक हेल्पलाइन की घोषणा की, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ वकील और डॉक्टर भी उपलब्ध रहेंगे। मुंबई से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक जारी इस आंदोलन के बीच विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ा दिया है।

कांग्रेस की हेल्पलाइन: क्या है व्यवस्था

सपकाल ने कहा, 'पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस कमेटी ने छात्रों की सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू की है, जिसमें पार्टी की टीम के साथ वकील और डॉक्टर भी जुड़े हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस कार्यकर्ता छात्रों की मदद के लिए मौके पर पहुँचेंगे।

यह हेल्पलाइन विशेष रूप से उन छात्रों के लिए है जिन्हें महाराष्ट्र में विभिन्न स्थानों पर पुलिस हिरासत का सामना करना पड़ रहा है। सपकाल ने यह भी कहा कि यदि किसी छात्र को हिरासत में लिया जाता है, तो पार्टी कार्यकर्ता तुरंत सहायता के लिए पहुँचेंगे।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग

सपकाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को दोहराते हुए कहा, 'नीट विवाद में छात्रों के साथ जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को जवाब देना होगा। शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।'

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे सीधे छात्रों से संवाद करें। उनका तर्क था कि युवाओं ने ही सरकार को समर्थन दिया है, इसलिए उनकी समस्याओं और माँगों को सुनना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

शिवसेना (यूबीटी) और ठाकरे बंधुओं का समर्थन

शिवसेना (यूबीटी) के एक नेता ने बताया कि उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे लगातार छात्रों के मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'छात्र अपने भविष्य को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और विपक्षी दल उनकी आवाज को समर्थन दे रहे हैं।'

सपकाल ने स्वीकार किया कि ठाकरे बंधुओं सहित कई संगठन अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सभी का मूल मुद्दा एक ही है — छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता।

आम जनता और छात्रों पर असर

नीट पेपर लीक विवाद ने लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगाया है। महाराष्ट्र में कई स्थानों पर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है।

गौरतलब है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रही — विपक्षी दल इसे एक व्यापक राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रहे हैं।

केंद्र सरकार का रुख

केंद्र सरकार ने कथित तौर पर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। हालाँकि, विपक्ष का आरोप है कि अब तक की गई कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना महज आश्वासन से छात्रों का भरोसा नहीं जीता जा सकता।

नीट विवाद के राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों आयामों को देखते हुए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष इस आंदोलन को ठोस नीतिगत बदलाव तक ले जा पाएगा या यह महज चुनावी लामबंदी बनकर रह जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग नई नहीं है — यह माँग तब से उठ रही है जब से पेपर लीक के आरोप सामने आए, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। यह भी उल्लेखनीय है कि ठाकरे बंधुओं का एक साथ इस आंदोलन में उतरना महाराष्ट्र की जटिल राजनीति में एक असामान्य एकता का संकेत देता है। परीक्षा व्यवस्था की खामियों पर बहस जरूरी है, पर उसे राजनीतिक अखाड़े में बदलने से छात्रों के हितों की रक्षा कम, वोट-बैंक की राजनीति ज्यादा होती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस की नीट हेल्पलाइन में क्या सुविधाएँ मिलेंगी?
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के अनुसार, इस हेल्पलाइन में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वकील और डॉक्टर भी उपलब्ध रहेंगे। यदि किसी छात्र को पुलिस हिरासत में लिया जाता है, तो कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुँचकर सहायता करेंगे।
नीट पेपर लीक विवाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग क्यों उठ रही है?
विपक्षी दलों का तर्क है कि नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटना शिक्षा मंत्रालय की प्रशासनिक विफलता है, इसलिए मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। सपकाल ने कहा कि परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों का जवाब सरकार को देना होगा।
महाराष्ट्र में नीट आंदोलन की स्थिति क्या है?
महाराष्ट्र के कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस हिरासत में लिया जा रहा है, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) सहित कई विपक्षी दल छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरे हैं।
ठाकरे बंधु नीट आंदोलन में किस भूमिका में हैं?
शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे, तथा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे — तीनों छात्रों के मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं। सपकाल के अनुसार, सभी संगठन अलग-अलग तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनका साझा लक्ष्य छात्रों के हितों की रक्षा करना है।
केंद्र सरकार ने नीट विवाद पर क्या रुख अपनाया है?
केंद्र सरकार ने कथित तौर पर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। हालाँकि विपक्ष का कहना है कि अब तक की कार्रवाई अपर्याप्त है और पारदर्शी जवाबदेही तंत्र के बिना आश्वासन पर्याप्त नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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