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कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: सपा एमएलसी मान सिंह ने की CBI जांच और दोषी अधिकारियों पर मुकदमे की मांग

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कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: सपा एमएलसी मान सिंह ने की CBI जांच और दोषी अधिकारियों पर मुकदमे की मांग

सारांश

कौशांबी के महमूदपुर में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 11 लोगों की जान गई। सपा एमएलसी मान सिंह ने CBI जांच, दोषी अधिकारियों पर मुकदमे और पर्याप्त मुआवज़े की मांग की। 2024 में लाइसेंस रद्द होने के बावजूद फैक्ट्री चलती रही — यह प्रशासनिक विफलता का सीधा सवाल है।

मुख्य बातें

कौशांबी के महमूदपुर (पिपरी थाना क्षेत्र) में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 11 लोगों की मौत , कई घायल।
सपा एमएलसी मान सिंह ने दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा और CBI जांच की मांग की।
पीड़ित परिवारों को दिए जा रहे ₹2 लाख के मुआवज़े को मान सिंह ने अपर्याप्त और अपमानजनक बताया।
2024 में फैक्ट्री का लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद अवैध संचालन जारी रहने पर गंभीर सवाल उठे।
मान सिंह ने कहा कि उपमुख्यमंत्री अस्पताल से घूमकर चले गए, पीड़ित परिवारों से नहीं मिले।
सपा ने यह मुद्दा विधानमंडल के सदन में उठाने की घोषणा की।

समाजवादी पार्टी के एमएलसी मान सिंह ने उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के महमूदपुर (पिपरी थाना क्षेत्र) में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। उन्होंने उन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की, जिनके कार्यक्षेत्र में यह अवैध कारोबार चलता रहा।

मान सिंह की मुख्य मांगें

मान सिंह ने कहा, 'सरकार की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ और उन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलना चाहिए, जिनके नाक के नीचे अवैध कारोबार चलाया जा रहा था।' उन्होंने इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच की माँग करते हुए कहा कि उच्चस्तरीय जाँच के बिना सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री लोगों के घरों में रखी हुई है, जो प्रशासनिक निगरानी की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

मुआवज़े पर सवाल

मान सिंह ने पीड़ित परिवारों को दिए जा रहे ₹2 लाख के मुआवज़े को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि 'जिनके घर के लोग चले गए हैं, ज़रा उनसे पूछिए कि दो लाख रुपए में सब्र कर लेंगे?' उनका कहना था कि पीड़ित परिवारों की जान की इतनी कम कीमत आँकना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

उपमुख्यमंत्री की भूमिका पर निशाना

सपा नेता ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री प्रयागराज आकर अस्पताल का दौरा करके चले गए, लेकिन पीड़ित परिवारों से मिलने की ज़रूरत नहीं समझी। मान सिंह ने कहा कि 'डिप्टी सीएम को डर लग रहा होगा कि अगर वे यहाँ आएंगे तो पीड़ित उनसे सवाल करेंगे।' उन्होंने इसे सरकार की जवाबदेही से भागने की कोशिश बताया।

लाइसेंस और कानूनी सवाल

मान सिंह ने यह भी उठाया कि 2024 में जिस फैक्ट्री का लाइसेंस निरस्त हो चुका था, उसे दोबारा संचालित करने की हिम्मत कैसे हुई। उन्होंने आशंका जताई कि 'इस मामले में एक नई कहानी गढ़ दी जाएगी कि एनकाउंटर कर दिया गया', और इसे मामले की लीपापोती करने की कोशिश करार दिया।

आगे की कार्रवाई

मान सिंह ने स्पष्ट किया कि ये सभी मुद्दे विधानमंडल के सदन में जोरदार तरीके से उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में खुली अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस हादसे की जाँच और पीड़ितों को न्याय दिलाने की माँग आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव का केंद्र बनने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या राज्य सरकार स्वतः संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करेगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के महमूदपुर (पिपरी थाना क्षेत्र) में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह फैक्ट्री कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित हो रही थी।
सपा एमएलसी मान सिंह ने क्या मांगें रखी हैं?
मान सिंह ने दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने, मामले की CBI जांच कराने और पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवज़ा देने की मांग की है। उन्होंने यह मुद्दा विधानमंडल सदन में उठाने की भी घोषणा की है।
फैक्ट्री का लाइसेंस कब रद्द हुआ था?
मान सिंह के अनुसार इस फैक्ट्री का लाइसेंस 2024 में ही निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद फैक्ट्री का संचालन जारी रहा, जो प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
पीड़ित परिवारों को कितना मुआवज़ा मिल रहा है?
मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख का मुआवज़ा दिए जाने की बात सामने आई है। सपा एमएलसी मान सिंह ने इसे अपर्याप्त और अपमानजनक बताते हुए उचित मुआवज़े की मांग की है।
उपमुख्यमंत्री की भूमिका पर क्या आरोप लगे हैं?
मान सिंह ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री प्रयागराज आकर अस्पताल का दौरा करके चले गए, लेकिन पीड़ित परिवारों से मिलने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने इसे सरकारी संवेदनहीनता और जवाबदेही से पलायन करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
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