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नीट प्रदर्शनकारी छात्रों की एफआईआर रद्द: सर्वोच्च न्यायालय का आर्टिकल 142 के तहत बड़ा फैसला

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नीट प्रदर्शनकारी छात्रों की एफआईआर रद्द: सर्वोच्च न्यायालय का आर्टिकल 142 के तहत बड़ा फैसला

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक विरोध प्रदर्शन में एक बड़ा मोड़ — सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत दिल्ली और चार राज्यों में छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर रद्द कीं। सरकार ने आत्महत्या पीड़ितों के परिवारों को मुआवजे का भरोसा दिया। सीजेपी ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर को अनुच्छेद 142 के तहत नीट प्रदर्शनकारी छात्रों की दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में दर्ज एफआईआर रद्द कीं।
ये एफआईआर 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज हुई थीं; 20-25 जुलाई की घटनाओं पर नई एफआईआर नहीं होगी।
2,873 आपराधिक इतिहास वाले व्यक्तियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी गई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आत्महत्या पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजे का भरोसा दिया; प्रक्रिया के लिए तीन माह का समय मांगा।
सीजेपी ने सरकार के आश्वासन और न्यायालय के आदेश के बाद 5 सितंबर का मार्च वापस लिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर को एक ऐतिहासिक आदेश में नीट-यूजी पेपर लीक विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दिल्ली और चार राज्यों — असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार — में दर्ज सभी एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। न्यायालय ने यह कदम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए उठाया।

मुख्य घटनाक्रम

यह एफआईआर 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच दर्ज की गई थीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। दिल्ली पुलिस के अलावा चारों राज्य सरकारों ने सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल कर अनुच्छेद 142 के तहत इन एफआईआर को रद्द करने की गुहार लगाई थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई।

सरकार की ओर से तीन भरोसे

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत में तीन प्रमुख आश्वासन दिए गए थे। पहला — प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी और उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। दूसरा20 से 25 जुलाई के बीच की घटनाओं के लिए कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी। तीसरा — जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा, जिसके लिए राज्य सरकारों और संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद तौर-तरीके तय किए जाएंगे। सॉलिसिटर जनरल ने इस प्रक्रिया के लिए न्यायालय से तीन माह का समय मांगा।

आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर अलग कार्रवाई

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को सूचित किया कि प्रदर्शन में शामिल 2,873 व्यक्तियों का आपराधिक इतिहास है और उनके खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है। न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को इन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की इजाजत दे दी। अधिवक्ता हरिहरन ने उन 2,873 लोगों की सूची की मांग की, जिनके आपराधिक इतिहास के आधार पर सरकार मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांग रही है।

सीजेपी ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया

न्यायालय में उपस्थित सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के प्रवक्ता सौरव दास ने संगठन का बयान पढ़ते हुए घोषणा की कि 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'भारत सरकार के सकारात्मक भरोसे और आज की न्यायिक स्वीकृति को देखते हुए, और इस न्यायालय के आदेश को देखते हुए, सीजेपी 5 सितंबर को मार्च का आह्वान वापस लेना उचित समझता है और आज के आदेश का पालन करने की उम्मीद करता है।' न्यायालय ने इस बयान को अभिलेख में दर्ज कर लिया।

न्यायालय का संदेश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, 'अगर दोनों पक्ष आपस में विश्वास दिखाएं, तो सभी मुद्दे एक-एक करके हल हो सकते हैं। दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इतना मुश्किल हो कि उस पर खुले दिमाग से चर्चा न की जा सके।' सॉलिसिटर जनरल मेहता ने इस पर कहा, 'हम दुश्मन नहीं हैं।' गौरतलब है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी पेपर लीक विवाद देशभर में छात्रों के आक्रोश का केंद्र बना हुआ था और कई राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। आगे मुआवजे की प्रक्रिया और 2,873 आरोपियों की सूची को लेकर न्यायिक निगरानी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल अनुत्तरित हैं — नीट-यूजी पेपर लीक के दोषियों पर कार्रवाई कहाँ तक पहुंची? मुआवजे का भरोसा तीन माह के लिए टाला गया है, और इसकी निगरानी का ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है। 2,873 'आपराधिक इतिहास' वाले लोगों की सूची की पारदर्शिता पर अधिवक्ता हरिहरन का सवाल उचित है — बिना सार्वजनिक जाँच के यह वर्गीकरण विवादास्पद बना रहेगा। सीजेपी का मार्च वापस लेना संवाद की जीत हो सकती है, लेकिन छात्रों की मूल माँग — परीक्षा प्रणाली में सुधार — अभी भी न्यायिक या विधायी एजेंडे पर नहीं है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वोच्च न्यायालय ने नीट प्रदर्शनकारियों की एफआईआर क्यों रद्द कीं?
न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया, क्योंकि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत में एफआईआर वापस लेने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था। दिल्ली पुलिस और चार राज्य सरकारों ने स्वयं न्यायालय से यह राहत मांगी थी।
किन राज्यों में दर्ज एफआईआर रद्द हुई हैं?
दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज एफआईआर रद्द की गई हैं। जिन राज्यों ने न्यायालय में अर्जी नहीं दी, उनके लिए भी सॉलिसिटर जनरल ने समान आदेश लागू करने की अपील की।
2,873 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर क्यों दर्ज होगी?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुसार इन व्यक्तियों का पूर्व आपराधिक इतिहास है। न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को इनके विरुद्ध नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है, हालांकि अधिवक्ता हरिहरन ने इनकी सूची सार्वजनिक करने की मांग की है।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा कब मिलेगा?
सरकार ने मुआवजे का भरोसा दिया है और इसके लिए राज्य सरकारों व संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद तौर-तरीके तय करने की बात कही है। सॉलिसिटर जनरल ने इस प्रक्रिया के लिए न्यायालय से तीन माह का समय मांगा है।
सीजेपी ने 5 सितंबर का मार्च क्यों वापस लिया?
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने न्यायालय में बयान दिया कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर का मार्च वापस लेने का फैसला किया। यह बयान न्यायालय ने अभिलेख में दर्ज कर लिया।
राष्ट्र प्रेस
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