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5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस HQ तक सीजेपी का युवा मार्च, नीट पीड़ित परिवार करेंगे नेतृत्व

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5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस HQ तक सीजेपी का युवा मार्च, नीट पीड़ित परिवार करेंगे नेतृत्व

सारांश

सीजेपी ने सरकार पर 25 जुलाई के वादे तोड़ने का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक युवा मार्च का ऐलान किया है। नीट पीड़ित परिवार और पुलिस बर्बरता के शिकार लोग इस शांतिपूर्ण मार्च का नेतृत्व करेंगे।

मुख्य बातें

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में युवा विरोध मार्च का ऐलान किया।
मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा।
नीट में जान गँवाने वाले छात्रों के परिजन और पुलिस बर्बरता के शिकार परिवार मार्च में सबसे आगे रहेंगे।
पार्टी का आरोप है कि 25 जुलाई 2026 को किए गए सार्वजनिक वादों को सरकार ने एक महीने बाद भी पूरा नहीं किया।
18 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एफआईआर सूची माँगे जाने के बावजूद सरकार ने स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई।
सीजेपी ने सभी युवा संगठनों और छात्र संगठनों से इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में जुटने की अपील की है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक बड़े युवा विरोध मार्च का आह्वान किया है। इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाले जाने वाले इस शांतिपूर्ण मार्च का नेतृत्व नीट में जान गँवाने वाले छात्रों के परिजन और पुलिस बर्बरता के शिकार लोगों के परिवार करेंगे। पार्टी की नेशनल वर्किंग कमेटी ने सोमवार को हुई बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

सीजेपी का कहना है कि 25 जुलाई 2026 को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत सरकार और भाजपा/एनडीए शासित राज्यों ने युवाओं से सार्वजनिक रूप से कई पक्के वादे किए थे। इन्हीं वादों पर भरोसा करते हुए देशव्यापी युवा विरोध प्रदर्शनों को अच्छे विश्वास के साथ वापस लिया गया था। पार्टी के अनुसार, पिछले एक महीने में सरकार ने उन वादों को लागू करने के बजाय टालमटोल की नीति अपनाई है।

सुप्रीम कोर्ट और एफआईआर का मामला

सीजेपी ने बताया कि 18 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से देशभर में दर्ज एफआईआर की सूची बार-बार माँगी, ताकि उन्हें एक साथ रद्द करने पर विचार किया जा सके। बावजूद इसके, सरकार ने न्यायालय के समक्ष भी इस पर स्पष्ट प्रतिबद्धता जताने से परहेज किया। पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार से लिखित आश्वासन अभी तक नहीं मिला है।

पार्टी की चेतावनी

नेशनल वर्किंग कमेटी ने अपने बयान में कहा, 'यह सिलसिला ऐसे नहीं चल सकता। हमारे धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। हमारे विश्वास का इस्तेमाल सरकार हमारे साथ धोखा करने के लिए नहीं कर सकती।' पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार तकनीकी बहानों का सहारा लेकर वादों से पीछे हट रही है।

मार्च की संरचना और अपील

सीजेपी ने स्पष्ट किया कि 5 सितंबर के मार्च में सबसे आगे वे परिवार होंगे जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है, उनके पीछे पुलिस बर्बरता के शिकार लोग और अंत में देशभर के छात्र व युवा नागरिक चलेंगे। पार्टी ने सभी युवा भारतीयों, छात्र संगठनों और युवा संगठनों से इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में उपस्थित होने की अपील की है।

आगे क्या

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 5 सितंबर से पहले केंद्र सरकार सीजेपी की माँगों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं। पार्टी का कहना है कि यदि लिखित आश्वासन और एफआईआर वापसी पर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं मिली, तो यह मार्च आगे बड़े आंदोलन की नींव बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि 25 जुलाई के वादों का लिखित रिकॉर्ड क्या है और उनकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी का 5 सितंबर का युवा मार्च क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण युवा मार्च का आह्वान किया है। इस मार्च में देशभर के छात्र और युवा नागरिक भाग लेंगे, जिसका नेतृत्व नीट पीड़ित परिवार और पुलिस बर्बरता के शिकार लोग करेंगे।
सीजेपी ने यह विरोध प्रदर्शन क्यों बुलाया है?
पार्टी का आरोप है कि 25 जुलाई 2026 को सरकार ने युवाओं से जो सार्वजनिक वादे किए थे, उन्हें एक महीने बाद भी पूरा नहीं किया गया है। सरकार ने टालमटोल और तकनीकी बहानों का सहारा लिया और सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी एफआईआर वापसी पर स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई।
25 जुलाई 2026 के वादे क्या थे?
सीजेपी के अनुसार, 25 जुलाई 2026 को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत सरकार और भाजपा/एनडीए शासित राज्यों ने देश के युवाओं से कुछ पक्के वादे किए थे। इन्हीं वादों पर भरोसा करके देशव्यापी युवा आंदोलन वापस लिया गया था, हालाँकि सरकार से लिखित आश्वासन अभी तक नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट का इस मामले में क्या रोल है?
सीजेपी के अनुसार, 18 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से देशभर में दर्ज एफआईआर की सूची बार-बार माँगी ताकि उन्हें एक साथ रद्द किया जा सके। सरकार ने न्यायालय के समक्ष भी इस पर स्पष्ट वादा करने से इनकार कर दिया, जिसे पार्टी वादाखिलाफी का प्रमाण मानती है।
5 सितंबर के मार्च में कौन-कौन शामिल होगा?
मार्च में सबसे आगे वे परिवार होंगे जिन्होंने नीट से जुड़ी घटनाओं में अपने बच्चों को खोया है। उनके पीछे पुलिस बर्बरता के शिकार लोग और फिर देशभर के छात्र व युवा नागरिक चलेंगे। सीजेपी ने सभी युवा व छात्र संगठनों से इंडिया गेट पर बड़ी संख्या में जुटने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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