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सीजेपी का 5 सितंबर मार्च रद्द: सरकार ने नीट पेपर लीक पीड़ितों को मुआवजा और FIR वापसी की मांगें मानीं

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सीजेपी का 5 सितंबर मार्च रद्द: सरकार ने नीट पेपर लीक पीड़ितों को मुआवजा और FIR वापसी की मांगें मानीं

सारांश

कॉकरोच जनता पार्टी का 5 सितंबर का इंडिया गेट मार्च रद्द — सरकार ने नीट पेपर लीक पीड़ित परिवारों को 90 दिन में मुआवजा और प्रदर्शनकारियों की FIR वापसी की मांगें मान लीं। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की प्रतिबद्धता को अपने आदेश में शामिल कर कानूनी मान्यता दी।

मुख्य बातें

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नए पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित मार्च रद्द किया।
सरकार ने नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 90 दिनों के भीतर मुआवजा देने का वचन दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की प्रतिबद्धता को अपने आदेश में शामिल कर कानूनी बाध्यता प्रदान की।
देशभर के प्रदर्शनकारियों, युवाओं और छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने पर सरकार सहमत हुई।
दिल्ली पुलिस की फेशियल रिकग्निशन तकनीक से चिह्नित 2,800 कथित अपराधियों की जांच के लिए अलग नई FIR दर्ज करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश।
25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सीजेपी ने युवाओं की जीत बताया था।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 1 सितंबर को घोषणा की कि 5 सितंबर को इंडिया गेट से नए पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण विरोध मार्च अब नहीं होगा। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट किया कि सरकार ने उनकी दोनों प्रमुख मांगें — नीट पेपर लीक पीड़ित परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापसी — स्वीकार कर ली हैं।

मार्च रद्द करने का कारण

सौरव दास ने मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'आपके माध्यम से मैं यह बताना चाहता हूं कि हम 5 सितंबर को इंडिया गेट से नए पुलिस मुख्यालय तक होने वाले अपने शांतिपूर्ण विरोध मार्च को रद्द कर रहे हैं, क्योंकि सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं।' उन्होंने इसे देश के युवाओं और छात्रों की जीत करार दिया।

मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

सौरव दास के अनुसार, सीजेपी ने सरकार से आग्रह किया था कि वह सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह वचन दे कि नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 90 दिनों के भीतर सम्मानजनक मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भरोसा दिलाया और कोर्ट ने इसे अपने आदेश में शामिल कर कानूनी मान्यता प्रदान की।

फेशियल रिकग्निशन विवाद और नई FIR

सौरव दास ने दिल्ली पुलिस की फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के उपयोग पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, पुलिस ने इस तकनीक के आधार पर दावा किया था कि विरोध स्थल पर लगभग 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे। दास ने तर्क दिया कि यदि ये लोग वास्तव में कुख्यात अपराधी थे, तो वे खुलेआम समाज में क्यों घूम रहे थे और उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इन 2,800 कथित अपराधियों की जांच के लिए एक अलग नई एफआईआर दर्ज की जाए। सौरव दास ने बताया कि वह मामला अब सुलझ गया है।

25 जुलाई की जीत और राजनीतिक पृष्ठभूमि

सौरव दास ने 25 जुलाई की घटनाओं को युवाओं की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि उस समय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। सीजेपी प्रतिनिधि आशुतोष और सौरव दास ने उसी दिन वरिष्ठ मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद ने देशभर में छात्र आंदोलन को हवा दी थी।

आगे क्या होगा

सीजेपी की दोनों मांगें — पीड़ित परिवारों को 90 दिनों के भीतर मुआवजा और देशभर के प्रदर्शनकारियों, युवाओं व छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की वापसी — पर सरकार की सहमति मिलने के बाद अब पार्टी की नज़र इन वादों के क्रियान्वयन पर होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में मुआवजे की समयसीमा शामिल होने से इसे कानूनी बाध्यता मिली है, जो इस पूरे आंदोलन का सबसे ठोस परिणाम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दबाव की राजनीति का परिणाम है। लेकिन असली सवाल यह है कि 90 दिनों की समयसीमा में मुआवजा वास्तव में पीड़ित परिवारों तक पहुंचेगा या नहीं, क्योंकि ऐसे वादे पहले भी हुए हैं जो कागज़ों तक सीमित रहे। एफआईआर वापसी की प्रक्रिया राज्य पुलिस पर निर्भर है, जहां केंद्र का सीधा नियंत्रण नहीं है — यह क्रियान्वयन की सबसे बड़ी चुनौती होगी। फेशियल रिकग्निशन तकनीक के दुरुपयोग का सवाल अभी भी अनुत्तरित है, और इस पर कोई जवाबदेही तय नहीं हुई।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी ने 5 सितंबर का मार्च क्यों रद्द किया?
कॉकरोच जनता पार्टी ने मार्च इसलिए रद्द किया क्योंकि सरकार ने उनकी दोनों प्रमुख मांगें — नीट पेपर लीक पीड़ित परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापसी — स्वीकार कर लीं। पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने इसे युवाओं की जीत बताया।
नीट पेपर लीक पीड़ित परिवारों को मुआवजा कब मिलेगा?
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वचन दिया है कि मुआवजा 90 दिनों के भीतर सीधे परिवारों के बैंक खातों में जमा किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपने आदेश में शामिल कर कानूनी मान्यता दी है।
दिल्ली पुलिस की फेशियल रिकग्निशन तकनीक विवाद क्या है?
दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन तकनीक के आधार पर दावा किया था कि विरोध स्थल पर लगभग 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे। सीजेपी ने इस पर सवाल उठाया कि यदि ये अपराधी थे तो खुलेआम क्यों घूम रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इनकी जांच के लिए अलग नई FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
25 जुलाई की घटना का इस आंदोलन से क्या संबंध है?
25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था, जिसे सीजेपी ने युवाओं की पहली बड़ी जीत बताया। उसी दिन सीजेपी प्रतिनिधियों ने वरिष्ठ मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
सीजेपी की एफआईआर वापसी की मांग पर क्या हुआ?
सरकार ने देशभर में प्रदर्शनकारियों, युवाओं और छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने पर सहमति जताई है। यह सीजेपी की दूसरी प्रमुख मांग थी, जिसे सरकार ने मान लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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