7 अगस्त 2026
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झारखंड JPSC-JSSC पेपर लीक: दिलीप घोष का सवाल — दोषियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं, CM दें जवाब

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झारखंड JPSC-JSSC पेपर लीक: दिलीप घोष का सवाल — दोषियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं, CM दें जवाब

सारांश

BJP नेता दिलीप घोष ने झारखंड के JPSC-JSSC पेपर लीक मामले में मुख्यमंत्री से सीधा जवाब माँगा है — दोषियों की गिरफ्तारी न होना और निष्पक्ष जांच का अभाव उनकी मुख्य आपत्ति है। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर चुनिंदा विरोध का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने 7 अगस्त 2026 को कोलकाता में झारखंड के JPSC-JSSC पेपर लीक पर मुख्यमंत्री से सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की।
घोष के अनुसार, दोषियों की गिरफ्तारी न होना और निष्पक्ष जांच का अभाव राज्य सरकार की विफलता दर्शाता है।
राहुल गांधी पर आरोप — पेपर लीक के मुद्दे पर केवल चुनिंदा राज्यों में विरोध, सभी जगह एकसमान आवाज़ नहीं।
केंद्र सरकार पहले ही पेपर लीक रोकने का कानून बना चुकी है; अब राज्यों की बारी — घोष।
परिसीमन को संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष पर विरोधाभास का आरोप लगाया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत की जेन-Z पर टिप्पणी का समर्थन करते हुए उन्हें समाज का मार्गदर्शक बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने 7 अगस्त 2026 को कोलकाता में झारखंड के JPSC-JSSC पेपर लीक विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की कि राज्य के मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से जवाबदेही लें और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी एक मंत्री की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी राज्य सरकार की विफलता को उजागर करता है।

मुख्य आरोप और सवाल

घोष ने सवाल उठाया कि झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनके अनुसार, सरकार ने इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक विवाद में तब्दील कर दिया है, जबकि हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर है।

उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य सरकार निष्पक्ष जांच का भरोसा देने के लिए आगे क्यों नहीं आ रही। घोष ने कहा, ‘छात्रों की समस्याओं का समाधान किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि उन्हें राजनीति का मोहरा बनाना।’

राहुल गांधी पर निशाना

पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आड़े हाथ लेते हुए घोष ने आरोप लगाया कि जब दिल्ली में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया गया, तब उन राज्यों में समान स्तर का विरोध नहीं दिखाई दिया जहाँ बार-बार पेपर लीक हुए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उसे सभी राज्यों में एकसमान आवाज उठानी चाहिए।

घोष के अनुसार, राहुल गांधी का उद्देश्य छात्रहित से अधिक मीडिया का ध्यान खींचना और सुर्खियाँ बटोरना था — एक आरोप जिसे कांग्रेस ने अब तक खारिज नहीं किया है।

केंद्र बनाम राज्य: कानूनी ज़िम्मेदारी

घोष ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले ही कानून बना चुकी है। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है कि वे इस दिशा में कठोर कानून बनाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

परिसीमन पर BJP नेता का रुख

परिसीमन के मुद्दे पर घोष ने कहा कि यह एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है जो समय-समय पर होती रही है। उनके अनुसार, जनगणना पूरी होने के बाद पूरे देश में परिसीमन शुरू होगा और बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप संसदीय सीटों की संख्या तय की जाएगी।

उन्होंने विपक्ष पर विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन राज्यों को पहले परिसीमन का लाभ मिला, वही अब राष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध कर रहे हैं — जो उनकी नीयत पर सवाल उठाता है।

मोहन भागवत की टिप्पणी का समर्थन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा जेन-Z और युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी का समर्थन करते हुए घोष ने कहा कि भागवत हिंदू समाज के लिए एक अभिभावक, मार्गदर्शक और दार्शनिक की भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार, जब भी युवाओं के भटकने की आशंका होती है, भागवत समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करते हैं।

घोष ने विश्वास जताया कि भागवत द्वारा उठाया गया यह मुद्दा समाज के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा और युवाओं को रचनात्मक सोच की ओर प्रेरित करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में युवा बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान लगा हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके केंद्र में एक वैध सवाल है — झारखंड में पेपर लीक के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हालांकि, घोष खुद पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री हैं, जहाँ शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक मामले पहुँचे हैं — यह विरोधाभास उनकी आलोचना की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। राहुल गांधी पर 'सुर्खियाँ बटोरने' का आरोप भी उसी चुनिंदा राजनीति का हिस्सा लगता है जिसका घोष खुद विरोध कर रहे हैं। असली मुद्दा यह है कि देश में पेपर लीक एक प्रणालीगत समस्या बन चुकी है और केंद्रीय कानून बनाने के बावजूद राज्य स्तर पर क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति दोनों पक्षों में कमज़ोर दिखती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में JPSC-JSSC पेपर लीक विवाद क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगे हैं, जिसके बाद हजारों अभ्यर्थी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। दोषियों की गिरफ्तारी न होने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर यह विवाद राजनीतिक रूप ले चुका है।
दिलीप घोष ने झारखंड CM से क्या मांग की है?
BJP नेता दिलीप घोष ने मांग की है कि झारखंड के मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से जवाबदेही लें और पेपर लीक में दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक मंत्री की नहीं, बल्कि पूरी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार ने क्या किया है?
घोष के अनुसार, केंद्र सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून बना चुकी है। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी है कि वे इसी दिशा में कठोर कानून बनाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें।
परिसीमन पर दिलीप घोष का क्या कहना है?
घोष ने परिसीमन को एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया बताया और कहा कि जनगणना पूरी होने के बाद पूरे देश में यह प्रक्रिया होगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि जो राज्य पहले परिसीमन से लाभान्वित हुए, वही अब इसका विरोध कर रहे हैं।
मोहन भागवत की युवाओं पर टिप्पणी को दिलीप घोष ने क्यों सही ठहराया?
घोष ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को हिंदू समाज का अभिभावक और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि जब युवा भटकाव की स्थिति में होते हैं, तब समाज के वरिष्ठ नेतृत्व का दायित्व है कि वह सही दिशा दिखाए। उन्होंने विश्वास जताया कि भागवत की यह पहल सकारात्मक परिणाम देगी।
राष्ट्र प्रेस
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