पूर्वोत्तर में सेना का बड़ा अभियान: ₹300 करोड़ के नशीले पदार्थ व प्रतिबंधित सामान बरामद
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना और असम राइफल्स ने अगस्त 2026 के दौरान पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर, असम और मिजोरम में व्यापक संयुक्त अभियान चलाकर ₹300 करोड़ से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थ और प्रतिबंधित सामान बरामद किए हैं। सेना के स्पीयर कोर के नेतृत्व में चलाए गए इन अभियानों में स्थानीय पुलिस और नागरिक एजेंसियों का भी सहयोग लिया गया।
मुख्य बरामदगी का विवरण
अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों के हाथ लगी सामग्री में 1.32 किलोग्राम हेरोइन, 7.7 लाख मेथम्फेटामाइन (याबा) की गोलियाँ, 13.23 किलोग्राम अफीम, 8.22 किलोग्राम मॉर्फिन और 360 ग्राम ब्राउन शुगर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 11,630 किलोग्राम पॉपी सीड्स और 4.5 लाख सिगरेट स्टिक भी जब्त की गईं।
सुरक्षा बलों ने ₹75.025 लाख की बिना हिसाब की नकदी भी बरामद की, जो तस्करी नेटवर्क की वित्तीय कड़ी की ओर इशारा करती है।
राज्यवार अभियान का विस्तार
मणिपुर में यह कार्रवाई चुराचांदपुर, सेनापति और कामजोंग जिलों में की गई, जहाँ खुफिया सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया गया। असम के कछार और श्रीभूमि जिलों में भी सेना, असम राइफल्स और राज्य पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की।
मिजोरम में आइजोल और चंपई जिलों में खुफिया सूचना के आधार पर तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाया गया। चंपई जिला म्यांमार सीमा से सटा होने के कारण तस्करी का संवेदनशील मार्ग माना जाता है।
समन्वित रणनीति की भूमिका
सेना के अनुसार, खुफिया जानकारी को विभिन्न एजेंसियों के बीच साझा करने और उसके आधार पर संयुक्त अभियान चलाने की रणनीति ने तस्करी नेटवर्क को प्रभावी ढंग से तोड़ने में मदद की। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर क्षेत्र में 'गोल्डन ट्रायंगल' से आने वाले नशीले पदार्थों की आवाजाही पर चिंता लगातार बढ़ रही है।
गौरतलब है कि भारत-म्यांमार सीमा की भौगोलिक जटिलता और पहाड़ी इलाकों के कारण यह क्षेत्र दशकों से तस्करों के लिए अनुकूल रहा है। सेना की यह कार्रवाई उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत पूर्वोत्तर में सुरक्षा बलों की तैनाती और खुफिया नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
आगे की दिशा
सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से पूर्वोत्तर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे दीर्घकालिक अभियान को नई ऊर्जा मिली है। ₹300 करोड़ से अधिक की यह बरामदगी क्षेत्र में अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है और आने वाले महीनों में इसी तरह के और अभियानों की संभावना जताई जा रही है।