28 जुलाई 2026
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नीट प्रदर्शनकारियों को राहत: फडणवीस ने महाराष्ट्र में 12-13 FIR वापस लेने का आदेश दिया

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नीट प्रदर्शनकारियों को राहत: फडणवीस ने महाराष्ट्र में 12-13 FIR वापस लेने का आदेश दिया

सारांश

नीट परीक्षा की अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने पर मुंबई में 900 से अधिक छात्रों पर दर्ज 12-13 FIR अब वापस होंगी। CM फडणवीस ने गृह विभाग को औपचारिक निर्देश जारी किए — सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और विपक्ष की माँग के बाद महाराष्ट्र ने बिहार की राह पकड़ी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 28 जुलाई को गृह विभाग को नीट प्रदर्शनकारियों के सभी मामले वापस लेने के निर्देश दिए।
मुंबई पुलिस ने वर्ली, दादर, सायन, माहिम और शिवाजी पार्क थानों में 12 से 13 FIR दर्ज की थीं।
900 से अधिक छात्रों और प्रदर्शनकारियों के नाम BNSS के तहत जमानती धाराओं में दर्ज थे।
सर्वोच्च न्यायालय पहले ही निर्देश दे चुका था कि नीट प्रदर्शनकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो।
NCP (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल और महाराष्ट्र कांग्रेस ने मामले वापसी की औपचारिक माँग की थी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार, 28 जुलाई को गृह विभाग को औपचारिक निर्देश जारी किए कि नीट परीक्षा की कथित अनियमितताओं के विरोध में उतरे छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ महाराष्ट्र भर में दर्ज सभी पुलिस मामले वापस लिए जाएं। इस फैसले से 900 से अधिक उन छात्रों और प्रदर्शनकारियों को सीधी राहत मिलेगी, जिनके नाम विभिन्न थानों में दर्ज एफआईआर में शामिल थे।

मुख्य घटनाक्रम

मुंबई पुलिस ने वर्ली, दादर, सायन, माहिम और शिवाजी पार्क सहित अनेक पुलिस थानों में 12 से 13 एफआईआर दर्ज की थीं। इन मामलों में अवैध जमावड़े और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा उल्लंघन जैसी जमानती धाराएं लगाई गई थीं। सैकड़ों आरोपियों को व्हाट्सऐप के ज़रिए नोटिस भेजकर जाँच अधिकारियों के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री फडणवीस के निर्देश के बाद राज्यभर में मामले वापस लेने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का यह कदम अन्य राज्यों — विशेष रूप से बिहार — में जारी किए गए समान निर्देशों की तर्ज पर है, जहाँ नीट आंदोलन से जुड़े मामले पहले ही वापस लिए जा चुके हैं। यह निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन आपराधिक रिकॉर्ड का असर छात्रों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य पर पड़ सकता था।

विपक्ष और न्यायपालिका की भूमिका

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से इन मामलों को तत्काल वापस लेने की औपचारिक माँग की थी। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय भी यह निर्देश दे चुका था कि नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए और हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर देशभर में छात्रों में असंतोष व्याप्त है।

आम जनता पर असर

कथित तौर पर 900 से अधिक छात्रों और प्रदर्शनकारियों के नाम इन मामलों में दर्ज थे। मामले वापस होने से इन युवाओं को सरकारी नौकरी, उच्च शिक्षा प्रवेश और पासपोर्ट जैसी प्रक्रियाओं में आपराधिक रिकॉर्ड की बाधा से मुक्ति मिलेगी। यह कदम लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत भी माना जा रहा है।

क्या होगा आगे

गृह विभाग द्वारा आधिकारिक वापसी प्रक्रिया शुरू होने के बाद संबंधित थानों में दर्ज एफआईआर औपचारिक रूप से बंद की जाएंगी। इस बीच, एक राजनीतिक दल ने चेतावनी दी है कि यदि विभिन्न राज्यों में छात्र प्रदर्शनकारियों के सभी लंबित मामले तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा। नीट परीक्षा सुधार की माँग अभी भी केंद्र सरकार के समक्ष लंबित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि 900 से अधिक छात्रों पर मामले दर्ज करने की नौबत आई ही क्यों — खासकर जब सर्वोच्च न्यायालय पहले ही दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुका था। यह पैटर्न नया नहीं है: विरोध प्रदर्शन, FIR, फिर राजनीतिक दबाव में वापसी — यह चक्र छात्र आंदोलनों के साथ बार-बार दोहराया जाता है। असली सवाल यह है कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जाँच कहाँ तक पहुँची, जो इस पूरे आंदोलन की जड़ थी — FIR वापसी उस मूल समस्या का हल नहीं है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले क्यों वापस लिए जा रहे हैं?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 28 जुलाई को गृह विभाग को निर्देश दिया कि नीट परीक्षा की कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएं। यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, विपक्षी दलों की माँग और अन्य राज्यों में उठाए गए समान कदमों के बाद आया है।
कितने छात्रों पर मामले दर्ज थे और किन धाराओं में?
मुंबई पुलिस ने वर्ली, दादर, सायन, माहिम और शिवाजी पार्क सहित विभिन्न थानों में 12 से 13 FIR दर्ज की थीं, जिनमें 900 से अधिक लोगों के नाम शामिल थे। इन पर अवैध जमावड़े और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा उल्लंघन की जमानती धाराएं लगाई गई थीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने नीट प्रदर्शनकारियों के बारे में क्या कहा था?
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों में नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। साथ ही न्यायालय ने हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का भी आदेश दिया था।
मामले वापस होने से छात्रों को क्या फायदा होगा?
मामले वापस होने से इन छात्रों का आपराधिक रिकॉर्ड साफ हो जाएगा, जिससे सरकारी नौकरी, उच्च शिक्षा में प्रवेश और पासपोर्ट जैसी प्रक्रियाओं में बाधा नहीं आएगी। लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के कारण बने रिकॉर्ड का असर युवाओं के पेशेवर और शैक्षणिक भविष्य पर न पड़े, यही इस कदम का उद्देश्य बताया जा रहा है।
विपक्ष ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
NCP (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री फडणवीस से छात्रों पर दर्ज सभी मामले तुरंत वापस लेने की औपचारिक माँग की थी। उन्होंने बिहार में जारी किए गए निर्देशों का उदाहरण देते हुए महाराष्ट्र सरकार से भी आधिकारिक आदेश जारी करने का आग्रह किया था।
राष्ट्र प्रेस
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