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पेपर लीक प्रदर्शनकारियों की एफआईआर पर सरकार SC आदेश की आड़ ले रही है — सीजेपी की नए आंदोलन की चेतावनी

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पेपर लीक प्रदर्शनकारियों की एफआईआर पर सरकार SC आदेश की आड़ ले रही है — सीजेपी की नए आंदोलन की चेतावनी

सारांश

37 दिन का धरना खत्म करने के बाद सीजेपी फिर आंदोलन की राह पर है — आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ढाल बनाकर एफआईआर वापसी के अपने वादे से मुकर रही है। पाँच राज्यों में प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न के दावों के बीच यह टकराव नया मोड़ ले सकता है।

मुख्य बातें

सीजेपी ने 29 जुलाई को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह एफआईआर वापसी के आश्वासन से पीछे हटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सहारा ले रही है।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि मंगलवार तक सरकार से कोई लिखित गारंटी नहीं मिली।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था, पर मौजूदा एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी।
सीजेपी ने उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया।
संगठन ने 37 दिनों का विरोध प्रदर्शन सरकारी आश्वासन के बाद वापस लिया था; अब नए आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

छात्र जनता पार्टी (सीजेपी) ने 29 जुलाई को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए नए सिरे से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। सीजेपी का कहना है कि सरकार पेपर लीक विरोधी आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने के अपने पूर्व आश्वासन से पीछे हटने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश को ढाल बना रही है। यह विवाद तब और गहरा हो गया जब सरकार ने मंगलवार तक लिखित आश्वासन देने से परहेज किया।

मामले की पृष्ठभूमि

सीजेपी ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद 37 दिनों तक जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में धरना दिया था। संगठन ने यह आंदोलन तब वापस लिया जब केंद्र ने आश्वस्त किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, नई एफआईआर नहीं दर्ज होगी, पुराने मामले वापस लिए जाएंगे, और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और विवाद

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने हाल ही में पेपर लीक प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए। साथ ही, बिना पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले हिरासती प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का आदेश दिया, जबकि मौजूदा एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी। सीजेपी का आरोप है कि सरकार इसी अंतिम बिंदु को आधार बनाकर एफआईआर वापसी के आश्वासन की अनदेखी कर रही है।

सीजेपी प्रवक्ता का आरोप

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "हमारे विरोध प्रदर्शन से संबंधित जनहित याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, सरकार अब कह रही है कि मामला अदालत में विचाराधीन है — अदालत की उस टिप्पणी का हवाला देते हुए कि मौजूदा एफआईआर की जांच जारी रह सकती है।" दास ने यह भी तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि सरकार एफआईआर वापस नहीं ले सकती। उन्होंने कहा, "शक्ति पूरी तरह से सरकार के पास है। सुप्रीम कोर्ट को यह भी समझना चाहिए कि सरकार कैसे उसके आदेशों का दुरुपयोग कर रही है और युवाओं के खिलाफ उनका राजनीतिकरण और हथियार बना रही है।"

कई राज्यों में उत्पीड़न के आरोप

सीजेपी ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्रदर्शनकारी छात्रों को उत्पीड़न और कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जो उनकी मूल माँग — सभी एफआईआर वापस लेने — के सीधे विरुद्ध है।

आगे क्या होगा

सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार बातचीत के दौरान दिए गए आश्वासनों को पूरा नहीं करती, तो संगठन कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों के समर्थन में एक बार फिर सड़कों पर उतरेगा। दास ने कहा कि संगठन को मंगलवार तक लिखित गारंटी मिलने की उम्मीद थी, जो अब तक नहीं मिली है। यह टकराव दर्शाता है कि पेपर लीक विवाद से उपजा छात्र आंदोलन अभी थमा नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उसका उपयोग न करना एक राजनीतिक चुनाव है, कानूनी बाध्यता नहीं। पाँच राज्यों में उत्पीड़न के आरोप यदि सत्यापित होते हैं, तो यह न्यायालय के 'दंडात्मक कार्रवाई न करें' निर्देश की भावना के विरुद्ध है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार लिखित आश्वासन देने से इसलिए बच रही है क्योंकि उसे जवाबदेही से डर है — और अगर ऐसा है, तो यह भविष्य के हर छात्र आंदोलन के लिए एक खतरनाक मिसाल बनेगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी ने नए प्रदर्शन की चेतावनी क्यों दी है?
सीजेपी का आरोप है कि केंद्र सरकार पेपर लीक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने के अपने पूर्व आश्वासन को पूरा नहीं कर रही और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बहाना बना रही है। संगठन ने मंगलवार तक लिखित गारंटी न मिलने पर देशव्यापी आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक प्रदर्शनकारियों के मामले में क्या आदेश दिया था?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो और बिना पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले हिरासती प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए। हालाँकि, अदालत ने मौजूदा एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति भी दी।
सीजेपी ने 37 दिन का प्रदर्शन पहले क्यों वापस लिया था?
सरकार ने आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, नई एफआईआर नहीं दर्ज होगी, पुराने मामले वापस लिए जाएंगे और नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। इन आश्वासनों के बाद संगठन ने अपना 37 दिनों का धरना समाप्त किया था।
किन राज्यों में प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है?
सीजेपी ने उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न और कानूनी कार्यवाही के आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि इन राज्यों में कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
क्या सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार को एफआईआर वापस लेने से रोकता है?
सीजेपी के अनुसार, नहीं — सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में एफआईआर वापसी पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। सौरव दास ने तर्क दिया कि एफआईआर वापस लेने का अधिकार पूरी तरह सरकार के पास है और अदालत के आदेश को इस अधिकार के उपयोग में बाधा के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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