पेपर लीक प्रदर्शनकारियों की एफआईआर पर सरकार SC आदेश की आड़ ले रही है — सीजेपी की नए आंदोलन की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
छात्र जनता पार्टी (सीजेपी) ने 29 जुलाई को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए नए सिरे से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। सीजेपी का कहना है कि सरकार पेपर लीक विरोधी आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने के अपने पूर्व आश्वासन से पीछे हटने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश को ढाल बना रही है। यह विवाद तब और गहरा हो गया जब सरकार ने मंगलवार तक लिखित आश्वासन देने से परहेज किया।
मामले की पृष्ठभूमि
सीजेपी ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद 37 दिनों तक जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में धरना दिया था। संगठन ने यह आंदोलन तब वापस लिया जब केंद्र ने आश्वस्त किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, नई एफआईआर नहीं दर्ज होगी, पुराने मामले वापस लिए जाएंगे, और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और विवाद
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने हाल ही में पेपर लीक प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए। साथ ही, बिना पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले हिरासती प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का आदेश दिया, जबकि मौजूदा एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी। सीजेपी का आरोप है कि सरकार इसी अंतिम बिंदु को आधार बनाकर एफआईआर वापसी के आश्वासन की अनदेखी कर रही है।
सीजेपी प्रवक्ता का आरोप
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "हमारे विरोध प्रदर्शन से संबंधित जनहित याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, सरकार अब कह रही है कि मामला अदालत में विचाराधीन है — अदालत की उस टिप्पणी का हवाला देते हुए कि मौजूदा एफआईआर की जांच जारी रह सकती है।" दास ने यह भी तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि सरकार एफआईआर वापस नहीं ले सकती। उन्होंने कहा, "शक्ति पूरी तरह से सरकार के पास है। सुप्रीम कोर्ट को यह भी समझना चाहिए कि सरकार कैसे उसके आदेशों का दुरुपयोग कर रही है और युवाओं के खिलाफ उनका राजनीतिकरण और हथियार बना रही है।"
कई राज्यों में उत्पीड़न के आरोप
सीजेपी ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्रदर्शनकारी छात्रों को उत्पीड़न और कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जो उनकी मूल माँग — सभी एफआईआर वापस लेने — के सीधे विरुद्ध है।
आगे क्या होगा
सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासनों को पूरा नहीं करती, तो संगठन कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों के समर्थन में एक बार फिर सड़कों पर उतरेगा। दास ने कहा कि संगठन को मंगलवार तक लिखित गारंटी मिलने की उम्मीद थी, जो अब तक नहीं मिली है। यह टकराव दर्शाता है कि पेपर लीक विवाद से उपजा छात्र आंदोलन अभी थमा नहीं है।