नीट पेपर लीक प्रदर्शन: महाराष्ट्र सरकार ने 900 से अधिक छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले 900 से अधिक छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। गृह विभाग द्वारा जारी इस आदेश के तहत मुंबई के विभिन्न थानों में दर्ज 12 से 13 एफआईआर वापस ली जाएंगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 28 जुलाई को दिए गए निर्देश के बाद औपचारिक रूप ले चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
गृह विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के समर्थन में महाराष्ट्र में किए गए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित सभी मामले वापस लिए जाएंगे। सरकार ने इन मामलों के लिए पात्रता की समय-सीमा 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी है, जिससे अधिकतम प्रभावित छात्र इस राहत का लाभ उठा सकें।
मुंबई पुलिस ने वर्ली, दादर, सायन, माहिम और शिवाजी पार्क सहित विभिन्न पुलिस थानों में छात्रों के विरुद्ध मामले दर्ज किए थे। इन मामलों में अवैध जमावड़े और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसी जमानती धाराएं शामिल थीं।
छात्रों पर क्या थे आरोप
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध बिना अनुमति के प्रदर्शन करने के आरोप में 900 से अधिक लोगों के नाम दर्ज किए गए थे या उन पर जमानती धाराओं के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सऐप के माध्यम से नोटिस भेजकर जांच अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 28 जुलाई को ही गृह विभाग को यह निर्देश दे दिया था कि नीट आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएं। गौरतलब है कि यह कदम अन्य राज्यों द्वारा इसी तरह के प्रदर्शनकारियों को दी गई राहत की तर्ज पर उठाया गया है।
सरकार का स्पष्ट रुख है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के कारण दर्ज मामलों का प्रतिकूल असर युवा अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए।
आम जनता और छात्रों पर असर
यह राहत उन सैकड़ों छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले उनके भविष्य की संभावनाओं — विशेषकर सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा प्रवेश — पर असर डाल सकते थे। यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर देशभर में बहस जारी है।
आगे क्या होगा
गृह विभाग के आदेश के बाद संबंधित पुलिस थानों में केस वापसी की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 31 मार्च 2027 तक की विस्तारित समय-सीमा यह सुनिश्चित करती है कि इस अवधि में दर्ज किसी भी संबंधित मामले को भी इस राहत के दायरे में लाया जा सके।