22 अगस्त 2026
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मणिपुर के जिरीबाम में ₹27 करोड़ से अधिक का नशीला पदार्थ जब्त, असम राइफल्स ने छह तस्करों को दबोचा

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मणिपुर के जिरीबाम में ₹27 करोड़ से अधिक का नशीला पदार्थ जब्त, असम राइफल्स ने छह तस्करों को दबोचा

सारांश

मणिपुर के जिरीबाम में असम राइफल्स और राज्य पुलिस ने नदी में नाव का पीछा कर ₹27 करोड़ से अधिक मूल्य की 90,000 याबा टैबलेट और 48 ग्राम हेरोइन जब्त की। छह तस्कर गिरफ्तार — पूर्वोत्तर में नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ यह अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक।

मुख्य बातें

असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस ने 21 अगस्त 2026 को जिरीबाम में संयुक्त ऑपरेशन चलाया।
90,000 याबा टैबलेट (कीमत लगभग ₹27 करोड़ ) और 48 ग्राम हेरोइन (कीमत ₹28.80 लाख ) बरामद।
नशीले पदार्थों से भरी नाव को नदी में रोककर छह संदिग्ध तस्कर गिरफ्तार।
याबा मेथामफेटामाइन और कैफीन का मिश्रण है; ओवरडोज से दौरे, स्ट्रोक और मौत का खतरा।
अधिकारियों के अनुसार, यह तस्करी नेटवर्क पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक फैला है।
यह जब्ती 'नशा मुक्त भारत' अभियान की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस ने 21 अगस्त 2026 को एक संयुक्त अभियान में मणिपुर के जिरीबाम में ₹27 करोड़ से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए और छह तस्करों को गिरफ्तार किया। सेना की ईस्टर्न कमांड के स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत चलाए गए इस ऑपरेशन में नशीले पदार्थों से भरी एक नाव को नदी में रोका गया।

ऑपरेशन का विवरण

सुरक्षा बलों ने तेज़ पीछा करते हुए नाव को काबू में किया। तलाशी के दौरान 90,000 याबा टैबलेट बरामद हुईं, जिनकी अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग ₹27 करोड़ आँकी गई है। इसके अलावा 48 ग्राम हेरोइन भी मिली, जिसकी कीमत ₹28.80 लाख बताई गई है। छह संदिग्ध तस्करों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।

याबा क्या है और यह क्यों खतरनाक है

याबा थाई भाषा में 'क्रेजी मेडिसिन' का अर्थ रखता है। यह मेथामफेटामाइन — एक अत्यंत नशीला और लत लगाने वाला उत्तेजक पदार्थ — और कैफीन का मिश्रण है। अधिकारियों के अनुसार, इसके सेवन से हृदय गति और रक्तचाप तेज़ी से बढ़ता है, मस्तिष्क की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएँ क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और स्ट्रोक का खतरा उत्पन्न होता है।

अधिकारियों ने आगाह किया है कि अधिक मात्रा में सेवन से हाइपरथर्मिया, दौरे और मौत तक हो सकती है। युवाओं में इसे 'पार्टी ड्रग' के रूप में प्रचलन मिल रहा है, जो इसे और भी गंभीर सामाजिक खतरा बनाता है।

नशा तस्करी और सुरक्षा चुनौती

सुरक्षा एजेंसियों ने नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के बीच सीधे संबंध का पता लगाया है। अधिकारियों के अनुसार, ये ड्रग्स खुली सीमाओं के रास्ते भारत में प्रवेश करते हैं और पूर्वोत्तर राज्यों से होते हुए पूरे देश में फैल जाते हैं। पश्चिम बंगाल में भी ऐसे तस्कर पकड़े जा चुके हैं जो याबा टैबलेट को बांग्लादेश भेजने की फिराक में थे।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में सुरक्षा बल नशा तस्करी के नेटवर्क के विरुद्ध लगातार अभियान चला रहे हैं। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर मणिपुर, म्यांमार से आने वाले याबा की प्रमुख तस्करी गलियारों में से एक माना जाता है।

सरकार की प्रतिबद्धता

स्पीयर कॉर्प्स ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस अभियान को 'नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका' बताया। अधिकारियों ने कहा कि यह जब्ती केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत' अभियान में एक महत्त्वपूर्ण सफलता है और सुरक्षित व नशा-मुक्त क्षेत्र के निर्माण की दिशा में सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

आने वाले दिनों में गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर तस्करी नेटवर्क के और सूत्र उजागर होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक संरचनात्मक समस्या की एक कड़ी मात्र है जो म्यांमार सीमा से जुड़े तस्करी गलियारों की देन है। हर बड़ी जब्ती के बाद नेटवर्क नए रास्ते तलाश लेता है — असली सवाल यह है कि क्या सुरक्षा बलों की कार्रवाई आपूर्ति श्रृंखला की जड़ तक पहुँच रही है या केवल अंतिम कड़ी को काट रही है। नशा-आतंक कनेक्शन की जो बात अधिकारी बार-बार उठाते हैं, उस पर ठोस सार्वजनिक डेटा अभी भी अपर्याप्त है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के जिरीबाम में क्या जब्त किया गया?
21 अगस्त 2026 को असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में जिरीबाम में 90,000 याबा टैबलेट (कीमत लगभग ₹27 करोड़) और 48 ग्राम हेरोइन (कीमत ₹28.80 लाख) बरामद की गई। छह संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
याबा टैबलेट क्या होती है और यह क्यों खतरनाक है?
याबा मेथामफेटामाइन और कैफीन का मिश्रण है, जिसका नाम थाई भाषा में 'क्रेजी मेडिसिन' से आया है। इसके सेवन से हृदय गति, रक्तचाप बढ़ता है, मस्तिष्क की रक्त वाहिकाएँ क्षतिग्रस्त होती हैं और ओवरडोज से दौरे व मौत तक हो सकती है।
यह ऑपरेशन किसने चलाया?
यह ऑपरेशन सेना की ईस्टर्न कमांड के स्पीयर कॉर्प्स के अंतर्गत असम राइफल्स ने मणिपुर पुलिस और अन्य एजेंसियों के सहयोग से चलाया। नशीले पदार्थों से भरी नाव को जिरीबाम में नदी में रोका गया।
मणिपुर में याबा तस्करी कहाँ से होती है?
अधिकारियों के अनुसार, याबा मुख्यतः म्यांमार की खुली सीमाओं के रास्ते मणिपुर में आती है और वहाँ से पूरे देश में फैलती है। पश्चिम बंगाल में भी ऐसे तस्कर पकड़े जा चुके हैं जो इसे बांग्लादेश भेजने की योजना बना रहे थे।
'नशा मुक्त भारत' अभियान में यह जब्ती कितनी अहम है?
अधिकारियों ने इसे 'नशा मुक्त भारत' अभियान की एक बड़ी सफलता बताया है। ₹27 करोड़ से अधिक मूल्य की यह जब्ती पूर्वोत्तर में तस्करी नेटवर्क के खिलाफ हाल की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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