भारत की GDP 7.8% रही Q1 FY27 में, RBI अनुमान को पछाड़ा; उद्योग जगत ने बताया 'सुनहरा दौर'
सारांश
मुख्य बातें
भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की 6.9 प्रतिशत दर से 0.9 प्रतिशत अधिक है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 7 प्रतिशत के अनुमान को भी पीछे छोड़ती है। 1 सितंबर को जारी इन आँकड़ों ने उद्योग जगत में उत्साह की लहर पैदा कर दी है, विशेषज्ञों का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब सेवा क्षेत्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है।
RBI के अनुमान से आगे निकली विकास दर
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त में मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के दौरान Q1 FY27 के लिए GDP वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। वास्तविक आँकड़ा इससे 0.8 प्रतिशत अधिक रहा, जो नीति-निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए सकारात्मक संकेत है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं, जिससे विकास दर के अनुमानों को कम करके आँका जा रहा था।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
इंडियन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ICEMA) के अध्यक्ष और JCB इंडिया के CEO एवं MD दीपक शेट्टी ने इस वृद्धि दर को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, "मैं आत्मनिर्भर भारत का बड़ा समर्थक रहा हूँ और मुझे लगता है कि यह समय भारतीय उद्योगों के लिए सुनहरा दौर है।" शेट्टी ने रेखांकित किया कि अब तक देश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः सेवा क्षेत्र के दम पर आगे बढ़ती थी, लेकिन अब मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी आगे बढ़कर योगदान दे रहा है।
शेट्टी ने कहा कि इन उच्च विकास दर के आँकड़ों का जश्न मनाया जाना चाहिए, क्योंकि ये ऐसे समय में आए हैं जब भू-राजनीतिक तनाव के कारण अल्पावधि में अनेक चुनौतियाँ उत्पन्न हो गई थीं।
कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट क्षेत्र का प्रदर्शन
शेट्टी ने बताया कि कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट क्षेत्र देश की मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि का एक बेहतरीन उदाहरण है। उनके अनुसार, पिछले वर्ष इस क्षेत्र का निर्यात करीब 31.5 प्रतिशत बढ़ा और पिछले पाँच वर्षों में वार्षिक वृद्धि दर करीब 15 प्रतिशत रही है। उन्होंने इस वर्ष के बजट में जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और रेलवे क्षेत्र के लिए बढ़े हुए आवंटन का भी उल्लेख किया, जो आगे चलकर कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की माँग को और बढ़ाएगा।
बाज़ार विशेषज्ञों का नज़रिया
मार्केट विशेषज्ञ सुनील शाह ने कहा कि Q1 FY27 में अर्थव्यवस्था का इस गति से विस्तार एक बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल के बावजूद भारत का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि घरेलू माँग और निवेश गतिविधि मज़बूत बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ सुस्ती के दौर से गुज़र रही हैं।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और बुनियादी ढाँचे में बढ़ते निवेश के चलते आने वाली तिमाहियों में भी वृद्धि की गति बनाए रखने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक दबाव कम हुआ और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहीं, तो पूरे वित्त वर्ष की विकास दर RBI के वार्षिक अनुमान को पार कर सकती है।