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नीट आंदोलन: सीजेपी ने दी चेतावनी — मंगलवार तक लिखित वादे नहीं तो फिर शुरू होगा देशव्यापी प्रदर्शन

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नीट आंदोलन: सीजेपी ने दी चेतावनी — मंगलवार तक लिखित वादे नहीं तो फिर शुरू होगा देशव्यापी प्रदर्शन

सारांश

49 दिन के आंदोलन के बाद हुआ समझौता महज दो दिन में विवादों में घिर गया। सीजेपी का आरोप है कि बिहार में 86, कोलकाता में 11 गिरफ्तारियाँ हुईं — जबकि वादा था कि कोई नया मामला नहीं बनेगा। मंगलवार तक लिखित जवाब नहीं मिला तो देशव्यापी आंदोलन फिर शुरू होगा।

मुख्य बातें

सीजेपी ने 27 जुलाई को चेतावनी दी कि मंगलवार तक 25 जुलाई के समझौते की लिखित प्रति नहीं मिली तो देशव्यापी आंदोलन फिर शुरू होगा।
संगठन का 49 दिनों का नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन इसी समझौते के आधार पर स्थगित हुआ था।
सीजेपी के दावों के अनुसार बिहार में 86 , कोलकाता में 11 लोगों को हिरासत में लिया गया और असम में नई एफआईआर दर्ज हुईं।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने प्रभावित प्रदर्शनकारियों के लिए ₹1 करोड़ की कानूनी सहायता राशि देने की घोषणा की।
सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर चेहरे की पहचान तकनीक के जरिए प्रदर्शनकारियों की निगरानी का आरोप लगाया।

छात्र जनता पार्टी (सीजेपी) ने सोमवार, 27 जुलाई को केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी कि यदि 25 जुलाई को हुए समझौते की लिखित प्रति मंगलवार तक उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संगठन अपना देशव्यापी आंदोलन फिर से शुरू कर देगा। यह वही समझौता था जिसके आधार पर नीट पेपर लीक के विरोध में चल रहा 49 दिनों का आंदोलन स्थगित किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

नई दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में सीजेपी नेताओं ने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल के साथ मिलकर आरोप लगाया कि सरकार ने अपने वादों से पलटी मार ली है। सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि संगठन को समझाया गया था कि सभी मौजूदा एफआईआर वापस ली जाएंगी, कोई नया मामला दर्ज नहीं होगा और प्रदर्शनकारियों को किसी दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा — लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।

सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में स्वयंसेवकों को निगरानी और हिरासत का सामना करना पड़ रहा है।

राज्यवार गिरफ्तारी के आरोप

सीजेपी सदस्य रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि विभिन्न राज्यों में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। उनके दावों के अनुसार, असम में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं, कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बिहार में 86 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

समझौते की शर्तें और विवाद

सीजेपी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ तीन दौर की बातचीत के बाद तय हुए समझौते में चार प्रमुख बिंदु शामिल थे — एफआईआर वापस लेना, प्रदर्शनकारियों को भविष्य की कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा, नीट पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं के पीड़ितों के परिवारों को 'अधिकतम संभव मुआवजा' और पार्टी के पाँच सूत्री परीक्षा सुधार चार्टर पर विचार। सरकार की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कपिल सिबल की कानूनी सहायता की घोषणा

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने प्रभावित प्रदर्शनकारियों के लिए ₹1 करोड़ की राशि देने का वादा किया, जिससे एक राष्ट्रव्यापी कानूनी सहायता मंच स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए चेहरे की पहचान तकनीक (फेशियल रिकग्निशन) का इस्तेमाल कर रही है और इस तकनीक के संभावित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

आगे क्या होगा

सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि मंगलवार तक लिखित आश्वासन न मिलने पर वह देशव्यापी आंदोलन की घोषणा करेगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब नीट पेपर लीक मामला पहले से ही राष्ट्रीय राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी छात्र आंदोलन और सरकार के बीच समझौते की शर्तों को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

ज़मीन पर होती है — और यहीं केंद्र सरकार की साख दाँव पर है। अगर सीजेपी के गिरफ्तारी के आँकड़े सही हैं, तो यह समझौते का खुला उल्लंघन है; अगर गलत हैं, तो सरकार को पारदर्शी खंडन सामने रखना चाहिए था। दोनों ही स्थितियों में लिखित समझौते की अनुपस्थिति सवाल खड़े करती है। फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का आरोप एक अलग और गंभीर नागरिक-स्वतंत्रता बहस को जन्म देता है, जिस पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी ने आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी क्यों दी?
सीजेपी का आरोप है कि 25 जुलाई को हुए समझौते के बावजूद सरकार ने एफआईआर वापस नहीं ली और बिहार, पश्चिम बंगाल व असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही। संगठन ने मंगलवार तक लिखित प्रति की माँग रखी है, अन्यथा देशव्यापी विरोध फिर शुरू करने की चेतावनी दी है।
25 जुलाई के समझौते में क्या शर्तें थीं?
सीजेपी के अनुसार समझौते में चार बिंदु थे — सभी एफआईआर वापस लेना, प्रदर्शनकारियों को भविष्य की कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा, नीट पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं के पीड़ित परिवारों को अधिकतम मुआवजा और पाँच सूत्री परीक्षा सुधार चार्टर पर विचार। सरकार ने अब तक इन दावों पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
कपिल सिबल ने प्रदर्शनकारियों के लिए क्या घोषणा की?
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने प्रभावित प्रदर्शनकारियों के लिए ₹1 करोड़ की राशि से एक राष्ट्रव्यापी कानूनी सहायता मंच स्थापित करने का वादा किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर फेशियल रिकग्निशन तकनीक के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान करने का भी आरोप लगाया।
किन राज्यों में गिरफ्तारियों के आरोप लगाए गए हैं?
सीजेपी के दावों के अनुसार बिहार में 86 लोगों को हिरासत में लिया गया, कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया और असम में नई एफआईआर दर्ज हुईं। इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
नीट पेपर लीक आंदोलन कितने दिनों तक चला था?
सीजेपी का नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन 49 दिनों तक चला, जिसे 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ तीन दौर की बातचीत के बाद हुए समझौते के आधार पर स्थगित किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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