प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर सीजेपी की केंद्र को चेतावनी: FIR वापसी और रिहाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 27 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि असम, पश्चिम बंगाल और बिहार सहित विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए छात्रों और प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा नहीं किया गया, तो पार्टी आगे 'आवश्यक कदम' उठाने पर विचार करेगी। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का जो आश्वासन दिया था, उसका उल्लंघन हो रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि पार्टी ने देशव्यापी आंदोलन केवल इसलिए स्थगित किया था क्योंकि भारत सरकार ने भरोसा दिलाया था कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ — चाहे वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्य हो या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित राज्य — वर्तमान या भविष्य में कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। दास ने दावा किया कि इसके बावजूद कई राज्यों से छात्रों और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने, हिरासत में लेने और गिरफ्तार किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
सरकार से माँगें
सीजेपी ने केंद्र सरकार, विशेष रूप से BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से अपील की कि वे दिए गए आश्वासन का पालन सुनिश्चित करें। पार्टी ने स्पष्ट माँग रखी कि हिरासत में लिए गए और गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाए तथा उनके खिलाफ दर्ज सभी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) वापस ली जाएं। बयान में यह भी याद दिलाया गया कि सरकार ने 28 जुलाई 2026 तक इस संबंध में लिखित गारंटी देने का वादा किया था।
कानूनी मोर्चे पर सक्रियता
सीजेपी ने बताया कि उसकी कानूनी टीम पहले दिन से सक्रिय है और संबंधित राज्यों के वकीलों के साथ समन्वय कर हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने और उन्हें हर संभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। पार्टी ने युवा प्रदर्शनकारियों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सीजेपी स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है।
विश्वासघात की चेतावनी
पार्टी ने अपने बयान में कहा कि देशव्यापी आंदोलन स्थगित करने का फैसला पूरी तरह सद्भावना और सरकार के आश्वासन पर भरोसा करते हुए लिया गया था। सीजेपी के अनुसार, यदि सरकार अपने वादे से पीछे हटती है, तो यह न केवल पार्टी के साथ विश्वासघात होगा, बल्कि उन लाखों युवाओं के भरोसे को भी तोड़ना होगा जिन्होंने आंदोलन की बजाय संवाद का रास्ता चुना। पार्टी ने कहा, 'किसी भी सरकार की विश्वसनीयता केवल वादे करने से नहीं, बल्कि उन्हें निभाने से बनती है।'
आगे क्या होगा
सीजेपी ने स्पष्ट किया कि 28 जुलाई 2026 की समयसीमा तक यदि लिखित गारंटी नहीं मिली और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो पार्टी 'आवश्यक कदम' उठाने पर विचार करेगी — हालाँकि उसने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे कदम क्या होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।