झारखंड JPSC-JSSC पेपर लीक: दिलीप घोष का सवाल — दोषियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं, CM दें जवाब
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने 7 अगस्त 2026 को कोलकाता में झारखंड के JPSC-JSSC पेपर लीक विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की कि राज्य के मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से जवाबदेही लें और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी एक मंत्री की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी राज्य सरकार की विफलता को उजागर करता है।
मुख्य आरोप और सवाल
घोष ने सवाल उठाया कि झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनके अनुसार, सरकार ने इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक विवाद में तब्दील कर दिया है, जबकि हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर है।
उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य सरकार निष्पक्ष जांच का भरोसा देने के लिए आगे क्यों नहीं आ रही। घोष ने कहा, ‘छात्रों की समस्याओं का समाधान किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि उन्हें राजनीति का मोहरा बनाना।’
राहुल गांधी पर निशाना
पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आड़े हाथ लेते हुए घोष ने आरोप लगाया कि जब दिल्ली में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया गया, तब उन राज्यों में समान स्तर का विरोध नहीं दिखाई दिया जहाँ बार-बार पेपर लीक हुए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उसे सभी राज्यों में एकसमान आवाज उठानी चाहिए।
घोष के अनुसार, राहुल गांधी का उद्देश्य छात्रहित से अधिक मीडिया का ध्यान खींचना और सुर्खियाँ बटोरना था — एक आरोप जिसे कांग्रेस ने अब तक खारिज नहीं किया है।
केंद्र बनाम राज्य: कानूनी ज़िम्मेदारी
घोष ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले ही कानून बना चुकी है। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है कि वे इस दिशा में कठोर कानून बनाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
परिसीमन पर BJP नेता का रुख
परिसीमन के मुद्दे पर घोष ने कहा कि यह एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है जो समय-समय पर होती रही है। उनके अनुसार, जनगणना पूरी होने के बाद पूरे देश में परिसीमन शुरू होगा और बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप संसदीय सीटों की संख्या तय की जाएगी।
उन्होंने विपक्ष पर विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन राज्यों को पहले परिसीमन का लाभ मिला, वही अब राष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध कर रहे हैं — जो उनकी नीयत पर सवाल उठाता है।
मोहन भागवत की टिप्पणी का समर्थन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा जेन-Z और युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी का समर्थन करते हुए घोष ने कहा कि भागवत हिंदू समाज के लिए एक अभिभावक, मार्गदर्शक और दार्शनिक की भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, जब भी युवाओं के भटकने की आशंका होती है, भागवत समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करते हैं।
घोष ने विश्वास जताया कि भागवत द्वारा उठाया गया यह मुद्दा समाज के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा और युवाओं को रचनात्मक सोच की ओर प्रेरित करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में युवा बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान लगा हुआ है।